MP में MSP से कम रेट पर गेहूं बेचने को मजबूर हुए किसान, इस वजह से नहीं मिल रहा भाव
किसानों के मुताबिक खरीद की रफ्तार भी काफी धीमी है. मजदूरों की कमी और तौल क्षमता घटने से परेशानी बढ़ रही है. जहां रोज करीब 50 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की तौल होनी चाहिए, वहां फिलहाल केवल लगभग 30 ट्रॉलियों की ही तौल हो पा रही है. किसानों का कहना है कि मजदूरों की कमी और भंडारण प्रबंधन की खराब व्यवस्था इसकी बड़ी वजह है.
Wheat Procurement: मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है. गेहूं खरीद केंद्रों पर बेहतर व्यवस्था नहीं होने के चलते किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम रेट पर मार्केट में उपज बेच रहे हैं. MP सरकार ने इस साल के लिए गेहूं का MSP 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन किसान करीब 2,400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर फसल बेचने को मजबूर हैं. ऐसे में उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है.
किसानों का कहना है कि शादी-ब्याह, घर खर्च, पैसों की जरूरत और बारिश-ओलावृष्टि से फसल खराब होने के डर के कारण वे जल्दबाजी में उपज की बिक्री कर रहे हैं. इससे उन्हें करीब 15 फीसदी तक नुकसान उठाना पड़ रहा है. नीमच के किसान देवीलाल पाटीदार ने ‘द फ्री प्रेस जर्नल’ को कहा कि बड़े किसानों को स्लॉट बुकिंग में सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. उनका कहना है कि स्लॉट मिलने के बाद भी तय 5 से 7 दिनों के भीतर गेहूं की तौल नहीं हो पा रही है. इससे बिलिंग की तारीख निकल रही है, किसानों का नुकसान बढ़ रहा है और उनके बीच नाराजगी भी बढ़ती जा रही है.
करीब 19.04 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया
इस सीजन में MSP पर गेहूं बेचने के लिए करीब 19.04 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन अब तक केवल लगभग 11 लाख किसान ही अपनी फसल बेच पाए हैं. हालांकि, राज्य सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है, जिसमें से शनिवार तक करीब 85 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है. किसानों का कहना है कि इस बार मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद व्यवस्था पिछले कई सालों की सबसे खराब स्थिति में पहुंच गई है. पहले मार्च से ही खरीद प्रक्रिया ठीक तरीके से शुरू हो जाती थी और किसानों को भरोसा रहता था कि उनकी पूरी फसल MSP पर बिक जाएगी. लेकिन इस साल खरीद में देरी, ठेकेदार और बाजार में गिरते दामों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. इससे किसानों का सरकारी खरीद व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर पड़ने लगा है.
तौल क्षमता घटने से परेशानी बढ़ रही
किसानों के मुताबिक खरीद की रफ्तार भी काफी धीमी है. मजदूरों की कमी और तौल क्षमता घटने से परेशानी बढ़ रही है. जहां रोज करीब 50 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की तौल होनी चाहिए, वहां फिलहाल केवल लगभग 30 ट्रॉलियों की ही तौल हो पा रही है. किसानों का कहना है कि मजदूरों की कमी और भंडारण प्रबंधन की खराब व्यवस्था इसकी बड़ी वजह है. इस अव्यवस्था का असर यह हो रहा है कि जो काम एक दिन में पूरा होना चाहिए, वह अब कई दिनों तक खिंच रहा है. किसानों को तेज गर्मी के बीच अपनी गेहूं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़क किनारे खड़ी रखनी पड़ रही हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
365 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान
किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि खरीद आंकड़ों के अनुसार इस साल मध्य प्रदेश में करीब 365 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन होने का अनुमान है. इनमें से किसानों ने लगभग 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं MSP खरीद के लिए पंजीकृत कराया. लेकिन राज्य सरकार ने खरीद का लक्ष्य सिर्फ 100 लाख मीट्रिक टन तय किया है. इससे किसानों के बीच भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति बन गई है.