यूपी बना देश का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक राज्य, 51 हजार मीट्रिक टन उत्पादन से बनाया नया रिकॉर्ड

Mushroom Farming: उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक राज्य बन गया है. साल 2024-25 में प्रदेश ने 51 हजार मीट्रिक टन मशरूम का उत्पादन किया, जो भारत के कुल उत्पादन का करीब 13 फीसदी है. सरकार किसानों को मशरूम की खेती के लिए 40 से 50 फीसदी सब्सिडी दे रही है.

नोएडा | Updated On: 2 Aug, 2026 | 08:15 PM

Uttar Pradesh Mushroom Production: उत्तर प्रदेश अब सिर्फ गेहूं, धान और गन्ने की खेती के लिए ही नहीं, बल्कि मशरूम उत्पादन में भी देश का नंबर-1 राज्य बन गया है. साल 2024-25 में प्रदेश ने 51 हजार मीट्रिक टन मशरूम का उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया है. यह उपलब्धि किसानों की मेहनत, आधुनिक खेती के बढ़ते इस्तेमाल और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का नतीजा मानी जा रही है.

कम लागत, कम जगह और कम समय में अच्छी कमाई देने वाली मशरूम की खेती आज किसानों के लिए आय बढ़ाने का नया विकल्प बन रही है. खास बात यह है कि महिलाएं और छोटे किसान भी इस खेती से जुड़कर अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं.

देश के कुल उत्पादन में यूपी की बड़ी हिस्सेदारी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में देश में करीब 4.27 लाख मीट्रिक टन मशरूम का उत्पादन हुआ. इसमें उत्तर प्रदेश का योगदान करीब 13 प्रतिशत रहा. इसी के साथ यूपी देश का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादन करने वाला राज्य बन गया है. सरकार का कहना है कि किसानों को बेहतर प्रशिक्षण, नई तकनीक की जानकारी और आर्थिक सहायता मिलने से मशरूम की खेती तेजी से बढ़ी है. इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की कमाई बढ़ाने में भी मदद मिल रही है.

किसानों को मिल रही 40 से 50 फीसदी सब्सिडी

प्रदेश सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है. इसी के तहत एकीकृत बागवानी विकास मिशन के माध्यम से मशरूम की खेती करने वाले किसानों को 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. इसके अलावा पिछले वर्ष मशरूम उत्पादन, कंपोस्ट तैयार करने और स्पान (बीज) बनाने वाली 30 इकाइयों को भी 40 प्रतिशत अनुदान देने की मंजूरी दी गई. इससे नए उद्यमियों को भी इस क्षेत्र में आगे आने का मौका मिल रहा है.

छोटे किसान भी शुरू कर सकते हैं मशरूम की खेती

अगर कोई किसान छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करना चाहता है तो उसके लिए भी सरकार की विशेष योजना है. 200 वर्ग फुट के छप्पर मॉडल के तहत मशरूम उत्पादन शुरू करने पर अधिकतम 1 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है. इस योजना के तहत प्रदेश में अब तक 80 मशरूम यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं. इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी खेती से अतिरिक्त आय का रास्ता खुला है.

कई जिलों में तेजी से बढ़ रहा उत्पादन

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मशरूम की खेती किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. लखनऊ, प्रयागराज, सहारनपुर, मिर्जापुर, जौनपुर, हरदोई, बस्ती, मेरठ, प्रतापगढ़, रायबरेली और सोनभद्र जैसे जिलों में बड़ी संख्या में किसान इस खेती को अपना रहे हैं. इन जिलों में किसानों को मशरूम की आधुनिक तरीके से खेती करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. साथ ही उन्हें खेती से जुड़ी नई तकनीक, जरूरी जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि मशरूम का उत्पादन बढ़े और किसानों की कमाई में भी इजाफा हो.

महिलाओं के लिए बन रही रोजगार का नया जरिया

मशरूम की खेती सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का मजबूत साधन बन रही है. कम जगह में शुरू होने वाली यह खेती तीन से चार सप्ताह में तैयार हो जाती है. इसलिए महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी इसे अपनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं. इससे गांवों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है.

किसानों की आय बढ़ाने में निभा रही अहम भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मशरूम की खेती किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है. कम निवेश, कम समय और बेहतर बाजार कीमत के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. अगर इसी तरह किसानों को प्रशिक्षण, सब्सिडी और बाजार की सुविधा मिलती रही, तो उत्तर प्रदेश न केवल उत्पादन में अपनी बढ़त बनाए रखेगा, बल्कि मशरूम आधारित कृषि कारोबार को भी नई ऊंचाई देगा. इससे किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के साथ बेहतर आय का अवसर मिलेगा.

Published: 2 Aug, 2026 | 09:22 PM

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