अब हवाई नहीं समुद्री मार्ग से होगा आम का निर्यात, 90 फीसदी घटी एक्सपोर्ट लागत.. किसानों को फायदा
आंध्र प्रदेश के बंगनपल्ली आमों की 4.3 टन खेप पहली बार नई तकनीक के सहारे समुद्री मार्ग से सिंगापुर पहुंची. इससे निर्यात लागत में भारी कमी आई है और आमों की गुणवत्ता भी बरकरार रही. इस सफलता से सिंगापुर, मलेशिया, हांगकांग और यूएई जैसे बाजारों में भारतीय आमों के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
Mango Export: भारत के आमों को सिंगापुर के बाजार में पहुंचाने के लिए अब नया और सस्ता रास्ता मिल गया है. आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध बंगनपल्ली आमों की 4.3 टन खेप समुद्री मार्ग से सिंगापुर भेजी गई है. इससे निर्यात लागत में बड़ी कमी आई है और भारतीय आम विदेशी बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं. अब तक आमों का निर्यात मुख्य रूप से हवाई मार्ग से किया जाता था, जिससे परिवहन खर्च काफी ज्यादा पड़ता था. समुद्री मार्ग से निर्यात करने पर लॉजिस्टिक्स लागत घटकर 13 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है, जबकि हवाई मार्ग से यह खर्च 150 से 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक आता है. यानी कि निर्यात लागत में 90 फीसदी तक कमी आई है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यातकों का मानना है कि समुद्री मार्ग अपनाने से आम निर्यात अधिक लाभदायक होगा. इससे किसानों और निर्यातकों को बेहतर मुनाफा मिलेगा, वहीं सिंगापुर जैसे देशों के उपभोक्ताओं को भी भारतीय आम अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे. सिंगापुर तक समुद्री मार्ग से आम भेजने की सफलता के पीछे नई तकनीक का अहम योगदान रहा है. यह तकनीक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के लखनऊ स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) और एपीडा (APEDA) ने मिलकर विकसित की है.
वैज्ञानिक ने समुद्री परिवहन प्रोटोकॉल तैयार किया
दोनों संस्थानों ने आम के निर्यात के लिए एक वैज्ञानिक समुद्री परिवहन प्रोटोकॉल तैयार किया है, जिससे फलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद मिली है. इस तकनीक की बदौलत आमों को समुद्री यात्रा के दौरान 30 दिनों तक सुरक्षित और ताजा रखा जा सकता है. आंध्र प्रदेश से सिंगापुर भेजी गई बंगनपल्ली आमों की खेप ने 16 दिनों में यात्रा पूरी की. खास बात यह रही कि सिंगापुर पहुंचने पर आमों में किसी तरह की बीमारी या खराबी नहीं पाई गई. उनकी गुणवत्ता भी हवाई मार्ग से भेजे गए आमों के बराबर रही, जिससे समुद्री निर्यात की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं.
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निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद
सिंगापुर को समुद्री मार्ग से आमों की सफल खेप भेजे जाने के बाद भारतीय आमों के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इससे सिंगापुर, मलेशिया और हांगकांग जैसे बाजारों में भारतीय आमों की पहुंच बढ़ेगी. इन देशों में फिलहाल आम आयात का बाजार 40 से 50 लाख डॉलर का माना जाता है. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे बड़े बाजार, जिसकी अनुमानित कीमत 2 से 2.5 करोड़ डॉलर है, में भी निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं.
भारतीय आम की सिंगापुर में भारी मांग
सरकार ने इसे भारतीय आमों के किफायती और बड़े पैमाने पर निर्यात की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. सरकारी बयान के अनुसार, सिंगापुर में भारतीय आम अपने बेहतरीन स्वाद, खुशबू और गुणवत्ता के कारण काफी पसंद किए जाते हैं. खासकर बंगनपल्ली और केसर किस्म के आमों की वहां अच्छी मांग है. निर्यात के लिए तैयार किए गए इस नए प्रोटोकॉल में गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसके तहत अवशेष-मुक्त उत्पादन, अच्छी कृषि पद्धतियों (GAP) का पालन, वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और फसल कटाई के बाद उचित प्रबंधन जैसी प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है, ताकि विदेशों तक पहुंचने वाले आमों की गुणवत्ता बनी रहे.