देश की सबसे बड़ी मंडी में 22000 रुपये क्विंटल हुई लाल सूखी मिर्च, मार्केट में पहुंची 1186 टन उपज

देश की प्रमुख मिर्च मंडियों में नई फसल और कोल्ड स्टोरेज स्टॉक के आने से तेज कारोबार हुआ. गुंटूर में लाल सूखी मिर्च (FAQ) की कीमत 13,000- 22,000 रुपये प्रति क्विंटल रही. उत्पादन घटने और मजबूत मांग के कारण तेलंगाना और कर्नाटक में भी कीमतें स्थिर और कारोबार तेज बना हुआ है.

Kisan India
नोएडा | Published: 7 Mar, 2026 | 10:30 PM

Mandi Bhav: देश के प्रमुख मिर्च उत्पादक राज्यों की मंडियों में पिछले हफ्ते तेज कारोबार देखने को मिला. नई फसल की आवक बढ़ने और कोल्ड स्टोरेज में रखे पुराने स्टॉक के बाजार में आने से खरीदारी भी तेजी से हुई. देश की प्रमुख मंडियों में करीब 12 लाख बोरी नई मिर्च पहुंची, जिनमें से लगभग 90 फीसदी की बिक्री हो गई. बात अगर देश की सबसे बड़ी मिर्च मंडी गुंटूर की करें तो लाल सूखी मिर्च (FAQ) की कीमतें 6 मार्च को 13,000 रुपये से लेकर 22,000 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज की गईं. हालांकि, औसत कीमत लगभग 21,000 रुपये प्रति क्विंटल है.

Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश स्थित मंडी गुंटूर में 5 मार्च को लाल सूखी मिर्च  (FAQ) का कारोबार अच्छा हुआ. यहां कीमतें 13,000 रुपये से 22,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रही, औसत कीमत लगभग 21,000 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई. वहीं, इस दिन मंडी में 1186 टन मिर्च की आवक दर्ज की गई.

पिछले हफ्ते गुंटूर मंडी में करीब 4.15 लाख बोरी मिर्च पहुंची थीं

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते गुंटूर मंडी में करीब 4.15 लाख बोरी मिर्च पहुंची थीं, जिनमें से लगभग 3.8 लाख बोरी मसाला बनाने वाली कंपनियों ने खरीद लीं. इस दौरान कोल्ड स्टोरेज से आने वाली मिर्च की आवक कम रही, क्योंकि किसानों ने अच्छे दाम मिलने पर अपना स्टॉक बाजार में बेच देना बेहतर समझा. वहीं कुर्नूल में उत्पादन कम रहने और सीजन की शुरुआत से ही कीमतें स्थिर रहने के कारण ज्यादातर किसान पहले ही अपनी फसल बेच चुके हैं.

राज्यों के व्यापारी अच्छी क्वालिटी की मिर्च खरीदने के लिए सक्रिय हैं

व्यापारियों का कहना है कि इस सीजन में कुछ जगहों पर बिखरी बारिश से फसल को नुकसान हुआ, जिससे कुल उत्पादन कम हुआ है. इसी कारण बाजार में खरीदारी तेज हो गई है. किसानों को भी उम्मीद है कि मांग बनी रहने से उन्हें अच्छे दाम मिल सकते हैं और यह रुझान अप्रैल के मध्य तक जारी रह सकता है. वहीं आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ इलाकों में उत्पादन घटने के कारण आसपास के राज्यों के व्यापारी अच्छी क्वालिटी की मिर्च  खरीदने के लिए सक्रिय हैं.

खम्मम में करीब 10 लाख बोरी कोल्ड स्टोरेज में हैं

बात अगर तेलंगाना की करें तो भद्राचलम में दूसरी फेज की मिर्च की कटाई चल रही है, जहां करीब 75 फीसदी किसान मुनाफा देने वाले दामों पर स्टॉक बेच रहे हैं. प्रमुख मंडियों में आने वाली मिर्च का लगभग 60 फीसदी हिस्सा पड़ोसी राज्यों में भेजा जा रहा है. खम्मम में करीब 10 लाख बोरी कोल्ड स्टोरेज में हैं, और अगले हफ्ते 1 लाख बोरी और आने की उम्मीद है. वारंगल में रोजाना 25,000-30,000 बोरी मिर्च मंडी पहुंच रही है.

मसाला कंपनियों और एक्सपोर्टर्स में मिर्च की मजबूत मांग है

मार्केट एनालिस्ट के अनुसार, नई फसल की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण मसाला कंपनियों  और एक्सपोर्टर्स में मजबूत मांग है. कुछ इलाकों में उत्पादन कम होने के चलते स्टॉकिस्ट सक्रिय रूप से खरीदारी कर रहे हैं और खास किस्मों की कीमतें स्थिर बनी रहने की संभावना है. वहीं, विश्लेषकों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज में मौजूद मिर्च का स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम है, क्योंकि जनवरी से लगातार बिक्री हो रही है. इसी वजह से कारोबार अप्रैल के मध्य तक तेज रहने की उम्मीद है.

बयादगी मंडी में सोमवार को अकेले 2.83 लाख बोरी मिर्च पहुंची

वहीं, कर्नाटक के बयादगी मंडी में सोमवार को अकेले 2.83 लाख बोरी मिर्च पहुंची, जबकि हुबली, सिंधनूर और धारवाड़ में करीब 20,000 बोरी और आई. बयादगी की लोकप्रिय किस्मों की कीमतें गुणवत्ता के अनुसार 4,000- 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक तेजी से बढ़ गई हैं.

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Published: 7 Mar, 2026 | 10:30 PM

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