चीनी आयात नियमों में बदलाव, कीमतें नीचे लाने के लिए केंद्र ने मिलों और आयातकों को बड़ी राहत दी

Sugar Price Updates: चीनी की घरेलू बाजार में कीमतों को नीचे लाने के लिए केंद्र सरकार 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात कर रही है. इससे जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए चीनी मिलों और आयातकों को बड़ी राहत दी गई है.

नोएडा | Updated On: 8 Sep, 2026 | 07:02 PM

केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयात होने वाली कच्ची चीनी को अब आयातकों को ‘बिल ऑफ एंट्री’ दाखिल करने की तारीख से अधिकतम दो महीने के भीतर रिफाइंड या सफेद चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचनी होगी. सरकार के 7 सितंबर को जारी संशोधन से चीनी मिलों और आयातकों को पहले के मुकाबले अधिक समयसीमा मिल सकेगी.

इससे पहले 20 अगस्त 2026 को जारी DGFT की अधिसूचना में आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन कर उससे तैयार चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचने की शर्त रखी गई थी. नए आदेश में समयसीमा को ‘बिल ऑफ एंट्री’ की तारीख से जोड़ दिया गया है, जबकि मूल अधिसूचना की अन्य शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी.

कम चीनी उत्पादन के बीच आयात का फैसला

सरकार ने मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन घटने की आशंका और खुदरा कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है. मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान करीब 306 लाख टन लगाया गया है, जो शुरुआती अनुमान 343 लाख टन से काफी कम है. सरकार का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है.

चीनी बिक्री के नियम भी बदले

चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने सितंबर से मिलों के चीनी आवंटन कोटे को मासिक (30 दिन) के बजाय पखवाड़े (15 दिन) में कर दिया है. नई व्यवस्था के तहत मिलों को आवंटित मात्रा का कम से कम 40 फीसदी पहले सप्ताह में बेचने और बाकी मात्रा अगले सप्ताह में बेचने की व्यवस्था की गई है.

इसके अलावा चीनी डीलरों की अधिकतम स्टॉक सीमा भी 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई है. यह सीमा 15 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी. इन कदमों का उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के साथ बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना है.

मिल कीमतें घटीं, खुदरा दाम कम होने की उम्मीद

कई बाजारों में चीनी की खुदरा कीमत अभी भी 60 रुपये प्रति किलो से अधिक बनी हुई है. हालांकि, नेशनल फेडरेशन ऑफ़ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के मुताबिक मिल से निकलने वाली चीनी की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है और देश में पर्याप्त सप्लाई मौजूद है. वहीं, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा कि मिल कीमतें अपने ऊपरी स्तर से करीब 30 फीसदी तक नीचे आ चुकी हैं.

Published: 8 Sep, 2026 | 07:02 PM

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