UP में हर जिले में लगेंगे 1000 से ज्यादा मिनी बायोगैस प्लांट, गोबर से बनेगी गैस और खाद

UP Biogas Plant Scheme: उत्तर प्रदेश सरकार हर जिले में 1,000 से ज्यादा मिनी बायोगैस प्लांट लगाने की योजना बना रही है. इस योजना के तहत गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार की जाएगी. आईआईटी दिल्ली तकनीकी सहयोग देगा और ग्रामीण युवाओं को प्लांट संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.

नोएडा | Updated On: 20 Jul, 2026 | 11:36 AM

Mini Biogas Plant: उत्तर प्रदेश सरकार गो आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत प्रदेश के हर जिले में 1,000 से अधिक मिनी बायोगैस प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है. इस योजना का मकसद गोबर को बेकार समझने की बजाय उसे ऊर्जा, जैविक खाद और आय का जरिया बनाना है. सरकार का मानना है कि इससे गांवों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, किसानों का खर्च कम होगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

इस महत्वाकांक्षी योजना में आईआईटी दिल्ली तकनीकी सहयोग देगा, जबकि बायोगैस क्षेत्र की 15 से ज्यादा निजी कंपनियों ने भी इसमें भागीदारी की इच्छा जताई है. साथ ही सरकार ग्रामीण परिवारों को प्लांट लगाने के लिए अनुदान देने की तैयारी भी कर रही है.

गोशालाएं बनेंगी ऊर्जा और आय का केंद्र

सरकार की योजना है कि प्रदेश की गोशालाओं को सिर्फ पशु आश्रय स्थल तक सीमित न रखकर उन्हें ‘रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब’ के रूप में विकसित किया जाए. यहां गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार की जाएगी. भविष्य में इस मॉडल को कार्बन क्रेडिट जैसी नई आय से भी जोड़ने की योजना है. इससे गोशालाओं और ग्रामीणों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

आईआईटी दिल्ली संभालेगा तकनीकी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के मुताबिक, इस परियोजना में आईआईटी दिल्ली प्लांट की डिजाइन तैयार करने, तकनीक उपलब्ध कराने, संचालन, रखरखाव और लोगों को प्रशिक्षण देने का काम करेगा. इसके अलावा 15 से ज्यादा निजी कंपनियां भी गांवों में ये प्लांट लगाने और उन्हें आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगी. इससे आधुनिक तकनीक का फायदा सीधे गांवों तक पहुंचेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में इस परियोजना को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी. इस योजना के जरिए गांवों के युवाओं को बायोगैस प्लांट लगाने, चलाने और उसकी देखरेख का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इससे बड़ी संख्या में ग्रीन टेक्नीशियन तैयार होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

खेतों को मिलेगी जैविक खाद

बायोगैस प्लांट से तैयार गैस का इस्तेमाल घरेलू ईंधन के रूप में किया जा सकेगा. इससे ग्रामीण परिवारों की एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम होगी और रसोई का खर्च भी घटेगा. वहीं, प्लांट से निकलने वाली स्लरी खेतों के लिए बेहतरीन जैविक खाद का काम करेगी. इससे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम होगा और प्राकृतिक व जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा.

इतनी होगी प्लांट लगाने की लागत

सरकार के अनुसार, एक मिनी बायोगैस प्लांट लगाने में करीब 25 हजार से 40 हजार रुपये तक का खर्च आएगा. अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इस योजना का लाभ उठा सकें, इसके लिए सरकार अनुदान देने की रूपरेखा भी तैयार कर रही है.

गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी

सरकार का मानना है कि, यह योजना सिर्फ बायोगैस उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे गांवों में ऊर्जा, जैविक खेती और रोजगार का नया मॉडल विकसित होगा. गोबर से गैस, खाद और अतिरिक्त आय मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. सरकार स्वयं सहायता समूहों (SHG) और ग्रामीण उद्यमियों को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी कर रही है, ताकि वे इसे आय का नया जरिया बना सकें.

Published: 20 Jul, 2026 | 11:36 AM

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