मसूर बुवाई से पहले खेत में गोबर के साथ मिलाकर डाल दें ये चीज, नहीं होगा उकठा रोग.. बढ़ जाएगी उपज

मसूर की फसल को उकठा रोग से बचाने के लिए बीज को ठीक से उपचारित किए बिना बुवाई नहीं करनी चाहिए. बीज उपचार के लिए प्रति किलो बीज 3 ग्राम थीरम दवा का इस्तेमाल करें. इसके साथ ही किसी कीटनाशक का भी उपयोग कर सकते हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 3 Oct, 2025 | 03:35 PM

Pulse Cultivation: 15 अक्टूबर के बाद से दलहन बुवाई का समय शुरू हो जाएगा. हालांकि, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में किसान अभी से ही दलहन की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं. इसके लिए खेतों की साफ-सफाई की जा रही है. अगर किसान दलहन में मसूर की बुवाई करने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो ये खबर उनके लिए बहुत ही काम की है. क्योंकि आज हम मसूर बुवाई की उन्नत तकनीक के बारे में बात करेंगे, जिसे अपनाते ही पैदावार बढ़ जाएगी.

कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, मसूर की सही समय पर बुवाई करने पर 130 से 140 दिनों में फसल तैयार हो जाती है और पैदावार 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है. इसके साथ ही मसूर से 30 से 35 क्विंटल तक पशु चारा भी मिल जाएगा. अगर किसान चाहें, तो चारे से भी कमाई कर सकते हैं. लेकिन इस फसल को उकठा रोग  से नुकसान का खतरा हमेशा बना रहता है.

फसल के लिए उकठा रोग है बहुत खतरनाक

दरअसल, उकठा रोग एक फंगस के कारण होता है. यह फंगस मिट्टी में पाया जाता है और पौधे की जड़ों को संक्रमित  कर देता है. इससे पौधे पानी और पोषक तत्व नहीं ले पाते और धीरे-धीरे मुरझाकर सूख जाते हैं. शुरुआत में निचली पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और जड़ या तना काटने पर अंदर से भूरा रंग दिखता है. इसलिए जरूरी है कि किसान मसूर की बुवाई के समय ही उकठा रोग का प्रबंधन करें, ताकि फसल स्वस्थ रहे और उत्पादन में कोई गिरावट न आए.

बुवाई से पहले बीज का कैसे करें शोधन

मसूर की फसल को उकठा रोग से बचाने के लिए बीज को ठीक से उपचारित किए बिना बुवाई नहीं करनी चाहिए. बीज उपचार के लिए प्रति किलो बीज 3 ग्राम थीरम दवा का इस्तेमाल करें. इसके साथ ही किसी सिस्टमैटिक कीटनाशक  का भी उपयोग करना चाहिए, ताकि बीज में मौजूद कीट और रोगजनकों से फसल को बचाया जा सके. इससे फसल स्वस्थ रहेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा.

मसूर किसान इस तरह करें मिट्टी का उपचार

मसूर की फसल को स्वस्थ रखने के लिए मिट्टी का उपचार भी बहुत जरूरी है, क्योंकि उकठा रोग फंगस के कारण होता है. खेत की गहरी जुताई के बाद और अंतिम जुताई से पहले ट्राइकोडर्मा को गोबर की सड़ी खाद  में मिलाकर खेत में फैलाएं. फिर खेत को पाटा लगाकर समतल करें और मसूर की बुवाई करें. अगर बुवाई के बाद फसल में उकठा रोग के लक्षण दिखें, तो संक्रमित पौधों को उखाड़कर खेत से बाहर निकाल कर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि रोग फैलने से रोका जा सके और बाकी फसल सुरक्षित रहे.

राइजोबियम बैक्टीरिया के ये हैं फायदे

अच्छा उत्पादन पाने के लिए किसान राइजोबियम बैक्टीरिया  का भी इस्तेमाल करें. यह बैक्टीरिया दलहनी फसलों की जड़ों में गांठें बनाता है, जो हवा से नाइट्रोजन लेकर पौधों को प्रदान करता है. इससे पौधों को नाइट्रोजन की अलग से जरूरत नहीं होती और उनकी बढ़वार अच्छी होती है. इसके अलावा, फसल को रोगमुक्त रखने और बेहतर उत्पादन के लिए प्रणालीगत कीटनाशकों का भी उपयोग करें. इससे फसल में बीमारियों का खतरा कम होता है और अगर बीमारी हो भी जाए तो नुकसान कम होता है.

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Published: 3 Oct, 2025 | 03:32 PM

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