मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के कई जिलों में सिंचाई नलकूप या पेयजल नलकूपों, हैंडपंप की बोरिंग करने पर रोक लगा दी है. राज्य सरकार के निर्देश पर भोपाल, नीमच समेत आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में बोरिंग करने पर लगाने के निर्देश जिलाधिकारियों ने जारी किए हैं. इन जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित किया गया है. प्रतिबंध के दौरान बोरिंग करते पाए जाने पर 2 साल की जेल के साथ मोटा जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है. निर्देश में कहा गया है कि विशेष स्थिति में बोरिंग की अनुमति फाइन के साथ दी जाएगी. हालांकि, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से स्वीकृत नलकूप खनन कार्य इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे.
जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित जिलों में प्रतिबंध लगा
मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में गिरते भूजल स्तर के मद्देनजर मध्य प्रदेश शासन की ओर से चिह्नित जिलों में नलकूप खनन, सिंचाई बोरवेल पर प्रतिबंध लगाया गया है. राज्य सरकार के 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक रोक लगाई है. वहीं, रायसेन जिले में निजी नलकूप या हैंडपंप खनन पर 30 जून तक प्रतिबंध लगाया गया है. राज्य सरकार ने उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
रायसेन जिले के कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने बयान में कहा कि मध्य प्रदेश पेयजल परिरक्षण अधियिम 1986 के तहत तत्काल प्रभाव से रायसेन जिले को 30 जून तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुए नए निजी नलकूप, ट्यूबवेल खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है. साथ ही रायसेन जिले की राजस्व सीमाओं में नलकूप, बोरिंग मशीन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की अनुमति के बिना ना तो प्रवेश करेगी और ना ही बिना अनुमति के कोई नया नलकूप खनन करेगी.
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इन जिलों में नलकूप, हैंडपंप खनन पर रोक लगी
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में 30 जून 2026 तक नए निजी नलकूप (बोरवेल) खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. वहीं, गिरते भूजल स्तर के चलते भोपाल, नीमच, खरगोन और इंदौर जैसे कई जिलों में निजी नलकूप (बोरवेल) खनन पर रोक लगा दी गई है. इन क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित किया गया है, और बिना अनुमति बोरिंग कराने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
ग्रामीण और शहरी क्षेत्र जल अभावग्रस्त घोषित
झाबुआ जिले की कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नेहा मीना ने जिले में भूमिगत जलस्तर में निरंतर हो रही गिरावट और आगामी ग्रीष्म ऋतु में संभावित पेयजल संकट की गंभीर स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए लोकहित में नलकूप, हैंडपंप बोरिंग पर रोक लगा दी गई है. मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 एवं संशोधन अधिनियम 2002 में प्रावधानों के अंतर्गत अधिनियम की धारा-3 के तहत झाबुआ जिले के समस्त नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है. साथ ही अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत जिले में नलकूप खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है.

रायसेन जिले के कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा (ऊपर) झाबुआ जिले की कलेक्टर नेहा मीना (नीचे).
जारी आदेश में कहा गया है कि जिले के पेयजल अभावग्रस्त क्षेत्रों में स्थित सभी सार्वजनिक पेयजल स्रोतों से बिना सक्षम अनुमति के कोई भी व्यक्ति सिंचाई, औद्योगिक या अन्य किसी काम के लिए जल का उपयोग नहीं कर सकेगा. आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने के लिए जल स्रोतों का अस्थायी अधिग्रहण किया जा सकेगा. निजी नलकूप खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.
उल्लंघन करने पर 2 साल की जेल होगी और जुर्माना लगेगा
विशेष परिस्थितियों में निजी नलकूप खनन या निजी नल कनेक्शन की अनुमति के लिए इच्छुक व्यक्तियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा, जिसके साथ 50 रुपये की चालान फीस बैंक में जमा करनी होगी. उक्त आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध अधिनियम के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 2 साल का कारावास अथवा 2000 रुपये तक का अर्थदंड या दोनों से दंडनीय प्रावधान लागू रहेगा।