शिवराज सिंह चौहान का दावा जी राम जी योजना से गांवों में बढ़ेगा रोजगार, नई योजनाओं से मजबूत होगा ग्रामीण भारत

मनरेगा में पहले फर्जी बिल और वाउचर जैसे मामलों की करीब 11 लाख शिकायतें मिली थीं. इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नई योजना ‘जी राम जी’ में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार और दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके. सरकार का कहना है कि अब पारदर्शिता बढ़ाई गई है.

नई दिल्ली | Published: 18 Mar, 2026 | 10:32 AM

Rural development: देश के विकास में गांवों की भूमिका हमेशा से अहम रही है. यही वजह है कि केंद्र सरकार लगातार ग्रामीण विकास, किसानों की आय और महिलाओं के सशक्तिकरण पर खास ध्यान दे रही है. मंगलवार को राज्यसभा में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार की योजनाओं और नीतियों पर विस्तार से जानकारी दी और बताया कि कैसे ये योजनाएं गांवों की तस्वीर बदल रही हैं.

‘जी राम जी’ योजना: मनरेगा का नया रूप

शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना को मनरेगा का उन्नत और बेहतर संस्करण बताया. उन्होंने कहा कि इस नई योजना को देश में अच्छा जनसमर्थन मिल रहा है और विपक्ष का विरोध भी इसे रोक नहीं पाया है.

इस योजना में कई नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं. पहले जहां मनरेगा में 100 दिन का रोजगार मिलता था, वहीं अब 125 दिन का रोजगार देने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा मजदूरी में सुधार, बेरोजगारी भत्ता और भुगतान में देरी होने पर ब्याज जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं. इस योजना के लिए सरकार ने करीब 95,692 करोड़ रुपये का बजट तय किया है और लगभग सभी राज्यों ने इसे अपने बजट में शामिल किया है.

कांग्रेस पर निशाना और योजनाओं को लेकर सवाल

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने महात्मा गांधी के सिद्धांतों की अनदेखी की और केवल वोट बैंक के लिए नरेगा का नाम बदलकर मनरेगा कर दिया. उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर करीब 600 योजनाएं चलाई गईं, जबकि चंद्र शेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान नेताओं को नजरअंदाज किया गया.

खर्च और फंडिंग पर सरकार का दावा

मंत्री ने बताया कि यूपीए सरकार ने 2006-07 से 2013-14 के बीच मनरेगा पर 2,12,409 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि मौजूदा सरकार ने अब तक 8,58,346.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इससे साफ है कि वर्तमान सरकार ने ग्रामीण रोजगार और विकास पर ज्यादा ध्यान दिया है. साथ ही उन्होंने कहा कि राज्यों को पहले के मुकाबले ज्यादा फंड दिया जा रहा है और इसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया है.

फर्जीवाड़े पर सख्ती और नई व्यवस्था

मनरेगा में पहले फर्जी बिल और वाउचर जैसे मामलों की करीब 11 लाख शिकायतें मिली थीं. इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नई योजना ‘जी राम जी’ में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार और दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके. सरकार का कहना है कि अब पारदर्शिता बढ़ाई गई है और सिस्टम को मजबूत किया गया है ताकि पैसा सही लोगों तक पहुंचे.

महिलाओं के लिए ‘लखपति दीदी’ मॉडल

महिला सशक्तिकरण को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं.

इसके तहत “ड्रोन दीदी”, “कृषि सखी”, “बैंक सखी” और “पशु सखी” जैसे मॉडल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि देश में 6 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जाए.

ग्रामीण योजनाओं की लंबी सूची

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार की नीतियां महात्मा गांधी के “अंतिम व्यक्ति” के सिद्धांत पर आधारित हैं. उन्होंने कई योजनाओं का जिक्र किया, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, हर घर नल जल योजना, आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, जन औषधि केंद्रों से सस्ती दवाएं, पीएम किसान सम्मान निधि और मुद्रा लोन जैसी योजनाएं शामिल हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर बेहतर बनाना है.

पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों पर भी चर्चा

पश्चिम बंगाल में मनरेगा फंड रोकने के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि यह फैसला राजनीतिक नहीं, बल्कि नियमों के तहत लिया गया था. उन्होंने बताया कि सोशल ऑडिट में फर्जी जॉब कार्ड, मशीनों से काम और वित्तीय अनियमितताओं के कई मामले सामने आए थे.

वहीं पंजाब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के समय जहां पंजाब को केवल 858 करोड़ रुपये मिले थे, वहीं अब 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा फंड दिया गया है.

चालू वित्त वर्ष में खर्च का आंकड़ा

लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, 11 मार्च 2026 तक वर्ष 2025-26 में मनरेगा के तहत 81,502.62 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं. इसमें से 65,875.13 करोड़ रुपये मजदूरी के लिए और 15,627.48 करोड़ रुपये सामग्री और प्रशासनिक खर्च के लिए दिए गए हैं.

किसानों और गांवों के लिए सरकार की प्राथमिकता

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. इसके लिए एकीकृत कृषि मॉडल पर काम किया जा रहा है, जिससे छोटे किसानों को भी फायदा मिलेगा.

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