SAFTA के नाम पर 2,500 करोड़ की लूट! DRI ने खोला विदेशी सुपारी का बड़ा खेल
SAFTA समझौते का दुरुपयोग कर विदेशी सुपारी को बांग्लादेशी बताकर भारत में आयात किया गया. DRI की महीनेभर चली जांच में 2,500 करोड़ रुपये की सीमा शुल्क चोरी, 160 मीट्रिक टन सुपारी और 75 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जबकि 9 लोगों की गिरफ्तारी हुई.
भारत में सुपारी आयात के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने पर्दाफाश किया है. जांच में सामने आया कि इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों की सुपारी को बांग्लादेशी मूल का बताकर SAFTA समझौते का गलत फायदा उठाया गया. इस नेटवर्क से सरकारी खजाने को करीब 2,500 करोड़ रुपये के सीमा शुल्क का नुकसान पहुंचा. कार्रवाई में 160 मीट्रिक टन सुपारी, 75 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं और 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
ऐसे हुआ SAFTA समझौते का दुरुपयोग
भारत में सुपारी के आयात पर सामान्य तौर पर 100 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) लागू होती है. लेकिन दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) समझौते के तहत बांग्लादेश से आने वाली पात्र सुपारी पर सीमा शुल्क में पूरी छूट मिलती है. डीआरआई की जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से सुपारी मंगवाकर पहले उसे बांग्लादेश के एक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन (EPZ) में पहुंचाता था. वहां कंटेनर और बोरियां बदलकर माल को बांग्लादेशी मूल का दिखाया जाता था और फर्जी Certificate of Origin के जरिए भारत भेज दिया जाता था.
एक महीने की जांच में मिला बड़ा सबूत
डीआरआई ने खुफिया सूचना के आधार पर कोलकाता और विशाखापत्तनम में आयातकों, सीमा शुल्क दलालों और IEC धारकों के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. तलाशी के दौरान दक्षिण-पूर्व एशियाई मूल साबित करने वाले दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले. अधिकारियों ने 75 लाख रुपये नकद जब्त किए, जिसे अवैध आयात से हुई कमाई माना जा रहा है. इसके अलावा 160 मीट्रिक टन सुपारी की खेप भी कब्जे में ली गई, जिसकी बाजार में बड़ी कीमत आंकी जा रही है.
हवाला, फर्जी कंपनियां और दलालों का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि मुख्य साजिशकर्ता भारतीय आयातकों से भारी कमीशन लेकर माल की रूटिंग, दस्तावेजीकरण, कस्टम क्लीयरेंस और परिवहन की पूरी व्यवस्था करते थे. भुगतान का बड़ा हिस्सा नकद और हवाला चैनलों के जरिए लिया जाता था, जबकि कई फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल धन के लेनदेन को छिपाने के लिए किया गया. डीआरआई ने यह भी पाया कि सुपारी के अधिकांश अवैध आयात की निकासी एक ही सीमा शुल्क दलाल फर्म कर रही थी. इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने उस फर्म का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
किसानों और सरकार दोनों को हुआ नुकसान
इस तरह के अवैध आयात का सबसे बड़ा असर देश के घरेलू सुपारी उत्पादकों पर पड़ता है. सस्ती और गलत तरीके से आयातित सुपारी बाजार में आने से कीमतों में असंतुलन पैदा होता है, जिससे वैध व्यापार और किसानों की आय प्रभावित होती है. वहीं सरकार को हजारों करोड़ रुपये के सीमा शुल्क राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है. डीआरआई का कहना है कि यह कार्रवाई मूल देश की गलत घोषणा, SAFTA के दुरुपयोग और सीमा शुल्क चोरी करने वाले संगठित नेटवर्क पर बड़ी चोट है. मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.