उत्तराखंड में घटिया डेयरी प्रोडक्ट्स पर बड़ा एक्शन, नकली पनीर, घी और मक्खन के निर्माण-बिक्री पर लगा बैन

Fake Dairy Products Ban: उत्तराखंड सरकार ने नकली और घटिया डेयरी प्रोडक्ट्स पर बड़ा एक्शन लेते हुए वनस्पति तेल, स्टार्च और केमिकल से बने नकली पनीर, घी और मक्खन के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन पर तत्काल रोक लगा दी है. खाद्य सुरक्षा विभाग अब डेयरी यूनिट, गोदाम, बाजार, होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों में जांच करेगा.

नोएडा | Published: 8 Aug, 2026 | 07:41 AM

Uttarakhand Dairy Products Ban: उत्तराखंड सरकार ने लोगों को मिलावटी और नकली डेयरी प्रोडक्ट्स से बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. राज्य में ऐसे पनीर, घी, मक्खन और दूसरे डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर रोक लगा दी गई है, जो असली दूध से तैयार नहीं किए जाते. इनमें वनस्पति तेल, स्टार्च और केमिकल का इस्तेमाल कर बनाए जाने वाले नकली या घटिया डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल हैं. सरकार का यह आदेश पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.

मिलावटी डेयरी प्रोडक्ट्स पर सख्ती

सरकार के मुताबिक, बाजार में कई ऐसे उत्पाद बेचे जा रहे हैं जिन्हें पनीर, घी या मक्खन जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स के नाम से पेश किया जाता है, लेकिन वे वास्तव में दूध से तैयार नहीं होते. ऐसे उत्पादों में दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च या दूसरे पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सरकार ने इन उत्पादों पर रोक लगाने का फैसला किया है. इसका मकसद ग्राहकों को असली और नकली डेयरी प्रोडक्ट्स के बीच भ्रमित होने से बचाना है.

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद लिया गया फैसला

अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है. सरकार का उद्देश्य राज्य में लोगों को सुरक्षित, शुद्ध और क्वालिटी वाला भोजन उपलब्ध कराना है. इसी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं. यह आदेश स्वास्थ्य सचिव और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडे की ओर से जारी किया गया है. आदेश के बाद अब पूरे राज्य में ऐसे उत्पादों के खिलाफ जांच अभियान चलाया जाएगा.

डेयरी यूनिट से लेकर मिठाई की दुकानों तक होगी जांच

खाद्य सुरक्षा विभाग राज्यभर में व्यापक जांच अभियान शुरू करेगा. इसके तहत सिर्फ डेयरी फैक्ट्रियों की ही जांच नहीं होगी, बल्कि गोदाम, थोक बाजार, खुदरा दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा. अधिकारियों की टीम संदिग्ध पनीर, घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों के सैंपल लेगी. इन सैंपल को जांच के लिए रिसर्च लैब भेजा जाएगा. अगर जांच में उत्पाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं या नकली पाए जाते हैं, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रतिबंध के बावजूद नकली या घटिया डेयरी प्रोडक्ट्स बनाने और बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. दोषी पाए जाने वाले लोगों पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है. कार्रवाई के दौरान संदिग्ध या मिलावटी उत्पादों को जब्त करने के साथ संबंधित कारोबार का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है. इससे उन कारोबारियों पर दबाव बढ़ेगा जो कम लागत में नकली उत्पाद तैयार कर उन्हें असली डेयरी प्रोडक्ट के नाम पर बाजार में बेचते हैं.

ग्राहकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

पनीर, घी और मक्खन जैसे उत्पाद रोजमर्रा के खाने का हिस्सा हैं. ऐसे में इनकी क्वालिटी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है. सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई से बाजार में असली डेयरी प्रोडक्ट्स की उपलब्धता बढ़ाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी. अब खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी, ताकि राज्य में नकली और घटिया डेयरी उत्पादों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके.

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