देश में जलसंकट के साथ ही दूषित पेयजल ने लोगों को बीमार करना शुरू कर दिया है. गुजरात के अहमदाबाद में दूषित जल पीने से 50 लोग बीमार हो गए हैं. इससे पहले गांधीनगर में 70 लोग दूषित पानी पीने से टाइफाइड का शिकार बन गए थे. जबकि, मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित जल पीने से 7 लोगों की मौत हो चुकी है. ऐसे में अब फिर से भारत दूषित जल को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है. जबकि, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में दूषित पेयजल और जलसंकट को भारत के लिए खतरे की घंटी बताया गया है.
अहमदाबाद में दूषित पेयजल से नौ रिहायशी सोसायटियों में बीमारी फैली
गुजरात के अहमदाबाद के घाटलोडिया इलाके में 4 जून को 50 लोग दस्त और उल्टी के लक्षणों के साथ बीमार पड़ गए. इनमें से 11 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि यह घटना तब हुई जब ड्रेनेज सिस्टम का दूषित पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में घुस गया. हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि अपने घरों में आए दूषित पानी को पीने के बाद सैकड़ों लोग बीमार हो गए हैं. अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि इस इलाके की नौ रिहायशी सोसायटियां चार दिन पहले इस दूषित पानी से प्रभावित हुई थीं.
इंदौर और गांधीनगर के मामलों पर मानवाधिकार आयोग की सख्ती
दूषित पेयजल एक गंभीर जनस्वास्थ्य और मानवाधिकार का मुद्दा है. इस साल जनवरी में मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी के कारण 7 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद दूषित पानी से गांधीनगर में टाइफाइड फैलने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नगर निगम और जिम्मेदार अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है. राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने शहर के एक इलाके में टाइफाइड के कुल 70 सक्रिय मरीजों की पुष्टि की है. रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के गांधीनगर में नई बिछाई गई पाइप लाइन में सात जगहों पर लीक का पता चला है, जिससे सीवेज का पानी पेयजल में मिला और उसे पीकर लोग बीमार हुए.
यूएन की रिपोर्ट में भारत की गंभीर स्थिति
संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार भारत अपने गंभीर जल संकट और दूषित पेयजल की समस्या से जूझ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि देश का लगभग 70 फीसदी भूजल और सतही जल पीने योग्य नहीं है. इस दूषित पानी से भारत में हर साल लगभग 2 लाख लोग गंभीर रूप से बीमार होते हैं और कई की जान चली जाती है. संयुक्त राष्ट्र (UN) और नीति आयोग के आंकड़ों के आधार पर भारत के जल संकट की स्थिति खराब रैकिंग में आई है. जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों में 120वें स्थान पर है. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में पेयजल को लेकर गंभीर स्थिति है. लगभग 60 करोड़ भारतीय अत्यधिक से लेकर गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं. इसके चलते बीमारियों के प्रकोप से लगभग 21 फीसदी संक्रामक रोग सीधे तौर पर दूषित और खराब पानी के कारण होते है.

75 तालाबों को जिंदा करने वाले वॉटर हीरो रामबाबू क्या बोले
मंगलभमि फाउंडेशन के प्रमुख रामबाबू तिवारी ने किसान इंडिया को बताया कि देश में पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि उनके संगठन ने बीते कुछ वर्षों के दौरान बुंदेलखंड के अलग-अलग जिलों में 75 तालाबों को बचाने, पुनर्जीवित करने का काम किया है. उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में पेयजल संकट है, वहां पर लोग दूषित पानी पी रहे हैं. गंदे पोखरों, कुओं-तालाबों का दूषित पानी इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उन्हें बीमार कर रहा है. उन्होंने जलसंकट दूर करने के लिए बारिश के जल को इकट्ठा करने और पानी के सही तरीके से इस्तेमाल करने की बात कही है.