Sugar Price Fall: चीनी की कीमतों से मिली राहत! मिल गेट भाव 25 फीसदी गिरा.. खुदरा दाम भी घटे

सरकार के कदमों से चीनी की कीमतों में अब नरमी आने लगी है. खुदरा भाव 65.07 से घटकर 64.33 रुपये किलो हो गया है, जबकि मिल गेट कीमतों में एक हफ्ते में 25 फीसदी तक गिरावट आई है. ड्यूटी-फ्री आयात, जमाखोरी पर कार्रवाई और स्टॉक लिमिट घटाने से सप्लाई बढ़ी है. सितंबर में रिफाइनरियों से 3 लाख टन चीनी आने की उम्मीद है.

नोएडा | Updated On: 28 Aug, 2026 | 09:56 AM

सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर अब चीनी की कीमतों पर दिखने लगा है. खुदरा बाजार में चीनी के दाम में हल्की गिरावट आई है, जबकि मिल गेट कीमतों में पिछले एक हफ्ते में करीब 25 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. इससे पहले मिल गेट कीमत 6,700 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गई थी. उपभोक्ता मामलों के विभाग की प्राइस मॉनिटरिंग डिविजन के आंकड़ों के मुताबिक, चीनी का खुदरा भाव 65.07 रुपये से घटकर 64.33 रुपये प्रति किलो हो गया है. हालांकि, ज्यादातर शहरों में अभी भी चीनी 60 से 64 रुपये किलो के बीच बिक रही है. मुंबई में भाव करीब 60 रुपये और चेन्नई में 64 रुपये प्रति किलो है.

थोक बाजार में चीनी की कीमतों में 50 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है. कोलकाता और हैदराबाद में कीमतों में सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई. वहीं, चीनी मिलों की टेंडर दरें घटकर करीब 4,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गई हैं. सोनहिरा शुगर्स ने 1,400 टन चीनी के लिए 4,900 रुपये प्रति क्विंटल की दर पेश की है. वहीं, टेंडर के जरिए चीनी मिलों से खरीदी गई रीसेल चीनी की कीमत  भी घटकर S-30 ग्रेड के लिए  5,040-5,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है.

चीनी की कीमतों में नरमी, त्योहारों से पहले राहत की उम्मीद

जेके इंडिया ईएग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर उप्पल शाह ने अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन ने कहा कि चीनी की कीमतों में काफी नरमी आई है. कई जगहों पर एक्स-मिल भाव 5,200-5,400 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आ गया है. इसका असर जल्द ही खुदरा बाजार में भी दिख सकता है. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि चीनी की कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी का दौर अब पीछे छूट गया है और त्योहारों में उचित कीमत पर पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहेगी.

दो महीने में चीनी के दाम में उछाल

शाह के मुताबिक, पिछले दो महीनों में सप्लाई की कमी और मौसम से जुड़ी चिंताओं के कारण चीनी के दाम तेजी से बढ़े थे. कई जगहों पर एक्स-मिल कीमत 6,700-7,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थी. त्योहारों का सीजन करीब होने के कारण यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली थी. उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थिति को देखते हुए कई कदम उठाए. सरकार ने थोक खरीदारों और डीलरों के पास रुके स्टॉक को बाजार में लाने के लिए उपाय किए. इसके अलावा देश में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की भी अनुमति दी गई है.

जमाखोरी पर सख्ती और स्टॉक लिमिट घटाने से बढ़ी सप्लाई

जेके इंडिया ईएग्रीटेक के सीएमई के मुताबिक, सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का असर अब बाजार में दिखने लगा है. छापेमारी और स्टॉक की निगरानी से कुछ चीनी बाजार में वापस आई है. रिफाइनरियों से सितंबर में करीब 3 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में आने की उम्मीद है. इससे त्योहारों से पहले चीनी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. चीनी के दाम में हाल की गिरावट की बड़ी वजह सरकार का 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी देना है. इसके अलावा सरकार ने अलग-अलग राज्यों में कारोबारियों के ठिकानों पर जांच की है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके. चीनी मिलों के भौतिक स्टॉक की निगरानी बढ़ाई गई है. वहीं, महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी खरीदने वाले थोक खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट घटाकर 15 दिन की जरूरत के बराबर कर दी गई है.

नोट: मिल गेट कीमत वह शुरुआती कीमत होती है, जिस पर चीनी मिलें अपने कारखाने से सीधे थोक व्यापारियों, वितरकों या बड़े खरीदारों को चीनी बेचती हैं. इस कीमत में आमतौर पर ट्रांसपोर्ट, लोडिंग, स्थानीय टैक्स और गोदाम जैसे अतिरिक्त खर्च शामिल नहीं होते हैं. 

 

Published: 28 Aug, 2026 | 09:48 AM

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