नमक उत्पादन पांच साल के हाई पर, भाव 50 फीसदी गिरा.. 30 प्रतिशत छोटे उत्पादकों ने बंद किया कारोबार
तमिलनाडु के वेदारण्यम में इस साल नमक उत्पादन पांच साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है. सूखे मौसम और तेज गर्मी से उत्पादन 1.66 लाख टन हुआ, लेकिन कीमत करीब 50 फीसदी गिर गई. कम भाव और खरीदारों की कमी से छोटे उत्पादकों की मुश्किल बढ़ी है. करीब 30 फीसदी छोटे उत्पादकों ने अगस्त से उत्पादन बंद कर दिया है.
तमिलनाडु के वेदारण्यम क्षेत्र में इस साल नमक का उत्पादन करीब 1.66 लाख टन पहुंच गया है. यह फरवरी से अक्टूबर के बीच तय 1.75 लाख टन के सालाना लक्ष्य का करीब 95 फीसदी है. लंबे समय तक सूखा मौसम और तेज गर्मी के कारण नमक का उत्पादन पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा है. हालांकि, रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद नमक उत्पादकों की कमाई नहीं बढ़ी है. उत्पादकों के मुताबिक, खरीदारों की संख्या तेजी से घटने के कारण नमक की खरीद कीमत करीब 50 फीसदी तक गिर गई है. कीमतों में भारी गिरावट के चलते छोटे स्तर के करीब 30 फीसदी नमक उत्पादकों ने उत्पादन बंद कर दिया है. उत्पादकों को डर है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो क्षेत्र का नमक उद्योग और कमजोर हो सकता है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल नमक का उत्पादन जनवरी में सामान्य समय पर शुरू हुआ था. कमजोर मॉनसून और कम बारिश के कारण वेदारण्यम क्षेत्र में पिछले कई महीनों से तेज गर्मी रही. इससे मौसम सूखा रहा और नमक का उत्पादन लंबे समय तक जारी रह सका. नतीजतन, इस साल उत्पादन बढ़ा है. पिछले साल भारी बारिश के कारण सामान्य लक्ष्य का सिर्फ करीब 40 फीसदी नमक उत्पादन हो पाया था.
उत्पादन लागत के बराबर पहुंचा नमक का भाव
हालांकि, ज्यादा उत्पादन के बावजूद नमक उत्पादकों को कम कीमत मिल रही है. पिछले साल इस समय नमक का खरीद भाव 1,000-1,200 रुपये प्रति टन था, जो अब घटकर 600-750 रुपये प्रति टन रह गया है. उत्पादकों के मुताबिक, एक टन नमक तैयार करने की लागत भी करीब 600-750 रुपये है. इससे उनकी कमाई पर काफी असर पड़ा है. नमक की बिक्री कीमत कम रहने से उत्पादकों की कमाई इतनी नहीं हो रही है कि वे उत्पादन लागत निकाल सकें. छोटे नमक उत्पादकों के लिए यह स्थिति ज्यादा मुश्किल हो गई है, क्योंकि उनके पास नुकसान सहने या बिना बिके नमक को लंबे समय तक रखने की क्षमता कम है.
बारिश न होने से उत्पादन बढ़ा
Small-Scale Salt Manufacturers’ Federation के सचिव वी. सेंथिल के मुताबिक, खरीदारों की संख्या तेजी से घटने और अतिरिक्त खर्च बढ़ने के कारण करीब 30 फीसदी छोटे नमक उत्पादकों ने अगस्त के मध्य से उत्पादन बंद कर दिया है. उन्होंने कहा कि अगर कीमतों में सुधार नहीं हुआ तो छोटे उत्पादकों के सामने आर्थिक संकट और गहरा सकता है. छोटे नमक उत्पादक पी. सुंदरमूर्ति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक कारणों से नमक उत्पादन प्रभावित हुआ था, लेकिन इस साल बारिश नहीं होने से उत्पादन सामान्य से काफी ज्यादा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर नमक और कम कीमत पर बिकता रहा तो उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
थूथुकुडी समेत दूसरे इलाकों से आसानी से मिल रहा नमक
सेंथिल के मुताबिक, इस साल उत्पादन ज्यादा होने के कारण खरीदारों को थूथुकुडी और दूसरे इलाकों से आसानी से नमक मिल रहा है. इससे वेदारण्यम के नमक उत्पादकों पर दबाव बढ़ा है. वेदारण्यम क्षेत्र के अगस्थियाम्पल्ली, कोडियाक्काडु और कडिनेलवायल में करीब 3,000 एकड़ में लगभग 800 छोटे उत्पादक नमक बनाते हैं. इस उद्योग से क्षेत्र में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है. कुछ नमक पैन में उत्पादन बंद होने के बावजूद मजदूरों के काम पर खास असर नहीं पड़ा है, क्योंकि उत्पादन अभी भी ज्यादा है और वे दूसरे नमक पैन में काम कर रहे हैं. मौसम अनुकूल रहने के कारण कई जगहों पर उत्पादन अब भी जारी हैय