बेमौसम बारिश से 80 फीसदी तक चना फसल चौपट, किसानों को 2 लाख रुपये तक नुकसान.. सर्वे का काम शुरू
कुरुक्षेत्र के पिपली इलाके के मथाना गांव के किसान प्रवीण मथाना ने किसान इंडिया को बताया कि पिछले हफ्ते हुई बारिश से उनके गांव की रबी फसल को करीब 40 फीसदी तक नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान चने की फसल को हुआ है. उनके अनुसार, गेहूं की फसल को लगभग 40 फीसदी नुकसान पहुंचा, जबकि चना की फसल करीब 80 फीसदी तक पूरी तरह खराब हो गई.
Crop Damage: पिछले हफ्ते हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब में बेमौसम बारिश के चलते फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा. गेहूं, चना, प्याज और सरसों सहित बागवानी फसलें बर्बाद हो गईं. ऐसे में किसानों को पैदावार में गिरावट आने का डर सता रहा है. हालांकि, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार में फसल नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है. राज्य सरकारों ने कहा है कि सर्वे रिपोर्ट आने के बाद फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मुआवजा दिया जाएगा. लेकिन बात अगर हरियाणा की करें तो यहां पर गेहूं और चना की फसलों का नुकसान कुछ ज्यादा ही देखे को मिल रहा है. कुरुक्षेत्र के एक गांव में 80 फीसदी तक चना की फसल फसल बर्बाद हो गई है. गेहूं किसानों को दो लाख रुपये तक नुकसान हुआ है.
कुरुक्षेत्र जिले के पिपली स्थित मथाना गांव के किसान प्रवीण मथाना ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले हफ्ते बारिश होने के चलते उनके गांव में रबी फसल 40 फीसदी तक बर्बाद हो गई. उन्होंने कहा कि पूरे गांव में चने की फसल की सबसे अधिक बर्बादी हुई है. उनके मुताबिक, बारिश से गेहूं की फसल को 40 फीसदी तक नुकसान हुआ, जबकि चना 80 फीसदी तक चौपट हो गई. प्रवीण मथाना ने किसान इंडिया से कहा कि बारिश से सरसों, मक्का और प्याज की फसल पर भी असर पड़ा है. बारिश के चलते सरसों में फंगल लगना शुरू हो गया है. वहीं, कई किसान बरसात के कारण प्याज की बीजाई भी नहीं कर पाए.
40 फीसदी तक गेहूं की फसल बर्बाद
प्रवीण मथाना ने किसान इंडिया से कहा कि उन्होंने 12 एकड़ में गेहूं की फसल बो रखी है. बारिश से 40 फीसदी तक गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है. उन्होंने कहा कि फसल बर्बादी के चलते मुझे करीब 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि बेमौसम बारिश से गांव के अन्य बड़े गेहूं किसानों को भी एक से लेकर 2 लाख रुपये का तक नुकसान उठना पड़ा है. इसलिए सरकार को किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाना चाहिए.
आम की फसल पर भी असर
वहीं, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के रहने वाले किसान असद मलिक ने कहा कि बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से गेहूं के साथ-साथ बागवानी को भी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने किसान इंडिया से कहा कि तेज हवा चलने के चलते आम के बाग में करीब 10 फीसदी तक फल छड़ गए हैं. उनके मुताबिक, उनके परिवार के सभी सदस्यों को मिलाकर कुल 9 से 10 एकड़ में आम के बाग हैं. लेकिन बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सभी को नुकसान उठाना पड़ा है. साथ ही गांव के अन्य किसान भी प्रभावित हुए हैं.
डिप्टी कमिश्नर ने गांवों में जाकर खुद किया फसल निरीक्षण
वहीं, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में फसल नुकसान का आकलन करने के लिए सर्व का काम शुरू हो गया है. कैथल के कुलतारण और उझाना गांवों में रबी फसलों की गिरदावरी का जमीनी निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान कैथल की डिप्टी कमिश्नर ने कई एकड़ में फसल का विवरण खुद सत्यापित किया और मोबाइल ऐप के जरिए सिस्टम की कार्यप्रणाली भी देखी.
31 मार्च तक हर हाल में सर्वे का काम पूरा करने का आदेश
कैथल की डिप्टी कमिश्नर ने पटवारी, नायब तहसीलदार और तहसीलदार सहित सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि डिजिटल फसल सर्वे 31 मार्च तक हर हाल में पूरा किया जाए. उन्होंने कहा कि गिरदावरी सिर्फ कागजी प्रक्रिया न होकर जमीन की असली स्थिति को दिखानी चाहिए. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि खेत में जो फसल वास्तव में खड़ी है, उसी को रिकॉर्ड किया जाए. रिपोर्ट पूरी तरह सटीक और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी तरह की परेशानी न हो.