सिंचाई के अभाव में खेतों में खड़ी फसलें सूख रहीं, 8 लाख हेक्टेयर पर संकट.. टेंशन में किसान

अल नीनो और बारिश की कमी से आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलें संकट में हैं. 8.91 लाख हेक्टेयर में बोई गई फसलें नमी की कमी से प्रभावित हो रही हैं. धान, कपास, अरहर और मूंगफली की खेती पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. किसान बोरवेल के सहारे फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन समय पर बारिश नहीं हुई तो नुकसान बढ़ सकता है.

Kisan India
नोएडा | Published: 18 Jul, 2026 | 01:03 PM

Paddy Cultivation: अल नीनो की वजह से लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने का असर अब आंध्र प्रदेश की खेती पर दिखने लगा है. पानी की कमी के कारण 8.91 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं और किसान चिंता में हैं. जून के तीसरे सप्ताह में हल्की बारिश के बाद किसानों ने अच्छे मॉनसून की उम्मीद में खरीफ की बुवाई शुरू की थी, लेकिन जुलाई में बारिश कमजोर पड़ने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि विभाग ने किसानों को पर्याप्त बारिश  होने तक बुवाई नहीं करने की सलाह दी थी, लेकिन खरीफ सीजन निकल जाने के डर से कई किसानों ने सलाह के बावजूद बुवाई कर दी. अब बारिश नहीं होने से उनकी फसलें पानी की कमी का सामना कर रही हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों का सामान्य रकबा 30.84 लाख हेक्टेयर है. अब तक 8.91 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, जो सामान्य रकबे का करीब 29 फीसदी है.

3.26 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई

बारिश नहीं होने के कारण 8.91 लाख हेक्टेयर में बोई गई खरीफ फसलें नमी की कमी (मॉइस्चर स्ट्रेस) का सामना कर रही हैं. अब तक धान की सबसे ज्यादा 3.26 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है. इसके बाद कपास 2.75 लाख हेक्टेयर, अरहर 1.08 लाख हेक्टेयर, मूंगफली 0.62 लाख हेक्टेयर, मक्का 0.51 लाख हेक्टेयर और गन्ना 0.10 लाख हेक्टेयर में बोया गया है. ज्यादातर बुवाई श्रीकाकुलम, अनंतपुर, नंदयाल, चित्तूर और नेल्लोर जिलों में हुई है.

तटीय जिलों में धान की खेती

धान आंध्र प्रदेश की मुख्य खरीफ फसल  है, जिसकी सबसे ज्यादा खेती तटीय जिलों में होती है. धान की अच्छी पैदावार के लिए भरपूर पानी की जरूरत होती है. किसान मुख्य रूप से बारिश के पानी पर निर्भर रहते हैं, जबकि फसल के कुछ चरणों में नहरों का पानी सिंचाई के लिए सहायक होता है. ऐसे में बारिश की कमी का सीधा असर धान की फसल पर पड़ रहा है.

नहरों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया

कई नहरों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया है, लेकिन यह आखिरी छोर (टेल-एंड) के खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है. ऐसे में सभी किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा. कई गांवों में किसान बोरवेल का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर पानी खेतों तक पहुंचा रहे हैं, ताकि फसल बचाई जा सके. लेकिन कई इलाकों में भूजल स्तर भी नीचे चला गया है, इसलिए यह उपाय ज्यादा दिन तक कारगर नहीं रहेगा. किसानों का कहना है कि अब फसल को बचाने के लिए समय पर बारिश होना ही सबसे जरूरी है. मछलीपट्टनम ग्रामीण मंडल के किसान जी. अशोक ने कहा कि उन्होंने तीन एकड़ में धान की बुवाई की थी, लेकिन पानी की कमी के कारण फसल सूखने लगी है. उन्होंने कहा कि अगर बारिश नहीं हुई तो उनकी पूरी लागत डूब सकती है. दोबारा बुवाई करना उनके लिए बड़ा आर्थिक बोझ होगा.

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