हैदराबाद में गहराया जल संकट, 96 फीसदी भूजल हो चुका है इस्तेमाल.. जमीन के नीचे का पानी भी प्रदूषित
हैदराबाद में भूजल संकट गंभीर होता जा रहा है. शहर अपने उपलब्ध भूजल का 96 प्रतिशत तक उपयोग कर चुका है, जबकि कई क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण भी बढ़ रहा है. रिपोर्ट में नाइट्रेट और फ्लोराइड का स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक पाया गया है. विशेषज्ञों ने भूजल संरक्षण, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई है.
Groundwater Exploitation: हैदराबाद में भूजल संकट लगातार गहराता जा रहा है. तेलंगाना भूजल विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, शहर अपने सालाना उपलब्ध भूजल का 96 प्रतिशत तक इस्तेमाल कर चुका है. यही वजह है कि हैदराबाद को भूजल दोहन की ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है. अब स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि शहर प्राकृतिक रूप से हर साल जितना भूजल रिचार्ज होता है, उसका लगभग पूरा उपयोग कर रहा है. वहीं हैदराबाद, रंगारेड्डी और मेडचल-मलकाजगिरी जिलों के 26 मंडल और तहसील भी भूजल संकट की गंभीर श्रेणी में पहुंच चुके हैं. इससे साफ है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण पूरे महानगरीय क्षेत्र में जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.
हैरानी की बात यह है कि हैदराबाद में भूजल संकट सूखे की वजह से नहीं बढ़ रहा है. वर्ष 2021-22 में तेलंगाना में सामान्य 906 मिमी के मुकाबले 1,181 मिमी बारिश दर्ज की गई थी. इस दौरान राज्य के 98 प्रतिशत भूजल निगरानी कुओं में मॉनसून के बाद जलस्तर में सुधार देखा गया. यानी राज्य के अधिकांश हिस्सों में भूजल भंडार फिर से भर गए, लेकिन हैदराबाद में स्थिति अलग रही. पर्याप्त बारिश होने के बावजूद शहर में भूजल का अत्यधिक दोहन जारी रहा. नतीजतन, हैदराबाद अपने सालाना भूजल भंडार के लगभग पूरी तरह इस्तेमाल के करीब पहुंच गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति काफी चिंताजनक है, क्योंकि राज्य के अन्य क्षेत्रों में भूजल की स्थिति बेहतर हुई है, जबकि राजधानी में संकट लगातार गहराता जा रहा है.
हर साल 900 से 1,000 मिमी तक बारिश
द रेनवॉटर प्रोजेक्ट की संस्थापक कल्पना रमेश ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि तेलंगाना में हर साल 900 से 1,000 मिमी तक बारिश होती है, जो भूजल को रिचार्ज करने के लिए पर्याप्त है. लेकिन समस्या यह है कि बारिश का बड़ा हिस्सा जमीन में समाने के बजाय नालों और ड्रेनेज सिस्टम के जरिए शहर से बाहर निकल जाता है. इससे भूजल भंडार पर्याप्त मात्रा में रिचार्ज नहीं हो पाते और जल संकट बढ़ता जाता है.
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जमीन के नीचे बचा हुआ पानी भी हुआ प्रदूषित
भूजल संकट सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन के नीचे बचा हुआ पानी भी प्रदूषित होता जा रहा है. तेलंगाना भूजल विभाग की निगरानी में पाया गया कि वर्ष 2021 के दौरान हैदराबाद के कई इलाकों में भूजल में नाइट्रेट और फ्लोराइड की मात्रा तय सुरक्षित सीमा से अधिक थी. रिपोर्ट के अनुसार, मॉनसून से पहले भूजल में नाइट्रेट का स्तर 6 से 166 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच था, जो मॉनसून के बाद कुछ स्थानों पर बढ़कर 259 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया. इसी तरह फ्लोराइड की मात्रा भी कई इलाकों में सामान्य स्तर से अधिक दर्ज की गई. मॉनसून से पहले फ्लोराइड का स्तर 0.25 से 3.68 मिलीग्राम प्रति लीटर और मॉनसून के बाद 0.35 से 3.33 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच पाया गया.
भूजल में नाइट्रेट और फ्लोराइड की मात्रा अधिक
विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल में नाइट्रेट और फ्लोराइड की अधिक मात्रा लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे में हैदराबाद को सिर्फ भूजल संरक्षण ही नहीं, बल्कि भूजल की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में भी गंभीर कदम उठाने की जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार, हैदराबाद केवल अपने भूजल भंडार को तेजी से खत्म ही नहीं कर रहा है, बल्कि कई इलाकों में इस्तेमाल किया जा रहा भूजल प्रदूषित भी होता जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक अपशिष्ट, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग और कुछ प्राकृतिक भूगर्भीय कारणों की वजह से भूजल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.