गेहूं-धान नहीं, इस खरीफ उड़द बोई तो होगी बंपर कमाई… सरकार दे रही MSP के साथ 600 रुपये बोनस

Urad MSP Bonus: मध्य प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन में उड़द किसानों को बड़ा फायदा देने की घोषणा की है. उड़द प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को MSP के साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस मिलेगा और केंद्र सरकार ने दलहन की 100 फीसदी खरीद का भरोसा दिया है. इसका उद्देश्य धान-गेहूं की जगह दलहन फसलों को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 31 May, 2026 | 02:31 PM

Urad MSP Bonus Scheme MP: आगामी खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश के किसानों के लिए उड़द की खेती एक अच्छा कमाई का विकल्प बनकर सामने आ रही है. राज्य सरकार किसानों को धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की जगह दलहन फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इस योजना के तहत उड़द की फसल बेचने पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के साथ-साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा. मध्य प्रदेश सरकार के कृषि विभाग का कहना है कि इस कदम का मकसद राज्य में दलहन उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय को मजबूत करना है.

उड़द प्रोत्साहन योजना क्या है?

मध्य प्रदेश सरकार की उड़द प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को उनकी फसल का सही और तय मूल्य दिलाने की व्यवस्था की गई है. इस योजना का उद्देश्य किसानों को बाजार में होने वाले दामों के उतार-चढ़ाव से बचाना है. सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि दलहन की 100 फीसदी खरीद की गारंटी केंद्र स्तर पर दी जाएगी, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो. इस पहल से किसानों को स्थिर आय का भरोसा मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

दलहन उत्पादन को बढ़ाने की सरकारी रणनीति

सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य में दलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाना और विदेशों से होने वाले आयात पर निर्भरता को कम करना है. लंबे समय से भारत को उड़द और अन्य दालों के लिए बाहरी बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है. इसी को देखते हुए सरकार किसानों को प्रोत्साहन देकर घरेलू उत्पादन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. यह योजना किसानों को फसल विविधीकरण (क्रॉप बदलने) के लिए भी प्रेरित करती है, ताकि वे सिर्फ धान और गेहूं पर निर्भर न रहकर दलहन जैसी लाभकारी फसलों की ओर भी बढ़ सकें.

उड़द दाल और आयात पर भारत की निर्भरता

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में दालों की मांग का बड़ा हिस्सा अभी भी आयात से पूरा किया जाता है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने करीब 60 लाख टन दालों का आयात किया, जिसमें उड़द दाल का हिस्सा लगभग 16 प्रतिशत रहा.

वहीं, सबसे ज्यादा आयात अरहर दाल का हुआ, जो कुल आयात का लगभग 25 प्रतिशत तक पहुंच गया. पिछले साल उड़द दाल के आयात में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 10 लाख टन रही. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की वजह मांग में कमी नहीं थी, बल्कि पहले से मौजूद पर्याप्त स्टॉक था.

सरकार की नई पहल से किसानों को क्या फायदा?

उड़द प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को कई लाभ मिलेंगे.

  • MSP के साथ अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस
  • फसल बिक्री में सरकारी खरीद की गारंटी
  • आयात पर निर्भरता कम होने से घरेलू बाजार को मजबूती
  • दलहन खेती को बढ़ावा और अतिरिक्त आय का अवसर

मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल किसानों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है. उड़द जैसी दलहन फसलों को बढ़ावा देकर न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि देश की आयात निर्भरता भी कम होगी. आने वाले खरीफ सीजन में यह योजना किसानों को नई दिशा और बेहतर मुनाफे का रास्ता दिखा सकती है.

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