12 लाख घरों का बिजली बिल जीरो.. 75 हजार करोड़ बिजली खर्च बचाने पर कितना सटीक है सौर ऊर्जा मिशन? समझिए सोलर सिस्टम का गणित
Solar Energy Alternative to Electricity: सबसे ज्यादा बिजली का उपभोग घरेलू इस्तेमाल में होने के कारण भारत में बिजली उपभोक्ता तीन प्रकार के सोलर सिस्टम लगा सकते हैं. पहला ऑफ ग्रिड, दूसरा ऑन ग्रिड और तीसरा हाइब्रिड सोलर सिस्टम.
सोलर एनर्जी से बिजली बिल शून्य करने के साथ ही बिजली बिल पर होने वाले 75 हजार करोड़ के खर्च को बचाने के टारगेट को पूरा करने के लिए पीएम सूर्य घर और सोलर रूफ टॉप स्कीम चलाई जा रही हैं. सरकार का दावा है कि इससे 12.5 लाख घरों की बिजली का बिल शून्य हो गया है. सरकार ने सौर ऊर्जा मिशन को देशव्यापी स्तर पर सफल बनाने के लिए गांव एवं शहर की सामाजिक, आर्थिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों में भारी अंतर को ध्यान में रखते हुए दो अलग योजनाएं लागू की. इनमें शहरी क्षेत्रों के लिए पीएम सूर्य घर योजना को लागू किया गया है. इस योजना का खाका तैयार करने में दिल्ली की सोलर रूफ टॉप पॉलिसी ने अहम भूमिका निभाई. वहीं, देश में सोलर सिस्टम लागू करने की तीन व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, जिनमें पहला ऑफ ग्रिड, दूसरा ऑन ग्रिड और तीसरा हाइब्रिड सोलर सिस्टम. आइए विस्तार से समझते हैं..
24 साल पहले सोलर एनर्जी को बिजली विकल्प के रूप में इस्तेमाल की शुरुआत
शहरी क्षेत्रों में सरकारी और गैर सरकारी इमारतों की छत का इस्तेमाल सौर ऊर्जा बनाने में करने का मार्ग प्रशस्त करने वाली इस पॉलिसी को सबसे पहले 2011-12 में दिल्ली की तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार ने लागू किया था. इसके तहत दिल्ली सरकार के सभी सरकारी विभागों के कार्यालय, स्कूल कॉलेज और अस्पताल सहित अन्य इमारतों की छत का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करने की अनिवार्यता को लागू किया गया. इसके दूसरे चरण में दिल्ली की हाउसिंग सोसायटियों को शामिल करते हुए रियायती दरों पर इनमें सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा बनाने का काम किया गया. इसके बाद दिल्ली सरकार ने निजी आवास की छतों पर और देहात दिल्ली में खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर सोलर पार्क बनाने को मंजूरी दी गई. दिल्ली में सोलर पार्क बनाने की शुरुआत इंद्रप्रस्थ बिजली घर से की गई, जिसकी खाली पड़ी जमीन पर पहला सोलर पार्क बनाया गया.
अब तक 25 लाख से अधिक घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगे
2014 में मोदी सरकार बनने के बाद दिल्ली की सोलर रूफ टॉप पॉलिसी की खूबियों और खामियों का बारीक विश्लेषण करने के बाद इसे देशव्यापी स्तर पर शहरी क्षेत्रों में पीएम सूर्य घर योजना के रूप में लागू किया गया. इस योजना का शुरुआती नाम पीएम सूर्योदय योजना था. पीएम मोदी ने 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भगवान राम की प्रतिमा के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में इस योजना का शुभारंभ किया. इसके बाद 13 फरवरी 2024 को इस योजना का नाम बदलकर पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना करते हुए इसे 75 हजार करोड रुपये की लागत से लागू किया गया. इसके तहत अब तक 25 लाख से अधिक घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लग चुके है.
12.5 लाख घरों का बिजली बिल शून्य होने का दावा
सरकार का दावा है कि इससे 12.5 लाख घरों की बिजली का बिल शून्य हो गया है. इसके साथ ही यह योजना दुनिया की सबसे बडी सोलर रूफ टॉप योजना बन चुकी है. सरकार ने साल 2027 तक इस योजना के तहत 1 करोड़ घरों तक सोलर रूफ टॉप पैनल लगाने का लक्ष्य तय किया है. ऐसा होने पर सरकार का अनुमान है कि इससे 75 हजार करोड रुपये के बिजली बिल के खर्च में बचत हो जाएगी. ऐसा होने पर सरकार द्वारा इस योजना पर खर्च की गई राशि की भी प्रतिपूर्ति हो जाएगी. साथ ही साथ सरकार को यह भी भरोसा है कि इस योजना की मदद से भारत 2030 तक कार्बन उत्सर्जन के मामले में उल्लेखनीय कमी दर्ज कराने वाला दुनिया का अग्रणी देश होगा.
