10 मार्च से शुरू होगी गेहूं की खरीदी, किसानों को 150 रुपये क्विंटल मिलेगा बोनस.. मंडियों में तैयारियां शुरू
राजस्थान में 10 मार्च से गेहूं खरीद शुरू होगी. किसानों को समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के साथ 150 रुपये बोनस मिलेगा. मंडियों में साफ-सफाई, छाया और पेयजल की व्यवस्था होगी. एफसीआई समय पर भुगतान और आसान पंजीकरण सुनिश्चित करेगा, ताकि किसान बिना परेशानी अपनी फसल बेच सकें.
Wheat Procurment: राजस्थान के किसानों के लिए खुशखबरी है. राज्य में सरसों, चना और गेहूं की खरीद शुरू होने वाली है. 10 मार्च से गेहूं की खरीद शुरू होगी. इस बार किसानों को एमएसपी से ज्यादा रेट मिलेगा, क्योंकि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मी की सरकार ने बोनस देने का फैसला लिया है. सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले किसानों को 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा. दरअसल, सरकार गेहूं का समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. ऊपर से 150 बोनस मिलते ही किसानों को अब प्रति क्विंटल 2,735 रुपये मिलेंगे. खास बात यह है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विधानसभा में खुद गेहूं किसानों को बोनस देने का ऐलान कर चुके हैं.
सरकारी घोषणा के बाद किसानों के चेहरे खुशियों से चमक उठे हैं. बढ़े हुए समर्थन मूल्य से उन्हें अपनी फसल का अच्छा दाम मिलेगा. मंडी प्रशासन ने खरीद की तैयारियां शुरू कर दी हैं. तोल-मोल, बोरे और अन्य जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो. लोडिंग और सिलाई का काम व्यापारियों को सौंपा गया है, जो व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं.
गेहूं खरीदी के लिए मंडियों में तैयारियां शुरू
मंडी में साफ-सफाई, छाया और पीने का पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. एफसीआई अधिकारी कहते हैं कि किसानों को समय पर भुगतान और आसान पंजीकरण की सुविधा मिलेगी. इससे किसान बिना किसी परेशानी के अपनी फसल बेच सकेंगे. प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे तय केंद्रों पर जाकर पंजीकरण कराएं और गेहूं बिक्री का लाभ उठाएं.
टोंक जिले में 55 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में गेहूं की खेती
वहीं, एमएसपी पर गेहूं बेचने को लेकर किसानों में उत्साह है. टोंक के खरीद केंद्र प्रभारी का कहना है कि जिले में ऑनलाइन पंजीकरण चल रहा है. जिले में गेहूं खरीद के लिए पांच केंद्र प्रस्तावित हैं और हर केंद्र पर लक्ष्य तय किया गया है. ऐसे इस बार जिले में 55 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में गेहूं बोया गया है. अच्छी वर्षा और सिंचाई के कारण उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है. खरीद प्रक्रिया 30 जून तक जारी रहने की संभावना है. टोंक में 2,500, मालपुरा में 1,000, देवली में 3,000, दूनी में 3,000 और उनियारा में 2,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है. पिछले साल 2,800 मीट्रिक टन के लक्ष्य की तुलना में जिले में 10,182.15 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया.
राजस्थान में इन जिलों में होती है गेहूं की खेती
राजस्थान में गेहूं रबी मौसम की एक मुख्य फसल है. 2023 में इसका उत्पादन 106.4 लाख टन (106.4 लाख टन) से ज्यादा हुआ था. इसे मुख्य रूप से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर और बारां जैसे सिंचित जिलों में उगाया जाता है. यहां प्रति एकड़ औसत उपज लगभग 22.5 क्विंटल होती है. ऐसे राजस्थान में गेहूं की प्रमुख किस्मों में राज-3765, आरजी 648, आरजी 575-1 और आरसी 101 शामिल हैं. ये सभी उच्च उपज देने वाली, जल्दी पकने वाली और रोग प्रतिरोधी किस्में हैं. रबी मौसम (नवंबर–दिसंबर) में बोई जाने वाली यह फसल मुख्य रूप से सिंचित क्षेत्रों में उगाई जाती है और अब इसमें आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग बढ़ रहा है. ऐसे गेहूं की खेती के लिए दोमट मिट्टी अच्छी मानी गई है. सरसों की खेती के लिए भी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. बुवाई का सही समय नवंबर के मध्य से लेकर दिसंबर के पहले सप्ताह तक है.