अलसी के डंठल से बनी जैकेट ने खींचा शिवराज का ध्यान, खेती से कमाई का ये तरीका देख रह गए हैरान
Flax Seed Jacket: अलसी के डंठल से बनी जैकेट ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का ध्यान खींचा. छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाएं अलसी के बचे हुए डंठल से रेशा निकालकर कपड़े और जैकेट जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं. इससे फसल के बचे हिस्से का बेहतर इस्तेमाल होने के साथ महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त कमाई के अवसर बढ़ सकते हैं.
Shivraj Singh Chouhan: अलसी का नाम आते ही आमतौर पर इसके बीज और उससे मिलने वाले तेल का ख्याल आता है. लेकिन छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं ने अलसी के डंठल को भी कमाई का जरिया बनाने की कोशिश शुरू कर दी है. इसी की झलक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सक्ती जिले में देखने को मिली. उन्होंने स्व-सहायता समूह की महिलाओं की ओर से अलसी के डंठल से तैयार की गई जैकेट देखी और उनके इस काम की सराहना की.
अलसी के डंठल से तैयार की जैकेट
सक्ती में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण महिलाओं की ओर से लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉल का जायजा लिया. यहां महिलाओं ने अलसी के डंठल से तैयार जैकेट के साथ कई दूसरे उत्पाद भी प्रदर्शित किए थे. वीडियो में भी चौहान इस जैकेट को देखते और इसके बारे में जानकारी लेते नजर आ रहे हैं. खास बात यह है कि जिस डंठल को आमतौर पर फसल का बचा हुआ हिस्सा समझ लिया जाता है, उसी से रेशा निकालकर कपड़ा तैयार किया जा सकता है. इस रेशे का इस्तेमाल जैकेट, कुर्ता और दूसरे कपड़े बनाने में किया जा रहा है.
किसानों और महिलाओं के लिए कमाई का नया मौका
अलसी के डंठल से कपड़ा बनाने का काम सिर्फ एक नया प्रयोग नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का रास्ता भी खुल सकता है. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में पहले से ही अलसी के डंठल से लिनेन जैसा कपड़ा तैयार करने की तकनीक पर काम किया जा रहा है. ग्रामीण महिलाओं को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है. इस तरह अलसी की फसल से सिर्फ बीज बेचकर ही कमाई नहीं होगी, बल्कि उसके डंठल का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. यानी एक ही फसल से अतिरिक्त मूल्य हासिल करने की संभावना बढ़ती है.
ये है अलसी की असली जैकेट… pic.twitter.com/wjQ2mVKNv6
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) September 11, 2026
कपड़े के साथ दूसरे उत्पादों पर भी जोर
सक्ती की प्रदर्शनी में सिर्फ अलसी से बनी जैकेट ही नहीं, बल्कि कोसा और मल्बरी से जुड़े उत्पाद भी रखे गए थे. शिवराज सिंह चौहान ने इन उत्पादों को देखा और ग्रामीण महिलाओं के हुनर और उद्यमिता की तारीफ की. ऐसे उत्पादों की खासियत यह है कि इनमें स्थानीय संसाधनों और स्थानीय लोगों के हुनर का इस्तेमाल होता है. अगर इन्हें बेहतर डिजाइन, अच्छी पैकेजिंग और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो ग्रामीण इलाकों में छोटे कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है.
अलसी के रेशे की बढ़ सकती है मांग
अलसी के डंठल से निकलने वाले प्राकृतिक रेशे से कपड़ा बनाने की तकनीक पर छत्तीसगढ़ में पहले से काम हो रहा है. विशेषज्ञों और संस्थानों की कोशिश है कि इस तकनीक को आसान बनाया जाए और बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल हो, ताकि किसानों और महिलाओं की आमदनी बढ़ाई जा सके. दरअसल, अलसी के रेशे को कोसा और कपास जैसे दूसरे रेशों के साथ मिलाकर भी कपड़े तैयार किए जा सकते हैं. इससे जैकेट, साड़ी, कुर्ता और दूसरे कपड़ों के लिए नए विकल्प तैयार हो सकते हैं.
खेती से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर जोर
अलसी की यह जैकेट एक बड़ी तस्वीर की ओर भी इशारा करती है. अगर किसानों की फसल से निकलने वाले हर हिस्से का इस्तेमाल किसी उपयोगी उत्पाद में किया जाए तो खेती से होने वाली कमाई बढ़ सकती है. वहीं, ग्रामीण महिलाओं को ऐसे काम से जोड़कर उन्हें अपने गांव में ही रोजगार का अवसर दिया जा सकता है. सक्ती में शिवराज सिंह चौहान के सामने प्रदर्शित यह जैकेट इसी सोच का उदाहरण है, जहां खेती, स्थानीय हुनर और महिला उद्यमिता को जोड़कर एक साधारण डंठल को बाजार में बिकने वाले उत्पाद में बदला जा रहा है.