सूरत में नकली ‘देसी घी’ का भंडाफोड़, पाम ऑयल-केमिकल से बन रहा था घी, FSSAI ने बताया कैसे करें जांच

जांच में जो बातें सामने आईं, वह चौंकाने वाली हैं. आरोपी थोड़ी मात्रा में असली घी लेकर उसमें पाम ऑयल, वनस्पति घी और वेजिटेबल बटर मिलाकर नकली घी तैयार करते थे. घी जैसी खुशबू देने के लिए आर्टिफिशियल एसेंस का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि पीला रंग दिखाने के लिए सिंथेटिक कलर मिलाया जाता था.

नई दिल्ली | Published: 18 Apr, 2026 | 08:41 AM

Fake ghee case Surat: गुजरात के सूरत में रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली एक जरूरी चीज—घी—को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस ने “ऑपरेशन शुद्धि” के तहत नकली घी बनाने और बेचने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस कार्रवाई में लाखों रुपये का मिलावटी घी और मशीनरी जब्त की गई है.

यह मामला सिर्फ एक अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर खतरा भी है. जिस घी को लोग शुद्ध समझकर इस्तेमाल कर रहे थे, वह असल में केमिकल और सस्ते तेलों का मिश्रण निकला.

छापेमारी में सामने आया बड़ा घोटाला

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सूरत के सचिन GIDC इलाके में स्थित ‘सबका फूड्स’ नाम की फैक्ट्री और चोर्यासी तालुका के तलंगपुर गांव में बने गोदाम पर छापा मारा.

इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 2,029 किलोग्राम नकली घी बरामद किया, जिसकी कीमत करीब 14.19 लाख रुपये आंकी गई है. इसके अलावा 21.61 लाख रुपये की मशीनरी और कच्चा माल भी जब्त किया गया. इस तरह कुल जब्ती की रकम 36.36 लाख रुपये तक पहुंच गई.

इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों भरत पोलारा (48) और अमीन वधवानिया (45) को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है.

कैसे बनता था नकली घी

जांच में जो बातें सामने आईं, वह चौंकाने वाली हैं. आरोपी थोड़ी मात्रा में असली घी लेकर उसमें पाम ऑयल, वनस्पति घी और वेजिटेबल बटर मिलाकर नकली घी तैयार करते थे.

घी जैसी खुशबू देने के लिए आर्टिफिशियल एसेंस का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि पीला रंग दिखाने के लिए सिंथेटिक कलर मिलाया जाता था. केमिकल्स को सिरिंज की मदद से सटीक मात्रा में मिलाया जाता था, जिससे असली और नकली घी में फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाता था. आरोपी बाजार की मांग के हिसाब से अलग-अलग क्वालिटी का घी तैयार करते थे, ताकि ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके.

दो साल से चल रहा था गोरखधंधा

पुलिस के मुताबिक यह अवैध कारोबार पिछले करीब दो साल से चल रहा था. नकली घी को ‘विदुर काउ घी’ और ‘देसी घी’ जैसे नामों से पैक करके बेचा जाता था. इसकी सप्लाई झुग्गी-बस्तियों की दुकानों, छोटे होटलों और हाईवे किनारे ढाबों तक की जाती थी. थोक में यह घी 600 से 650 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता था, जबकि बाजार में इसकी कीमत 1000 रुपये तक वसूली जाती थी.

अधिकारियों को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल सूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण गुजरात के बाहर भी फैला हो सकता है. फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.

सेहत के लिए कितना खतरनाक है यह मिलावटी घी

घी जैसे खाद्य पदार्थ में इस तरह की मिलावट लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है. केमिकल और सिंथेटिक पदार्थ शरीर में कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकते हैं. लगातार ऐसे मिलावटी उत्पादों का सेवन करने से पाचन संबंधी समस्याएं, त्वचा रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए इस तरह के मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है.

घर पर ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान

खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI समय-समय पर लोगों को जागरूक करता है और आसान घरेलू जांच के तरीके भी बताता है.

घी की शुद्धता जांचने के लिए एक आसान तरीका यह है कि एक पारदर्शी कांच के बर्तन में आधा चम्मच घी लें और उसमें आयोडीन टिंचर की 2-3 बूंदें डालें. अगर घी का रंग पीला ही बना रहता है, तो वह शुद्ध माना जाता है. लेकिन अगर उसका रंग नीला हो जाए, तो समझ लें कि उसमें स्टार्च की मिलावट है. यह तरीका बेहद सरल है और घर पर आसानी से किया जा सकता है.

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानी

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि खाने-पीने की चीजों को खरीदते समय सतर्क रहना कितना जरूरी है. हमेशा भरोसेमंद दुकानों से ही सामान खरीदें, पैकेजिंग और ब्रांड पर ध्यान दें और शक होने पर घरेलू जांच जरूर करें.

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