कर्नाटक-तमिलनाडु में फिर बढ़ा कावेरी विवाद! 12 हजार क्यूसेक पानी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
Cauvery Water Dispute: कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कर्नाटक ने कहा कि वह तमिलनाडु को रोजाना 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने के CWMA के आदेश का पालन करने की कोशिश कर रहा है. राज्य ने शुरुआती दिनों में कम पानी छोड़े जाने की बात भी मानी.
Cauvery Water Row: कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी को लेकर विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने अदालत को बताया कि उसने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के उस आदेश का पालन किया है, जिसमें तमिलनाडु को 15 दिनों तक रोजाना 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया था. हालांकि, कर्नाटक ने यह भी माना कि शुरुआती दिनों में तय मात्रा से कम पानी छोड़ा गया.
शुरुआती दिनों में कम छोड़ा गया पानी
सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक की ओर से पेश वकील श्याम दीवान ने कहा कि राज्य सरकार 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश को पूरा करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने अदालत को बताया कि ऐसा करना कर्नाटक के लिए आसान नहीं होगा, लेकिन सरकार निर्देश के मुताबिक पानी छोड़ने का प्रयास करेगी. कर्नाटक के अनुसार, शुरुआती 4-5 दिनों में करीब 6 हजार क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा सका. राज्य सरकार का कहना है कि शुरुआती कमी को आने वाले दिनों में पूरा करने की कोशिश की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी पानी छोड़ने की स्थिति
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को पानी छोड़े जाने की मौजूदा स्थिति की जानकारी देने का निर्देश दिया. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की है. इससे पहले 12 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तमिलनाडु सरकार और अन्य पक्षों की ओर से दायर याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई की जाएगी. इनमें डीएमके की ओर से दायर याचिका भी शामिल है.
तमिलनाडु ने पानी की कमी का मुद्दा उठाया
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कम बारिश वाले साल में उसे कावेरी नदी से मिलने वाला पानी उसके हिस्से के मुताबिक नहीं मिल रहा है. इसी मुद्दे को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कर्नाटक को तत्काल पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की थी. याचिका में दावा किया गया था कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की ओर से तय पानी की मात्रा भी पर्याप्त नहीं है और कर्नाटक से वास्तव में छोड़ा जा रहा पानी उससे भी कम है.
पहले 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का था आदेश
इस विवाद की शुरुआत जुलाई के आखिर में हुई. 28 जुलाई को हुई CWRC की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था. तमिलनाडु सरकार ने दावा किया कि 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडलू में पानी का प्रवाह करीब 158 से 550 क्यूसेक के बीच ही रहा. राज्य का आरोप था कि यह तय मात्रा से काफी कम था. इसके बाद पानी छोड़ने की मात्रा को लेकर विवाद बढ़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. CWMA ने बाद में 15 दिनों के लिए रोजाना 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया.
दोनों राज्यों के लिए अहम है कावेरी का पानी
कावेरी नदी का पानी कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों के लिए बेहद अहम है. कर्नाटक में यह पानी खेती और पेयजल की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं तमिलनाडु के कई कृषि क्षेत्रों में भी कावेरी पर निर्भरता है. ऐसे में कम बारिश के दौरान दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ जाता है. अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में यह साफ होने की उम्मीद है कि कर्नाटक ने CWMA के निर्देश के मुताबिक कितना पानी छोड़ा और आगे पानी की आपूर्ति को लेकर क्या व्यवस्था रहेगी.