चीनी के भाव में फिर गिरावट, कमजोर मांग से खरीदार गायब.. जानें आपके शहर में क्या है रेट
चीनी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है. कमजोर मांग के चलते थोक और खुदरा भाव में कमी आई है. सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए शुल्क-मुक्त चीनी आयात, बिक्री कोटा और स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए हैं. सितंबर में 13 लाख टन चीनी बिक्री का कोटा जारी किया गया है.
चीनी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है. बुधवार को कमजोर मांग के चलते थोक और खुदरा दोनों बाजारों में चीनी के भाव और नीचे आ गए. मिलों को 4,400 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा के भाव पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं. कारोबारियों का कहना है कि मांग कमजोर रही तो गुरुवार को भी चीनी के दाम गिर सकते हैं. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के प्राइस मॉनिटरिंग डिविजन के आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो रह गया है. हालांकि, अंडमान जैसे कुछ इलाकों में चीनी अभी भी 75 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी के थोक भाव में बुधवार को 100-200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई. मुंबई में चीनी का भाव सबसे कम 5,200 रुपये प्रति क्विंटल रहा. इसके बाद हैदराबाद में भाव 5,300 रुपये प्रति क्विंटल रहा. वहीं, चेन्नई में चीनी सबसे महंगी 5,900 रुपये प्रति क्विंटल बिकी. इस बीच, चीनी की कीमतों पर नजर रखने के लिए खाद्य मंत्रालय ने सभी चीनी मिलों से 20 से 25 अगस्त के बीच बेची गई चीनी का ब्योरा मांगा है. मिलों को 3 सितंबर यानी गुरुवार तक बताना होगा कि उन्होंने कितनी चीनी बेची और किस भाव पर बेची. दरअसल, नई पखवाड़ेवार बिक्री व्यवस्था के तहत मिलों पर दबाव बढ़ गया है. उन्हें खाद्य मंत्रालय की ओर से तय कोटे की 40 फीसदी चीनी पहले सप्ताह में ही बेचनी है. ऐसे में कम मांग के बावजूद मिलों को चीनी बेचनी पड़ सकती है.
शुल्क-मुक्त चीनी आयात शुरू होने के बाद 21 अगस्त से दाम लगातार घटे
चीनी की कीमतों में 21 अगस्त से लगातार गिरावट आ रही है. इसी दिन केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी. अगस्त के तीसरे हफ्ते में चीनी का खुदरा भाव 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया था. कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने चीनी मिलों के मासिक बिक्री कोटे को पखवाड़े के आधार पर तय कर दिया है. अब मिलों को तय कोटे की 40 फीसदी चीनी पहले सप्ताह में और बाकी 60 फीसदी दूसरे सप्ताह में बेचनी होगी.
जमाखोरी रोकने के लिए कारोबारियों के ठिकानों पर जांच
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं. अलग-अलग राज्यों में चीनी कारोबारियों के ठिकानों पर जांच की जा रही है, ताकि जमाखोरी पर रोक लगाई जा सके. इसके अलावा, चीनी मिलों के पास मौजूद स्टॉक की भी निगरानी की जा रही है. सरकार ने थोक में चीनी खरीदने वालों के लिए स्टॉक की सीमा घटा दी है. हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी खरीदने वाले बड़े खरीदार अब अपनी 15 दिन की जरूरत के बराबर ही स्टॉक रख सकेंगे. कारोबारियों के लिए स्टॉक की सीमा 200 टन तय की गई है. हालांकि, कोलकाता और पूर्वोत्तर राज्यों के कारोबारियों को इससे बाहर रखा गया है.
सरकार की कोशिशों से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद
सरकार ने सितंबर के पहले पखवाड़े में बिक्री के लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया है. इसके अलावा, निर्यात के लिए रखी गई करीब 3-3.5 लाख टन चीनी को घरेलू बाजार में बेचने के लिए भेजा जा रहा है. इससे बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है. वहीं, बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के भाव में तेजी रही. न्यूयॉर्क के इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज में चीनी का भाव बढ़कर 18.26 सेंट प्रति पाउंड, यानी करीब 402.5 डॉलर प्रति टन पहुंच गया. स्पॉट कीमत 18.38 सेंट प्रति पाउंड (405 डॉलर प्रति टन) रही. लंदन में सफेद चीनी का भाव 528 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया.