सरकार ने जारी किए 262 करोड़, 1.3 लाख परिवारों के खातों में पहुंचे 20-20 हजार रुपये

आंध्र प्रदेश सरकार ने मछुआरों की सुरक्षा और आय बढ़ाने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 60 फीसदी सब्सिडी पर फिशिंग बोट, सीवीड खेती को बढ़ावा, समुद्री सुरक्षा के लिए ट्रांसपोंडर और मछुआरा गांवों के विकास की योजनाओं का ऐलान किया है.

नोएडा | Updated On: 20 May, 2026 | 02:15 PM

Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने ‘मत्स्यकारुला सेवा’ योजना के तहत 262 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता राशि जारी की. यह सहायता राशि मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरा परिवारों को आर्थिक मदद देने के लिए जारी की गई है. इससे राज्य के 1.3 लाख से अधिक मछुआरा परिवारों को राहत मिलेगी. वहीं, इस मौके पर मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने साफ कहा है कि उनकी सरकार मछुआरों के अधिकार और रोजगार की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के समुद्री क्षेत्र में दूसरे राज्यों की नावों की घुसपैठ किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

नेल्लोर जिला स्थित कावली में आयोजित ‘मत्स्यकारुला सेवा’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई अनधिकृत नाव आंध्र प्रदेश के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करती है, तुरंत कलेक्टर और प्रशासन को अलर्ट संदेश भेजा जाता है और प्रशासन सतर्क हो जाता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि मछुआरों की आजीविका की रक्षा के लिए सरकार पूरी मजबूती से काम करेगी. मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मछुआरों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं  चलाई जा रही हैं. मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को 20,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है. इस साल राज्य सरकार ने 1,30,796 मछुआरा परिवारों के बैंक खातों में 262 करोड़ रुपये जमा किए हैं, जबकि पिछले साल 1,21,433 परिवारों को 243 करोड़ रुपये की मदद दी गई थी.

झींगा पालन में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी

उन्होंने कहा कि देश से होने वाले कुल झींगा (श्रिम्प) निर्यात में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है, इसलिए मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि और निर्माण क्षेत्र के बाद मत्स्य पालन  राज्य में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है. मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने मछुआरा परिवारों को आय बढ़ाने के लिए नए काम अपनाने की सलाह दी. उन्होंने खासकर महिलाओं से समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती शुरू करने का आग्रह किया. उनका कहना है कि सीवीड खेती से तटीय गांवों के लोगों की आमदनी बढ़ सकती है और उनका जीवन स्तर बेहतर हो सकता है.

3,256 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे लैंडिंग सेंटर

उन्होंने कहा कि जब पुरुष समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं, तब महिलाएं सीवीड की खेती करके अतिरिक्त कमाई कर सकती हैं. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में समुद्री ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार 3,256 करोड़ रुपये की लागत से 9 फिशिंग हार्बर और 8 फिश लैंडिंग सेंटर बना रही है. मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार ने 4,550 ट्रांसपोंडर लगाए हैं और एक विशेष संचार नेटवर्क तैयार किया है. इससे मछली पकड़ने वाली नावों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जा सकेगा.

फिशिंग बोट पर 60 फीसदी तक सब्सिडी

उन्होंने घोषणा की कि मछुआरों को 60 फीसदी सब्सिडी पर 200 मशीनीकृत (मैकेनाइज्ड) फिशिंग बोट दी जाएंगी. बाकी राशि बैंक लोन के जरिए आसान किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार तकनीकी मदद भी दे रही है. मछलियों के ज्यादा मिलने वाले क्षेत्रों की जानकारी साझा की जा रही है, ताकि मछुआरे आधुनिक तकनीक और मशीनों की मदद से ज्यादा मछली पकड़ सकें और उनकी आय बढ़ सके. उन्होंने घोषणा की कि क्षेत्र के 25 मछुआरा गांवों को जोड़ने के लिए 6.27 करोड़ रुपये की लागत से मेटल सड़कें बनाई जाएंगी. इसके अलावा नॉर्थ बकिंघम कैनाल की सफाई (डीसिल्टिंग) के लिए 6.19 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं और इसे इनलैंड वाटरवे के रूप में विकसित किया जाएगा.

Published: 20 May, 2026 | 02:01 PM

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