पश्चिम बंगाल में 4 रुपये किलो आलू, रेट में गिरावट से 14 लाख किसान प्रभावित.. बढ़ा सियासी पारा

साल 2025-26 में आलू का उत्पादन करीब 140-150 लाख टन रहा, जो पिछले साल से लगभग 20 फीसदी ज्यादा है. लेकिन इतनी ज्यादा पैदावार होने की वजह से बाजार में आलू की भरमार हो गई और किसानों को मजबूरी में 4-5 रुपये प्रति किलो के बेहद कम दाम पर बेचने पड़ रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 20 Apr, 2026 | 06:49 PM

Potato Rate Fall: पश्चिम बंगाल के कई जिलों में आलू का संकट बढ़ता जा रहा है. किसानों को मार्केट में उचित रेट नहीं मिल रहा है. किसान 4 रुपये किलो आलू बेचने को मजबूर हो गए हैं, जो सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि करीब 10 लाख किसान और 40 लाख से ज्यादा मतदाता इससे प्रभावित हैं.  पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है. यहां हुगली, पूर्व बर्धमान, पश्चिम बर्धमान, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा, बांकुड़ा, पुरुलिया और नदिया जैसे जिलों में आलू की खेती होती है. उत्तर बंगाल का कूच बिहार भी इसका प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है.

इनमें हुगली को आलू उत्पादन का मुख्य केंद्र माना जाता है, जबकि बर्धमान और मेदिनीपुर जिले भी बड़े स्तर पर उत्पादन करते हैं. ये ज्यादातर इलाके दक्षिण बंगाल में आते हैं, जिसे ममता बनर्जी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है. साल 2025-26 में आलू का उत्पादन करीब 140-150 लाख टन रहा, जो पिछले साल से लगभग 20 फीसदी ज्यादा है. लेकिन इतनी ज्यादा पैदावार होने की वजह से बाजार में आलू की भरमार हो गई और किसानों को मजबूरी में 4-5 रुपये प्रति किलो के बेहद कम दाम पर बेचने पड़ रहे हैं.

200 रुपये प्रति क्विंटल मिला भाव

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल बंपर फसल होने से बाजार में सप्लाई बहुत बढ़ गई, जिससे कीमतें गिर गईं और किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल पा रही. कई किसानों ने एक बीघा में आलू उगाने पर करीब 30,000 रुपये खर्च किए, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ 200 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला. ज्यादातर किसानों ने बुवाई से पहले साहूकारों से कर्ज लिया था, लेकिन अब कम कीमत मिलने से वे भारी कर्ज में डूब गए हैं. इससे उनकी परेशानी और निराशा लगातार बढ़ती जा रही है, क्योंकि उन्हें फिलहाल कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा.

किसान नहीं कर रहे आलू की खुदाई

कई किसान इतनी कम कीमत मिलने के कारण आलू की खुदाई ही नहीं कर रहे और फसल को खेत में ही सड़ने दे रहे हैं. उनका कहना है कि अगर वे आलू निकालकर कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं तो उस पर अतिरिक्त खर्च आएगा, जो वे अभी उठा नहीं सकते. पश्चिम बंगाल के अनुकूल मौसम की वजह से इस साल उत्पादन काफी ज्यादा हुआ है, जिससे समस्या और बढ़ गई है. यहां आमतौर पर नवंबर की शुरुआत से आखिर तक आलू की बुवाई होती है और ज्योति, हिमांगिनी, पोखराज, चंद्रमुखी, S-6 और K-22 जैसी किस्में उगाई जाती हैं. इनमें ज्योति किस्म सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और बाजार में बेहतर दाम दिलाती है.

किसान ममता बनर्जी से हैं नाराज

किसान इस संकट के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नीतियों को भी जिम्मेदार मान रहे हैं. उनका कहना है कि आलू के निर्यात नियमों  में अचानक बदलाव से हालात बिगड़े हैं. पहले वे ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में आलू बेचकर बेहतर कीमत पा लेते थे, लेकिन अब यह रास्ता सीमित हो गया है. पहले जब राज्य में आलू की कमी हुई थी, तब सरकार ने आलू के बाहर भेजने पर रोक लगा दी थी. बाद में उत्पादन बढ़ने पर यह पाबंदी हटा ली गई, लेकिन तब तक दूसरे राज्यों ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए या तो कहीं और से आलू मंगाना शुरू कर दिया या खुद ही उत्पादन बढ़ा लिया.

किसानों को ज्यादा मुनाफे की उम्मीद थी

ऐसे में पश्चिम बंगाल के किसानों ने ज्यादा मुनाफे की उम्मीद में भारी निवेश किया था, लेकिन उन्हें बाहर के बाजार ही नहीं मिले. इसका नतीजा यह हुआ कि अब राज्य के अंदर ही आलू की भारी भरमार हो गई है और कीमतें गिर गई हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस संकट से निपटने के लिए कई कदमों का ऐलान किया है, लेकिन ज्यादातर किसान इन उपायों को लेकर आशंकित हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 20 Apr, 2026 | 06:46 PM
ज्ञान का सम्मान क्विज

भारत की सबसे छोटी गाय नस्ल का नाम क्या है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
उत्तर प्रदेश
विजेताओं के नाम
कन्हैया कुमार रंजन, समस्तीपुर, बिहार

लेटेस्ट न्यूज़