MP में 1.37 करोड़ का गेहूं घोटाला, गोदाम से 5167 क्विंटल अनाज गायब.. FIR दर्ज
मध्य प्रदेश के जबलपुर में गेहूं खरीदी से जुड़े 1.37 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का खुलासा हुआ है. प्रशासनिक जांच में 5167.70 क्विंटल गेहूं कम मिला. रिकॉर्ड और स्टॉक में गड़बड़ी, फर्जी एंट्री तथा किसानों से अवैध वसूली के आरोप सामने आए हैं. मामले में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
Wheat Procurement Scam: मध्य प्रदेश में इस साल रिकॉर्ड 104 लाख टन से अधिक गेहूं की खरीदी हुई. लेकिन इसके साथ ही गेहूं खरीदी में अनियमितताएं और हेराफेरी के मामले भी सामने आने लगे हैं. ताजा मामला जबलपुर जिले में सामने आया है, जहां गेहूं खरीदी से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. प्रशासनिक जांच में मझौली स्थित मां अन्नपूर्णा वेयरहाउस में 5167.70 क्विंटल गेहूं कम पाया गया. गायब गेहूं की कीमत करीब 1 करोड़ 37 लाख रुपये बताई गई है. जांच में खरीदी केंद्र प्रभारी, सहायक खाद्य अधिकारी समेत 10 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई. इसके बाद सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ किसानों से अवैध रूप से पैसे वसूले गए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है. प्रशासन का कहना है कि घोटाले में शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय की जा रही है और पूरे मामले की जांच जारी है.
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
कुछ दिन पहले प्रशासन की टीम ने मझौली स्थित मां अन्नपूर्णा वेयरहाउस का अचानक निरीक्षण किया था. जांच के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज गेहूं और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया. अधिकारियों के अनुसार, स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन ने खरीदी केंद्र को 92,250 बारदाने उपलब्ध कराए थे, लेकिन जांच में केवल 48,347 क्विंटल गेहूं के हिसाब से ही बारदानों का उपयोग मिला. वहीं, पोर्टल पर 96,694 बारदाने दर्ज किए गए थे, जिससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है.
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नियमों की अनदेखी की गई
जांच में यह भी सामने आया कि एसडीएम ने खरीदी के अंतिम दिनों में किसानों की तौल पर्चियों का सत्यापन नोडल अधिकारी से कराने के निर्देश दिए थे. हालांकि, खरीदी केंद्र प्रभारी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया. अधिकारियों का मानना है कि फर्जी एंट्री कर रिकॉर्ड में हेरफेर करने के लिए नियमों की अनदेखी की गई हो सकती है.
नियुक्ति में नियमों का पालन नहीं किया गया
वहीं, प्रशासनिक जांच में यह भी खुलासा हुआ कि खरीदी केंद्र पर कर्मचारियों की नियुक्ति में नियमों का पालन नहीं किया गया. शासन के निर्देशों के अनुसार खरीदी कार्य में महिला कर्मचारियों की तैनाती की जानी थी, लेकिन इसके बजाय अमन पांडे और आकाश पांडे को काम पर लगाया गया. जांच में पाया गया कि दोनों केंद्र पर गेहूं की तुलाई, सिलाई और वजन संबंधी काम कर रहे थे. इसके बाद कंप्यूटर ऑपरेटर मयूरी लोधी और शुभम बर्मन द्वारा संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाती थी. अधिकारियों ने इसे नियमों के उल्लंघन का मामला माना है.
10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
जिला प्रशासन की शिकायत के बाद मझौली थाने में गेहूं घोटाले के मामले में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. आरोपियों में खरीदी केंद्र प्रभारी रीना लोधी समेत शुभम बर्मन, मयूरी लोधी, प्रमोद कुमार मिश्रा, प्रकाश पांडे, आनंद भारसाकले, अमन पांडे, आकाश पांडे, अनिल पटेल और रिंकू साहू के नाम शामिल हैं. एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि मझौली पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है. शुरुआती जांच में करीब 1 करोड़ 37 लाख 67 हजार रुपये मूल्य का गेहूं कम पाया गया है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.