धान खरीदी पर छत्तीसगढ़ में सियासी संग्राम, कांग्रेस ने लगाए 8500 करोड़ नुकसान के आरोप

विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि धान खरीदी में किसी तरह की बड़ी गड़बड़ी या नुकसान नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदा और उन्हें समय पर भुगतान भी किया.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 11 Mar, 2026 | 08:50 AM

छत्तीसगढ़ विधानसभा में धान खरीदी को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला. विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि धान खरीद और उसके भंडारण में भारी गड़बड़ी हुई है, जिससे राज्य को करीब 8500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. हालांकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया.

मामला इतना बढ़ गया कि विधानसभा में हंगामे की स्थिति बन गई और विरोध कर रहे कांग्रेस के 30 विधायकों को कुछ समय के लिए निलंबित भी करना पड़ा. विपक्ष धान खरीद से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा था, लेकिन जब उसकी मांग नहीं मानी गई तो सदन में जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई.

विपक्ष ने उठाए धान भंडारण और प्रबंधन पर सवाल

द प्रिंट की खबर के अनुसार, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में खरीदे गए धान की सही तरीके से देखभाल नहीं की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी मात्रा में धान भंडारण केंद्रों में खराब हो गया या उसका सही हिसाब नहीं है.

महंत के अनुसार, 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में राज्य सरकार ने लगभग 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था, लेकिन इसमें से काफी मात्रा अभी तक निपटान के लिए लंबित है. उन्होंने दावा किया कि लाखों क्विंटल धान या तो चूहों द्वारा खराब हो गया, या फिर खराब रखरखाव के कारण नष्ट हो गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई भंडारण केंद्रों से धान गायब होने की शिकायतें सामने आई हैं. इसके अलावा कुछ मामलों में भ्रष्टाचार और लापरवाही की वजह से भी नुकसान हुआ है.

केंद्र सरकार पर भी लगाए आरोप

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से अतिरिक्त चावल लेने से इनकार कर दिया था. इसके कारण राज्य को बड़ी मात्रा में धान कम कीमत पर बेचना पड़ा. उनका कहना है कि बाजार में धान को लागत से लगभग 50 प्रतिशत कम कीमत पर बेचना पड़ा, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ.

कांग्रेस का दावा है कि इन सभी कारणों को मिलाकर राज्य को कम से कम 8500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. विपक्ष ने इस पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की.

सरकार ने आरोपों को बताया निराधार

विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि धान खरीदी में किसी तरह की बड़ी गड़बड़ी या नुकसान नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदा और उन्हें समय पर भुगतान भी किया.

मंत्री के अनुसार, 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में 25.49 लाख किसानों से 149.25 लाख टन धान खरीदा गया. इसके लिए किसानों को लगभग 34,349 करोड़ रुपये MSP के रूप में दिए गए. इसके अलावा कृषक उन्नति योजना के तहत करीब 11,928 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए. इस तरह कुल मिलाकर किसानों को 46,277 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है.

भंडारण व्यवस्था पर सरकार का दावा

PTI की खबर के अनुसार, दयालदास बघेल ने कहा कि धान को सुरक्षित रखने के लिए सभी भंडारण केंद्रों में उचित व्यवस्था की गई है. इसमें धान को ढकने के लिए कवर, कीट नियंत्रण और अन्य जरूरी इंतजाम किए गए हैं.

उन्होंने बताया कि अधिकांश खरीद केंद्रों पर स्टॉक का सत्यापन पूरा हो चुका है. कुछ स्थानों पर मामूली अनियमितताएं सामने आई थीं, जिन पर कार्रवाई भी की गई है. कई अधिकारियों को नोटिस दिया गया है और कुछ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की गई है.

हंगामे के बाद विधायकों का निलंबन

मंत्री के जवाब के बाद जब विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ तो कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के बीच में पहुंच गए. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए 30 विधायकों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया.

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