हरियाणा में फसल खरीद केंद्रों पर पिछले दो हफ्तों में गेहूं और सरसों की ताजा रबी फसलों की रिकॉर्ड आवक देखी गई है. राज्य सरकार का कुल खरीद टारगेट 72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदना है. जबकि, इसका आधे से ज्यादा 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुंच गया है. इसकी वजह राज्य सरकार के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के जरिए प्रक्रिया को आसान बनाना बताया जा रहा है. लेकिन, किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने और जल्द उठाने नहीं होने के चलते संकट खड़ा हो गया है.
टोटल खरीद टारगेट में आधे से ज्यादा उपज पहुंची
हरियाणा सरकार की ओर से जारी आकड़ों में बताया गया है कि रबी सीजन 2026-27 के लिए 12 अप्रैल तक मंडियों में लगभग 39.65 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है. गेहूं खरीद 1 अप्रैल से शुरू हुई है और 12 दिनों में ही कुल खरीद टारगेट 72 लाख मीट्रिक टन की तुलना में आधे से ज्यादा उपज मंडियों में पहुंच चुकी है. जबकि, बीते साल इस अवधि में 21 लाख मीट्रिक टन गेहूं की मंडियों में पहुंचा था.
10 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद पूरी
सरकारी बयान में कहा गया है कि किसानों से 10.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है और लगभग 188 करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं. वहीं, बीते साल इस अवधि तक 10.47 लाख मीट्रिक टन की खरीद की गई थी और किसानों को 174.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. राज्य सरकार ने बयान में कहा है कि गेहूं खरीद तेजी से जारी है और उठान भी शुरू किया जा रहा है.
770 से ज्यादा खरीद केंद्र बनाए गए
राज्य सरकार ने सरसों की खरीद के लिए 112 मंडियां और खरीद केंद्र बनाए हैं. जबकि गेहूं की खरीद के लिए 416 मंडियों के अलावा 264 खरीद स्थल खोले गए हैं.
सरसों की खरीद राज्य के सहकारी संघ, HAFED द्वारा की जा रही है, जबकि गेहूं की खरीद कई एजेंसियों के जरिए की जा रही है, जिनमें खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग, HAFED, हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और भारतीय खाद्य निगम शामिल हैं.
मंडियों में 1281 बायोमेट्रिक मशीनें लगीं
राज्य सरकार ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए प्रावधान लागू किए हैं. आधिकारिक बयान के अनुसार इनमें किसानों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर की ट्रैकिंग, मंडियों/खरीद केंद्रों की जियोफेंसिंग और कैमरों को लगाया गया है. सरकार ने किसानों के वेरिफिकेशन के लिए मंडियों और खरीद केंद्रों में 1,281 बायोमेट्रिक मशीनें और 407 आइरिस स्कैनिंग डिवाइस लगाए हैं. इसके अलावा, ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसान, या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि, मंडी में पहुंचने पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पूरा करने के बाद अपनी उपज बेच सकते हैं.
मंडियों में 2600 कर्मचारियों की तैनाती
खरीद प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 2,500 कर्मचारियों और 114 तकनीकी कर्मचारियों को तैनात किया गया है. इसके अलावा गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से नजर रखने के लिए मंडियों में लगभग 932 कैमरे लगाए गए हैं. बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार ने खरीद के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं और यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.
अभिमन्यू कोहाड़ ने मंडियों में अव्यवस्थाओं पर सरकार को घेरा
संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के नेता अभिमन्यू कोहाड़ ने बताया कि सरकार वादे के अनुसार खरीद नहीं कर रही है. मंडियों में भारी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंचे हैं. उन्होंने चिंता जताई की अगर बारिश हो गया मौसम बिगड़ा तो मंडियों में खुले में रखा गेहूं भीगकर खराब हो जाएगा. इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा. उन्होंने कहा किसानों की उपज भंडारण के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. वहीं, खरीद केंद्रों पर नमी के नाम गेहूं में कटौती की जा रही है. उन्होंने कहा कि अव्यवस्थाएं किसानों को परेशान कर रही हैं.
किसान नेता ने कहा कि राजस्थान सरकार ने तो गेहूं खरीद में छूट के मुद्दे पर FCI से लिखित सहमति ले ली है. लेकिन, हरियाणा सरकार अब भी कुम्भकर्णी रूपी नींद में मस्त है और हरियाणा के किसान परेशान हो रहे हैं.