कमजोर मानसून के बीच UP में खरीफ 2026 की तैयारी, DSR से बढ़ेगी पैदावार, कम होगा पानी का उपयोग
Kharif season 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 के लिए नई कृषि रणनीति शुरू की है, जिसमें किसानों को DSR (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इससे पानी की बचत होगी और फसल जल्दी तैयार होगी. सरकार का लक्ष्य इस साल खरीफ उत्पादन को बढ़ाकर 30.25 मिलियन टन करना है.
UP Kharif Agriculture Plan: भारतीय मौसम विभाग द्वारा 2026 में कम और अनियमित मानसून की संभावना जताए जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने खेती के लिए नई योजना बनाई है. अब खरीफ सीजन में किसानों को डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) यानी धान की सीधी बुवाई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस तकनीक में धान की नर्सरी तैयार करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि बीज सीधे खेत में बो दिए जाते हैं. इससे पानी की बचत होती है और कम बारिश या जल संकट की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन की संभावना रहती है.
DSR तकनीक से पानी की बचत और जल्दी फसल तैयार
DSR तकनीक को धान की खेती का एक आधुनिक तरीका माना जाता है. इसमें पहले की तरह नर्सरी लगाकर रोपाई करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि बीज सीधे खेत में बो दिए जाते हैं. इस तरीके से पानी की काफी बचत होती है, लगभग 15 से 20 फीसदी तक. इसके साथ ही फसल भी जल्दी तैयार हो जाती है, करीब 15 से 20 दिन पहले. इससे किसानों को अगली रबी फसल की तैयारी के लिए ज्यादा समय मिल जाता है और खेती का काम भी आसान हो जाता है.
खरीफ अभियान 2026 की शुरुआत
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने ‘खरीफ अभियान 2026’ की शुरुआत की है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को बदलते मौसम, कमजोर मानसून और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के लिए तैयार करना है. सरकार इस योजना के तहत मौसम के अनुसार खेती करने, पानी बचाने और दाल-तिलहन जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है, ताकि किसानों को बेहतर फायदा मिल सके.
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उत्पादन बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस साल खरीफ फसलों और तिलहन उत्पादन को बढ़ाकर करीब 30.25 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. यह पिछले साल के 25.65 मिलियन टन उत्पादन से लगभग 20 फीसदी ज्यादा है. अधिकारियों का कहना है कि यह लक्ष्य बेहतर खेती तकनीक, आधुनिक तरीकों और खेती के बढ़े हुए क्षेत्र की मदद से हासिल किया जा सकता है.
किसानों के लिए बेहतर संसाधन और प्रशिक्षण
कृषि विभाग के अनुसार किसानों को समय पर प्रमाणित बीज, खाद और खेती से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है. गांव स्तर पर सेमिनार भी लगाए जा रहे हैं, जिनमें किसानों को सूखा प्रबंधन, फसल बदलकर खेती करना और मिट्टी को बचाने के तरीके समझाए जा रहे हैं. भारत सरकार के ‘खेत बचाओ’ अभियान के तहत किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे सिर्फ मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद का इस्तेमाल करें. इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहेगी और फसल उत्पादन में सुधार होने की उम्मीद है.
दाल, तिलहन और मोटे अनाज पर जोर
राज्य को दाल, तिलहन और मिलेट्स में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को मुफ्त मिनी किट और सब्सिडी वाले बीज दिए जाएंगे. सरकार के पास फिलहाल उन्नत बीज और कृषि संसाधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिसका लाभ किसानों तक पहुंचाया जा रहा है.
उत्तर प्रदेश की यह नई कृषि रणनीति न केवल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी. DSR तकनीक और वैज्ञानिक खेती के जरिए राज्य एक बार फिर कृषि उत्पादन में नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है.