आम के बाग में अब न करें देरी, जनवरी में ये काम किए तो उत्पादन बढ़ना तय

जनवरी का महीना आम के बागों के लिए बेहद अहम होता है, क्योंकि इसी समय पेड़ों में बौर आने की तैयारी होती है. अगर इस समय सही प्रबंधन न किया जाए, तो रोग और पोषण की कमी के कारण पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है. लेकिन अगर किसान जनवरी में कुछ जरूरी कदम उठा लें, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में अच्छा इजाफा किया जा सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 Jan, 2026 | 03:12 PM

Mango farming: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी बागवानी लाखों किसानों की आमदनी का मुख्य साधन है. उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आम की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. जनवरी का महीना आम के बागों के लिए बेहद अहम होता है, क्योंकि इसी समय पेड़ों में बौर आने की तैयारी होती है. अगर इस समय सही प्रबंधन न किया जाए, तो रोग और पोषण की कमी के कारण पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है. लेकिन अगर किसान जनवरी में कुछ जरूरी कदम उठा लें, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में अच्छा इजाफा किया जा सकता है.

जनवरी में क्यों जरूरी है आम के बाग की विशेष देखभाल

जनवरी के दौरान मौसम में ठंड, नमी और कभी-कभी बादल छाए रहने की स्थिति बनती है. यह माहौल आम के पेड़ों में फफूंद और पोषण से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसी समय बौर निकलने से पहले पेड़ की सेहत तय होती है. यदि इस चरण में रोग लग गया या फूल झड़ने लगे, तो फल बनने की संख्या कम हो जाती है. इसलिए जनवरी को आम के लिए “तैयारी का महीना” कहा जाता है.

बौर आने से पहले रोग प्रबंधन है सबसे अहम

जनवरी-फरवरी में आम के बागों में सबसे ज्यादा खतरा सफेद चूर्णी रोग और एन्थ्रेक्नोज जैसे रोगों का रहता है. सफेद चूर्णी रोग में बौर और कोमल पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा जमाव दिखने लगता है, जिससे फूल सूखकर गिर सकते हैं. वहीं एन्थ्रेक्नोज रोग अधिक नमी में तेजी से फैलता है और पत्तियों व टहनियों पर काले-भूरे धब्बे बना देता है.

इन रोगों से बचाव के लिए किसान जनवरी में बाग की नियमित निगरानी करें. जैसे ही शुरुआती लक्षण दिखें, समय पर उपचार करना बहुत जरूरी होता है, ताकि रोग आगे न फैले और बौर सुरक्षित रहे.

गुम्मा रोग से बचाव जरूरी, वरना रुक सकता है फल बनना

आम के बागों में गुम्मा रोग एक गंभीर समस्या है, जिसमें फूल और पत्तियां असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और फल नहीं बन पाते. इस रोग से ग्रसित पेड़ों में पूरा बौर एक गुच्छे के रूप में दिखाई देता है, लेकिन वह फल देने में सक्षम नहीं होता. जनवरी में इस रोग की पहचान आसान होती है, इसलिए किसान को चाहिए कि ऐसे विकृत बौर को समय रहते काटकर नष्ट कर दें. इससे रोग का फैलाव रुकता है और बाकी पेड़ सुरक्षित रहते हैं.

पोषण संतुलन से मजबूत बनता है आम का पेड़

जनवरी में आम के पेड़ों को संतुलित पोषण देना बेहद जरूरी होता है. इस समय पोटाश, जिंक और बोरॉन जैसे तत्वों की कमी अक्सर देखने को मिलती है, जिससे पत्तियों के किनारे जलने लगते हैं या फूल कमजोर बनते हैं. सही मात्रा में पोषक तत्व मिलने से बौर मजबूत बनता है और बाद में फल गिरने की समस्या कम होती है. स्वस्थ पेड़ ही अच्छी पैदावार की नींव होता है.

परागण का रखें खास ध्यान

आम में परागण की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है. जनवरी-फरवरी में फूल आने के समय यदि परागण सही नहीं हुआ, तो फल कम बनते हैं या आकार में छोटे रह जाते हैं. इस दौरान बाग में मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीटों की मौजूदगी जरूरी होती है. इसलिए फूलों के समय अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग से बचना चाहिए और बाग के आसपास प्राकृतिक वातावरण बनाए रखना चाहिए.

जनवरी की सही तैयारी से बढ़ेगा मुनाफा

अगर किसान जनवरी में आम के बाग की सही देखभाल करें, रोगों की समय रहते पहचान करें और पोषण व परागण पर ध्यान दें, तो आने वाले महीनों में फल अच्छी संख्या और बेहतर गुणवत्ता के साथ मिलते हैं. इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ता है, बल्कि बाजार में आम का बेहतर दाम भी मिलता है. कुल मिलाकर जनवरी का महीना आम उत्पादकों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिसे सही तकनीक और समझदारी से अपनाकर किसान अपनी आमदनी को काफी बढ़ा सकते हैं.

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