Tip Of The Day: आम फटने से हो रहा लाखों का नुकसान! जानें एक्सपर्ट के ये 6 आसान टिप्स और बचाएं अपनी फसल

Mango Crop Protection: उत्तर भारत में आम की खेती किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत बनी हुई है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आम के फलों का अचानक फटना (Fruit Cracking) उनके लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है. मौसम में अचानक बदलाव, असंतुलित सिंचाई और पोषक तत्वों की कमी जैसे कारण फल के छिलके को कमजोर कर देते हैं, जिससे उत्पादन घटता है और बाजार में फलों की गुणवत्ता भी गिर जाती है. बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ डॉ. एस. के. सिंह ने किसान इंडिया को बताया कि, समय पर सही प्रबंधन अपनाकर किसान इस समस्या को आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 5 Apr, 2026 | 04:54 PM
1 / 6कृषि विशेषज्ञ डॉ. एस.के. सिंह, बताते हैं कि आम में फल फटना एक शारीरिक विकार है, जिसमें फल का छिलका अचानक दरारों के साथ फट जाता है. यह विशेष रूप से फल के पकने के समय होता है, जब अंदरूनी भाग तेजी से बढ़ता है लेकिन बाहरी छिलका उतनी तेजी से फैल नहीं पाता.

कृषि विशेषज्ञ डॉ. एस.के. सिंह, बताते हैं कि आम में फल फटना एक शारीरिक विकार है, जिसमें फल का छिलका अचानक दरारों के साथ फट जाता है. यह विशेष रूप से फल के पकने के समय होता है, जब अंदरूनी भाग तेजी से बढ़ता है लेकिन बाहरी छिलका उतनी तेजी से फैल नहीं पाता.

2 / 6तेज गर्मी, अचानक बारिश और असंतुलित मौसम आम की त्वचा पर दबाव डालते हैं, जिससे फलों के फटने की समस्या बढ़ती है. यह समस्या पिछले कुछ वर्षों में अधिक गंभीर हो गई है.

तेज गर्मी, अचानक बारिश और असंतुलित मौसम आम की त्वचा पर दबाव डालते हैं, जिससे फलों के फटने की समस्या बढ़ती है. यह समस्या पिछले कुछ वर्षों में अधिक गंभीर हो गई है.

3 / 6मिट्टी में नमी का असंतुलन, कैल्शियम और बोरॉन की कमी, तथा अत्यधिक नाइट्रोजन उर्वरकों का प्रयोग फल की मजबूती को कमजोर करता है और फल फटने की संभावना बढ़ा देता है.

मिट्टी में नमी का असंतुलन, कैल्शियम और बोरॉन की कमी, तथा अत्यधिक नाइट्रोजन उर्वरकों का प्रयोग फल की मजबूती को कमजोर करता है और फल फटने की संभावना बढ़ा देता है.

4 / 6फल फटने से उत्पादन में 20-60 फीसदी तक की कमी हो सकती है. बाजार में कम गुणवत्ता वाले फल कम दाम पर बिकते हैं और निर्यात के लिए योग्य फल भी घट जाते हैं, जिससे किसान की आय पर सीधा असर पड़ता है.

फल फटने से उत्पादन में 20-60 फीसदी तक की कमी हो सकती है. बाजार में कम गुणवत्ता वाले फल कम दाम पर बिकते हैं और निर्यात के लिए योग्य फल भी घट जाते हैं, जिससे किसान की आय पर सीधा असर पड़ता है.

5 / 6मिट्टी में समान नमी बनाए रखना, 5–7 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करना और बोरॉन (0.2-0.4 फीसदी) का छिड़काव करना फल फटने की संभावना को कम करता है.

मिट्टी में समान नमी बनाए रखना, 5–7 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करना और बोरॉन (0.2-0.4 फीसदी) का छिड़काव करना फल फटने की संभावना को कम करता है.

6 / 6इसके अलावा कैल्शियम नाइट्रेट और पोटाश का संतुलित उपयोग करें, पेड़ों के चारों ओर मल्चिंग तकनीक अपनाएं, फलों की समय पर तुड़ाई करें और अत्यधिक नाइट्रोजन व अनियमित सिंचाई से बचें.

इसके अलावा कैल्शियम नाइट्रेट और पोटाश का संतुलित उपयोग करें, पेड़ों के चारों ओर मल्चिंग तकनीक अपनाएं, फलों की समय पर तुड़ाई करें और अत्यधिक नाइट्रोजन व अनियमित सिंचाई से बचें.

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