भारत में सोलर सिस्टम लागू करने की व्यवस्था
भारत में बिजली वितरण की दो स्तरीय व्यवस्था है. पहला घरेलू स्तर पर आवासीय भवनों में बिजली का कनेक्शन दिया जाता है. जबकि औद्योगिक या व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए कारोबारी स्तर पर बिजली का कमर्शियल कनेक्शन दिया जाता है. बिजली वितरण की इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही सौर ऊर्जा मिशन की कार्ययोजना को लागू किया गया है. इसके अंतर्गत सबसे ज्यादा बिजली का उपभोग घरेलू इस्तेमाल में होने के कारण भारत में बिजली उपभोक्ता तीन प्रकार के सोलर सिस्टम लगा सकते हैं. पहला ऑफ ग्रिड, दूसरा ऑन ग्रिड और तीसरा हाइब्रिड सोलर सिस्टम.
कैसे काम करता है ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम
ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम, किसी बिजली उपभोक्ता द्वारा अपनी बिजली खपत की जरूरत के मुताबिक सीधे बाजार से खरीदकर अपने घर में लगवाया जा सकता है. इस सिस्टम पर किसी प्रकार की सब्सिडी नहीं मिलती है. क्योंकि सरकार द्वारा ऑन ग्रिड एवं हाइब्रिड सोलर सिस्टम को ही पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में शामिल किया गया है. योजना के शुरुआती दौर में सिर्फ ऑन ग्रिड सिस्टम को ही लगाने पर सब्सिडी मिलती थी. बाद में अक्टूबर 2025 से हाइब्रिड सिस्टम को भी इसमें शामिल करते हुए सब्सिडी के दायरे में लाया जा चुका है.
ऑन ग्रिड सिस्टम से उपभोक्ता सरकार को बेचता है बिजली
ऑन ग्रिड सिस्टम में कोई भी बिजली उपभोक्ता अपने घर के बिजली लोड के मुताबिक सोलर सिस्टम लगा सकता है, जिसके घर में 1 किलोवाट लोड तक का बिजली कनेक्शन है, वह इस योजना के तहत 1 किलोवाट क्षमता का ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम लगवा सकता है. अगर किसी बिजली उपभोक्ता के घर में 1 किलोवाट लोड का बिजली कनेक्शन है और वह 3 किलोवाट क्षमता वाला ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाना चाहता है, तो उसे पीएम सूर्य घर योजना में आवेदन करने से पहले अपने घरेलू बिजली कनेक्शन का लोड भी 3 किलोवाट कराना होगा. चूंकि इस योजना में लगने वाले सोलर सिस्टम से बनने वाली बिजली सीधे ग्रिड में चली जाती है, इसलिए इस बिजली का उपयोग खुद उपभोक्ता नहीं कर पाता है. सोलर सिस्टम से बन कर ग्रिड में जाने वाली बिजली की कीमत सरकार द्वारा उपभोक्ता के बिजली बिल में समायोजित कर दी जाती है. इस लिहाज से बिजली उपभोक्ता सरकार को बिजली बेच भी सकते हैं.
कितना बेस्ट है हाइब्रिड सोलर सिस्टम
हाइब्रिड सोलर सिस्टम में बनने वाली बिजली ग्रिड में भी भेजी जाती है और बिजली कटौती होने पर उपभोक्ता अपने सोलर सिस्टम से इनवर्टर की तर्ज पर बिजली ले सकता है. जबकि ऑन ग्रिड सिस्टम में यह सुविधा नहीं मिलती है. ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम बिजली कटौती होने के साथ ही बंद हो जाता है. ऐसे में ऑन ग्रिड सिस्टम लगवाने वाले बिजली उपभोक्ताओं को बिजली कटौती होने की स्थिति में इनवर्टर पर ही निर्भर रहना पडता है. जबकि हाइब्रिड सिस्टम, बिजली उपभोक्ताओं को इनवर्टर से मुक्ति प्रदान कर देता है. इसीलिए हाइब्रिड सिस्टम ऑन ग्रिड सिस्टम की तुलना में महंगा होता है.
योजना की खूबियां और खामियां
पीएम सूर्य घर योजना की सबसे बडी खूबी, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाते हुए स्वच्छ ऊर्जा निर्माण के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में जनभागीदारी को सुनिश्चित करना है. धरती के पर्यावास को साफ बनाने के इस काम में पीएम सूर्य घर योजना के माध्यम से भारत की जनता सीधे तौर पर अपनी प्रत्यक्ष भागीदारी को निभा रही है. निश्चित तौर पर इससे लोगों की लगातार बढ रही बिजली की जरूरत को पूरा करने में जेब पर पड रहे बोझ को शून्य स्तर तक लाने में मदद मिल रही है.
इस योजना की कामयाबी में सरकारी सब्सिडी ने ही सबसे बड़ा योगदान दिया है. यही बात इस योजना की खूबी है, हालांकि अब यह इसकी खामी भी बन रही है. यह बात इस योजना के प्रावधानों को लागू करने के बाद इसके लाभार्थियों के अनुभव से स्वतः स्पष्ट हो जाती है.