CWC Report: देश के बड़े बांधों में तेजी से घट रहा पानी, इन राज्यों की हालत सबसे खराब
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य हिस्से में कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है. इसके कारण आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश बढ़ सकती है. अगर प्री-मानसून गतिविधियां तेज हुईं, तो जलाशयों में पानी का स्तर सुधरने की उम्मीद है. हालांकि दूसरी तरफ उत्तर भारत में भीषण गर्मी और लू का नया दौर शुरू होने की आशंका भी जताई गई है.
water crisis India: देश में भीषण गर्मी और कम बारिश का असर अब जलाशयों पर साफ दिखाई देने लगा है. भारत के कई बड़े बांधों में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है. हालात ऐसे हैं कि देश के 166 बड़े बांधों में जल भंडारण कुल क्षमता के 35 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया है. इससे कई राज्यों में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. हालांकि राहत की बात यह है कि मौजूदा जल स्तर पिछले साल और पिछले 10 वर्षों के औसत से बेहतर बताया जा रहा है. मौसम विभाग और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने से स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है.
आधे से ज्यादा खाली हो चुके बड़े बांध
केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश के ज्यादातर बड़े जलाशयों में पानी तेजी से कम हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार 166 प्रमुख बांधों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 अरब घन मीटर (BCM) है, लेकिन फिलहाल इनमें केवल 63.232 अरब घन मीटर पानी ही बचा है.
विशेषज्ञों के अनुसार करीब 60 प्रतिशत बांधों में पानी का स्तर 40 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच चुका है. कई बांध आधे से ज्यादा खाली हो चुके हैं. हालांकि यह स्तर पिछले साल की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक और पिछले 10 साल के औसत से करीब 24 प्रतिशत बेहतर माना जा रहा है.
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा चिंता
देश के पांच क्षेत्रों में दक्षिण भारत की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है. यहां के 47 जलाशयों में कुल 55.288 BCM क्षमता के मुकाबले केवल 14.051 BCM पानी बचा है, यानी सिर्फ 25 प्रतिशत जल भंडारण.
तेलंगाना के जलाशयों में पानी का स्तर 20 प्रतिशत से भी कम रह गया है. कर्नाटक में भी स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है. केरल में जल स्तर 24 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 37 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में करीब 34.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है.
पूर्व और पश्चिम भारत में भी हालात चिंताजनक
पूर्वी भारत के 27 जलाशयों में पानी का स्तर लगभग 33.5 प्रतिशत रह गया है. पश्चिम बंगाल में जल स्तर सिर्फ 12.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है. असम में 22 प्रतिशत और ओडिशा में 28 प्रतिशत पानी बचा है. हालांकि झारखंड की स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां जल स्तर 48 प्रतिशत दर्ज किया गया.
पश्चिम भारत में भी स्थिति सामान्य नहीं है. महाराष्ट्र के जलाशयों में केवल 29 प्रतिशत पानी बचा है, जबकि गुजरात में यह आंकड़ा 38 प्रतिशत है. गोवा का एकमात्र जलाशय लगभग दो-तिहाई खाली बताया गया है.
उत्तर और मध्य भारत की स्थिति
उत्तर भारत के 11 प्रमुख जलाशयों में करीब 41 प्रतिशत पानी बचा है. पंजाब के जलाशय में 67 प्रतिशत पानी मौजूद है, जबकि हिमाचल प्रदेश में 35 प्रतिशत और राजस्थान में 46 प्रतिशत जल स्तर दर्ज किया गया.
मध्य भारत के 28 जलाशयों में औसतन 39 प्रतिशत पानी है. छत्तीसगढ़ के बांधों में 55 प्रतिशत,मध्य प्रदेश में 40 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 37 प्रतिशत और उत्तराखंड में 24 प्रतिशत जल स्तर दर्ज किया गया है.
कम बारिश ने बढ़ाई मुश्किल
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक 1 मार्च से 13 मई के बीच देश के 725 जिलों में से करीब 27 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है. इससे पहले जनवरी और फरवरी के दौरान देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्सों में बहुत कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई थी.
आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य हिस्से में कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है. इसके कारण आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश बढ़ सकती है. अगर प्री-मानसून गतिविधियां तेज हुईं, तो जलाशयों में पानी का स्तर सुधरने की उम्मीद है. हालांकि दूसरी तरफ उत्तर भारत में भीषण गर्मी और लू का नया दौर शुरू होने की आशंका भी जताई गई है. ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह पानी और मौसम दोनों के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं.