अब नहीं होगा गेहूं खराब, 11,000 करोड़ की योजना से तेजी से बन रहे आधुनिक साइलो गोदाम
देश में अनाज भंडारण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक साइलो गोदामों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. इससे गेहूं और अन्य खाद्यान्न को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी. नई तकनीक के इस्तेमाल से भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
Grain Storage: देश में अनाज भंडारण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत गेहूं के लिए आधुनिक साइलो गोदामों का निर्माण तेज कर दिया है. इन स्टील से बने अत्याधुनिक भंडारण केंद्रों का उद्देश्य किसानों के अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना और खराब होने से बचाना है. अगले दो वर्षों में लगभग 50 लाख टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.
तेजी से बढ़ रही साइलो भंडारण क्षमता
एफसीआई (FCI) के अनुसार, वर्ष 2021 से अब तक देश के 76 स्थानों पर 39 लाख टन क्षमता वाले साइलो तैयार किए जा चुके हैं. इनमें प्रत्येक साइलो में 25 हजार से 50 हजार टन तक अनाज सुरक्षित रखा जा सकता है. इसके अलावा 53 स्थानों पर 23.5 लाख टन क्षमता के नए साइलो निर्माणाधीन हैं. आने वाले दो वर्षों में 27.2 लाख टन क्षमता के अतिरिक्त साइलो भी बनाए जाएंगे. यदि यह योजना तय समय पर पूरी होती है तो वर्ष 2028 तक एफसीआई की कुल साइलो भंडारण क्षमता बढ़कर 90 लाख टन तक पहुंच जाएगी. इससे देश की खाद्य भंडारण व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी.
निजी कंपनियों की बड़ी भागीदारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना में कई निजी कंपनियां भी शामिल हैं. सबसे अधिक क्षमता वाले साइलो निर्माण का काम कुछ प्रमुख लॉजिस्टिक कंपनियों को सौंपा गया है. ये परियोजना लगभग 11,000 करोड़ रुपये की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत अगले चार वर्षों में 1.1 करोड़ टन क्षमता के आधुनिक गेहूं साइलो विकसित किए जाएंगे. इन साइलो का निर्माण पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, जम्मू, उत्तराखंड और केरल सहित कई राज्यों में किया जा रहा है. इससे किसानों के नजदीक आधुनिक भंडारण सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
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साइलो में अनाज खराब होने का खतरा बेहद कम
खाद्य भंडारण के क्षेत्र में साइलो तकनीक को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. पारंपरिक गोदामों की तुलना में साइलो में अनाज को अधिक सुरक्षित रखा जा सकता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार सामान्य गोदामों में अनाज खराब होने की घटनाओं में कमी आई है, जबकि साइलो में रखे गए अनाज के खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है. इसी सफलता को देखते हुए अब चावल के भंडारण के लिए भी साइलो मॉडल का परीक्षण किया जा रहा है. कुछ स्थानों पर चावल के लिए विशेष साइलो तैयार किए गए हैं और उनकी उपयोगिता का अध्ययन जारी है.
30 साल की लीज पर संचालित होंगे साइलो
साइलो परियोजना दो अलग-अलग मॉडलों के तहत विकसित की जा रही है. कुछ स्थानों पर जमीन एफसीआई (FCI) की है, जबकि कुछ जगह निजी कंपनियां जमीन उपलब्ध करा रही हैं. एफसीआई इन साइलो का उपयोग करने के लिए 30 वर्षों तक की लीज व्यवस्था अपनाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक साइलो न केवल अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करेंगे, बल्कि भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को भी काफी हद तक कम करेंगे. इससे किसानों, उपभोक्ताओं और सरकार तीनों को लाभ मिलेगा तथा देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी.