फसलों में बीमारी होने से पहले किसानों को पता चल जाएगा, कृषि मंत्रालय की नई टेक्नोलॉजी लाएगी क्रांति

देश में कृषि उत्पादन को हर साल कीट, रोग और अन्य वजहों से भारी नुकसान होता है. आंकड़ों के अनुसार सालाना फसल उत्पादन का लगभग 15 से 25 फीसदी नुकसान किसानों को होता है. धान, गेहूं, दलहन और तिलहन में नुकसान 15 फीसदी तक दर्ज किया गया है. इसकी रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है.

रिजवान नूर खान
नई दिल्ली | Updated On: 26 Jan, 2026 | 08:17 PM

बीते कुछ वर्षों में कीटों और रोगों के प्रकोप से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. वैश्विक स्तर पर सालाना 40 फीसदी कृषि उत्पादन कीटों और रोगों की वजह से चौपट हो जाता है. वहीं, भारत में 25 फीसदी तक फसलें बर्बाद होती हैं. ऐसे में किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कृषि मंत्रालय पेस्टीसाइड एंड डिजीज कंट्रोल टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है. जिसकी मदद से फसल में कीट या रोग होने से पहले ही किसानों को पता चल जाएगा और वे संबंधित उपाय करके फसल को नुकसान से बचा लेंगे. इस कोशिश से किसान की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा, जो किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा.

कीटों-रोगों से हर साल दुनियाभर में 31 लाख करोड़ का फसल नुकसान

एग्रीकल्चर केमिकल सॉल्यूशन बनाने वाली कंपनी बीएएसएफ (BASF) के अनुसार कीटों और रोगों के चलते वैश्विक स्तर पर सालाना लगभग 31 लाख करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हो जाती है. इन हानिकारक कीटों से वैश्विक कृषि उत्पादन में 20 फीसदी से लेकर 40 फीसदी तक का नुकसान हो जाता है. इससे सीधे तौर पर उत्पादन क्षमता और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है.

कीट-रोग सालाना बर्बाद कर देते हैं 25 फीसदी भारत की उपज

भारत में कृषि उत्पादन को हर साल कीट, रोग, खरपतवार और अन्य कारकों की वजह से काफी नुकसान होता है. विभिन्न शोध और कृषि संगठनों के आंकड़ों के अनुसार कीटों, रोगों और अन्य वजहों से फसल उत्पादन का लगभग 15 से 25 फीसदी नुकसान किसानों को होता है. धान, गेहूं, दलहन और तिलहन में नुकसान 15 फीसदी तक दर्ज किया गया है. इस नुकसान का आर्थिक प्रभाव भी बड़ा है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस से भारत में करोड़ों रुपये के उत्पादन मूल्य का नुकसान होता है जो कृषि आय और खाद्य सुरक्षा पर असर डालता है.

फसल में कीट-रोग होने से पहले अलर्ट करेगी टेक्नोलॉजी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की फसलों को कीटों और रोगों से हर साल भारी नुकसान होता है. इससे बचाने के लिए कृषि मंत्रालय पेस्टीसाइड एंड डिजीज कंट्रोल के लिए नई टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है. जिसकी मदद से फसल में कीट या रोग होने से पहले ही किसानों को पता चल जाएगा और वे संबंधित उपाय करके फसल को नुकसान से बचा लेंगे. इस कोशिश से किसान की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा, जो किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा.

हम ऐसा सिस्टम बना रहें हैं जो वैज्ञानिक तरीकों से भविष्यवाणी करेगा – कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह ने गणतंत्र दिवस पर किसान संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि फसलों में आने वाली बीमारी का पता पहले कैसे चल जाए. आप सोच रहे होंगे क्या भविष्यवाणी करेंगे? हां, हम वैज्ञानिक तरीकों से भविष्यवाणी करेंगे. इस पर हम तेजी से काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि नकली खाद, नकली बीज और नकली पेस्टिसाइड, ये किसान की सबसे बड़ी समस्या हैं. हम कोशिश कर रहे हैं कि संसद के इसी सत्र में इन पर कड़ा कानून बनाया जाए.

NPSS पोर्टल और ऐप पर काम कर रहे कृषि वैज्ञानिक

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने National Pest Surveillance System (NPSS) शुरू किया है, जिसका एक वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप है. इसमें 60 से अधिक फसलों के लिए कीट पहचान मॉड्यूल, निगरानी और समय-समय पर एडवाइजरी दी जाती है, जिससे किसान जल्दी पहचान और नियंत्रण उपाय पा सकते हैं. इस प्रणाली का उद्देश्य फसलों को होने वाले कीटों-रोगों से नुकसान कम करना और कृषि उत्पादन बढ़ाना है. लेकिन, जिस उम्मीद से इसे लॉन्च किया गया था उस हिसाब से यह पोर्टल किसानों तक नहीं पहुंच सका है. वहीं, इंटरनल कमियां भी पाई गईं. सरकार इसे अब और बेहतर करने की कोशिशों में जुटी है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 26 Jan, 2026 | 05:17 PM

सर्दियों में गुड़ का सेवन क्यों अधिक किया जाता है?