Punjab Wheat Procurement: पंजाब में गेहूं भंडारण की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के तहत सरकार ने अप्रैल, मई और जून के दौरान 860 स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है. इन ट्रेनों के जरिए मंडियों से सीधे गेहूं को उपभोक्ता राज्यों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे गोदामों पर दबाव कम होगा. सरकार को इस सीजन में करीब 125 लाख टन गेहूं की खरीद की उम्मीद है, जो 1 अप्रैल से शुरू होगी. पिछले वर्षों में ज्यादा खरीद और धीमी ढुलाई के कारण खासकर अमृतसर और तरनतारन जिलों में भंडारण की समस्या गंभीर हो गई थी. इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे के जरिए तेज परिवहन का फैसला लिया गया है. योजना के तहत कुल 22.06 लाख टन गेहूं को 860 स्पेशल ट्रेनों से भेजा जाएगा. इनमें अप्रैल में 409, मई में 440 और जून में 11 ट्रेनें शामिल हैं. सरकार का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ भंडारण संकट कम होगा, बल्कि गेहूं की आपूर्ति भी समय पर सुनिश्चित हो सकेगी.
भंडारण के दबाव को ध्यान में रखते हुए स्पेशल ट्रेनों का आवंटन किया गया है. सबसे ज्यादा 97 ट्रेनें तरनतारन को दी गई हैं, जिनसे 2.54 लाख टन गेहूं भेजा जाएगा. इसके बाद पटियाला को 90 ट्रेनें (करीब 2.23 लाख टन गेहूं) और अमृतसर को 80 ट्रेनें (करीब 2.08 लाख टन गेहूं) मिली हैं. इसके अलावा मुक्तसर, फरीदकोट, संगरूर, गुरदासपुर, लुधियाना, बठिंडा, कपूरथला और मोगा जैसे जिले भी इस योजना में शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन यह कदम कुछ हद तक राहत जरूर देगा. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह योजना पूरी समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन इससे भंडारण पर दबाव कम होगा और जब गेहूं की बड़ी मात्रा मंडियों में पहुंचेगी, तब खरीद प्रक्रिया को सुचारू तरीके से चलाने में मदद मिलेगी.
किसान नेता ने कही बड़ी बात
वहीं, दिग्गज किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि सरकार को यह तैयारी बहुत पहली ही कर लेनी चाहिए थी, क्योंकि 1 अप्रैल से गेहूं की खरीदी शुरू हो रही है. हालांकि, पिछले हफ्ते सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि गेहूं क्रय केंद्र पर किसानों को किसी तरह की समस्या हुई तो वे सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे. उन्होंने कहा था कि भंडारण की कमी के चलते कई बार अनाज खुले आसमान में कई दिनों तक पड़े रहते हैं. ऐसे में बारिश होने पर उपज को नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहती है.
पंजाब के पास 173 लाख टन की भंडारण क्षमता है
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में फिलहाल करीब 173 लाख टन की ढकी हुई भंडारण क्षमता है, जिसमें से 48 लाख टन FCI के पास है और बाकी राज्य एजेंसियों जैसे वेयरहाउस, मार्कफेड और PUNSUP द्वारा संभाला जाता है. इसके अलावा राज्य में करीब 7 लाख टन की सिलो क्षमता भी है. जबकि पंजाब केंद्रीय पूल के लिए सालाना लगभग 300 लाख टन गेहूं खरीदता है, अधिकारी मानते हैं कि अगर अनाज समय पर निकाला जाए तो 190- 200 लाख टन क्षमता पर्याप्त होगी.
आढ़तियों ने फैसले पर जताई चिंता
वहीं, इस योजना की आढ़तियों (कमिशन एजेंट) ने कड़ी आलोचना की है. उन्होंने सवाल उठाया है कि नई खरीदी गेहूं को पहले क्यों भेजा जा रहा है, जबकि पुराने स्टॉक की पोषण गुणवत्ता लंबे समय तक भंडारित रहने पर कम हो सकती है. अर्थियों एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष प्रेम गोयल ने कहा कि अगर पुराने स्टॉक को समय पर नहीं निकाला गया, तो उसकी पोषण गुणवत्ता घट जाएगी और नुकसान होगा. उन्होंने ट्रेनों के शेड्यूल पर भी सवाल उठाया. गेहूं की आमद अप्रैल की शुरुआत में शुरू होती है, मध्य अप्रैल तक चरम पर होती है और ज्यादातर अप्रैल में ही खत्म हो जाती है. फिर भी सरकार ने 860 में से 440 ट्रेनें मई में रख दी हैं, जो लॉजिस्टिक के लिहाज से सवाल खड़े करती हैं.
14 फीसदी नमी वाला गेहूं मई तक सूख सकता है
योजना को लेकर आढ़तियों और विशेषज्ञों ने कई सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि मई में मंडियों में पड़े गेहूं की देखभाल कौन करेगा, क्योंकि किसान अपनी फसल बेचकर चले जाएंगे और जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों पर आ जाएगी. ट्रेनों से पूरे महीने अनाज भेजा जाएगा, ऐसे में नई खरीदी गई गेहूं मंडियों में खुले में पड़ी रह सकती है. उन्होंने गर्मी के मौसम में अनाज की गुणवत्ता खराब होने की भी चिंता जताई. 12 से 14 फीसदी नमी वाला गेहूं मई में और सूख सकता है, जिससे उसका वजन कम होगा और इसका आर्थिक बोझ अक्सर आढ़तियों पर पड़ता है.