MP में मिलावटी घी के खेल का पर्दाफाश! रत्नागिरी समेत 3 ब्रांड के सैंपल जांच में असुरक्षित, 532 लीटर घी जब्त

Adulterated Ghee Racket: उज्जैन में ब्रांडेड घी की जांच के दौरान तीन कंपनियों के सैंपल अनसेफ पाए गए हैं. राज्य स्तरीय लैब की रिपोर्ट के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने 532 लीटर घी जब्त किया. अधिकारियों के मुताबिक, जांच में वनस्पति तेल और लेड जैसे हानिकारक तत्वों की मिलावट की जानकारी सामने आई है.

नोएडा | Published: 30 Aug, 2026 | 09:29 AM

Ujjain Ghee Adulteration: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में शुद्ध घी के नाम पर बिक रहे कुछ ब्रांडेड उत्पादों को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है. खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में तीन कंपनियों के घी के सैंपल अनसेफ पाए गए हैं. राज्य स्तरीय लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, रत्नागिरी देसी घी, मिल्क क्रीम देसी घी और नंद कृष्णा घी के नमूनों में मिलावट की बात सामने आई है. जांच में वनस्पति तेल के साथ लेड यानी सीसा जैसे हानिकारक तत्व पाए जाने की जानकारी दी गई है.

जांच में तीन घी के सैंपल फेल

खाद्य सुरक्षा विभाग ने अलग-अलग जगहों से घी के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे थे. रिपोर्ट आने के बाद तीन सैंपल को अनसेफ घोषित किया गया. इसका मतलब है कि जांच में इन उत्पादों को खाने के लिहाज से सुरक्षित नहीं पाया गया. घी जैसी चीज का इस्तेमाल ज्यादातर घरों में रोजाना खाना बनाने से लेकर पूजा-पाठ और बच्चों के भोजन तक में किया जाता है. ऐसे में किसी खाद्य उत्पाद में हानिकारक पदार्थ मिलने की खबर सीधे लोगों की चिंता बढ़ा देती है.

विभाग ने जब्त किया 532 लीटर घी

लैब रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी. अधिकारियों ने महिदपुर के बाकलीवाल ट्रेडर्स से 280 लीटर मिल्क क्रीम घी जब्त किया. वहीं दूधतलाई स्थित श्रीकृष्णा डिस्पोजल से 110 लीटर रत्नागिरी घी और महिदपुर रोड की राजेंद्र कुमार बाबूलाल फर्म से 142 लीटर नंद कृष्णा घी बरामद किया गया. इस तरह विभाग ने कुल 532 लीटर संदिग्ध घी को जब्त किया है. जानकारी के मुताबिक, इन उत्पादों की सप्लाई इंदौर से उज्जैन तक हुई थी. अब विभाग मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया कर रहा है.

वनस्पति तेल और लेड मिलने की बात

जांच अधिकारियों के अनुसार, इन घी के नमूनों में वनस्पति तेल की मिलावट के साथ लेड यानी सीसा पाए जाने की जानकारी सामने आई है. सीसा शरीर के लिए हानिकारक धातु माना जाता है. इसलिए खाद्य पदार्थ में इसकी मौजूदगी को गंभीर मामला माना जाता है. हालांकि, किसी भी खाद्य उत्पाद को लेकर अंतिम कार्रवाई संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होती है. उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे बिना जांची-परखी जानकारी के किसी उत्पाद को लेकर निष्कर्ष न निकालें.

खाने-पीने की चीजों में मिलावट बड़ी चिंता

खाद्य पदार्थों में मिलावट कोई नई समस्या नहीं है. दूध, घी, पनीर, तेल, मसाले और मिठाइयां जैसी रोजमर्रा की चीजें भी कई बार जांच के दायरे में आती हैं. मिलावट से न केवल खाद्य पदार्थ की क्वालिटी प्रभावित होती है, बल्कि लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर दुकानों, गोदामों और खाद्य कारोबारियों के यहां जांच और सैंपलिंग करता है.

त्योहारों से पहले बढ़ाई जाती है निगरानी

त्योहारों के समय मिठाई, खोया, पनीर, घी और दूसरे खाद्य उत्पादों की मांग अचानक बढ़ जाती है. ऐसे में मिलावट की आशंका को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभागों की ओर से विशेष अभियान चलाए जाते हैं. कई जगह मोबाइल टेस्टिंग वैन के जरिए भी खाद्य पदार्थों की शुरुआती जांच की जाती है. उज्जैन में सामने आया यह मामला भी बताता है कि पैक्ड या ब्रांडेड नाम देखकर ही किसी खाद्य उत्पाद को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना ठीक नहीं है. उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान पैकेट की सील, लेबल, निर्माण और एक्सपायरी डेट जैसी जरूरी जानकारियां जरूर देखनी चाहिए.

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