Wheat Procurement: केंद्र सरकार द्वारा राजस्थान को गेहूं खरीद मानकों में छूट देने पर बहस छीड़ गई है. पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदश सहित तमाम गेहूं उत्पादक राज्य के किसानों ने राजस्थान की तरह ही गेहूं खरीद मानकों में छूट देने की मांग की है. किसानों का कहना है कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पूरे देश में गेहूं की बर्बादी हुई है. ऐसे में केंद्र सरकार केवल राजस्थान को ध्यान में रखते हुए ऐसा फैसला कैसे कर सकती है. आखिर अन्य राज्यों के गेहूं किसानों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है. किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर सरकार के इस फैसले को सौतेला करार दिया है.
सरवन सिंह पंढेर ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि पंजाब में भी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 1.25 लाख एकड़ रबी फसल को नुकसान पहुंचा है. गेहूं किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. ऐसे में केंद्र सरकार केवल राजस्थान को गेहूं खरीद मानकों में छूट कैसे दे सकती है. उन्होंने कहा कि राजस्थान की तरह पंजाब को भी गेहूं खरीद मानको में छूट मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पंजाब देश का प्रमुख गेहूं उत्पाद राज्य है. यहां पर सबसे अधिक गेहूं की सरकारी खरीदी होती है. इसलिए केंद्र सरकार को गेहूं खरीदी मानकों में ढील देने के साथ-साथ पंजाब के किसानों के लिए राहत पैकेज भी जारी करना चाहिए.
हरियाणा को भी मिले मानकों में छूट
एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से कहा कि राजस्थान की तरह हरियाणा के किसानों को भी गेहूं खरीदी मानको में छूट मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हरियाणा में बारिश से गेहूं की फसल को बहुत नुकसान पहुंचा है. इससे गेहूं की चमक चली गई है. इसके चलते किसानों की टेंशन बढ़ गई है. कई मंडियों में गेहूं में तय मात्रा से अधिक नमी होने के चलते किसानों से खरीदी नहीं की गई. इसलिए यहां के गेहूं किसानों को मानको में छूट की सख्त जरूरत है.
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गुणी प्रकाश ने किसानों की समस्याओं पर चिंता जताई
साथ ही गुणी प्रकाश ने अनाज मंडियों में किसानों की समस्याओं पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि किसान बहुत मेहनत और मुश्किलों के बाद, अक्सर जमीन ठेके पर लेकर फसल उगाते हैं और फिर उसे बेचने के लिए मंडी तक लाते हैं. उन्होंने बताया कि मंडी में पहुंचने के बाद किसानों को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की लंबी कतारों, सर्वर डाउन होने और बारिश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है. गुणीप्रकाश ने सरकार से अपील की कि किसानों पर अनावश्यक नियम और शर्तें न लगाई जाएं और खरीद प्रक्रिया को आसान बनाया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके.
रामपाल जाट ने फैसले का किया स्वागत
राजस्थान के किसान नेता और किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्र सरकार के इस फैसलों का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद मानकों में छूट देने का फैसला किसानों के लिए बेहतर है. लेकिन सरकार को खरीदी के दौरान क्वालिटी के नाम पर MSP में कटौती नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सिकुड़े हुए दाने से भी आटे का उत्पादन बेहतर क्वालिटी के बराबर ही होता है. इसलिए खरीद एजेंसियों को क्वालिटी के नाम गेहूं के रेट में कटौती नहीं करनी चाहिए. इससे किसानों को नुकसान होता है.
राजस्थान को कितनी मिली मानकों में छूट
दरअसल, केंद्र सरकार ने राजस्थान को गेहूं खरीद मानकों में विशेष छूट दी है. गेहूं खरीद मानकों के तहत चमकहीन दाने पर छूट सीमा बढ़ाकर 50 फीसदी कर दी गई है. इसके साथ ही टूटे और सिकुड़े दाने की खरीद पर छूट सीमा को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है, जो पहले 6 फीसदी थी. बता दें कि राजस्थान में बीते मार्च से लगातार रुक-रुककर बारिश और आंधी देखी जा रही है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा है.