आलू किसानों को राहत! भंडारण पर एक रुपये किलो मदद.. भाव गिरने पर मिलेगा भावांतर का लाभ

Potato Farmers UP: उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों को राहत देने के लिए भंडारण शुल्क में प्रति किलोग्राम 1 रुपये की सहायता देने का फैसला किया है. इसके अलावा बाजार भाव गिरने पर डेढ़ रुपये प्रति किलोग्राम भावांतर भुगतान मिलेगा. सरकार नए राज्यों में यूपी के आलू के लिए बाजार तलाशने पर भी जोर दे रही है.

नोएडा | Updated On: 13 Aug, 2026 | 11:35 AM

Potato Storage Subsidy UP: आलू की फसल तैयार होने के बाद किसानों की चिंता खत्म नहीं होती. कभी भंडारण का बढ़ता खर्च परेशान करता है तो कभी मंडी में भाव गिरने से मेहनत पर पानी फिरने का डर रहता है. अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों की इन्हीं दोनों बड़ी चिंताओं को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने 1,100 करोड़ रुपये की राहत का ऐलान किया है, जिसके तहत आलू के भंडारण पर प्रति किलो 1 रुपये की मदद मिलेगी और बाजार भाव गिरने पर 1.50 रुपये प्रति किलो का भावांतर भुगतान भी किया जाएगा.

भंडारण शुल्क में मिलेगी प्रति किलो 1 रुपये की राहत

यूपी के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के मुताबिक, आलू किसानों को भंडारण शुल्क में प्रति किलोग्राम 1 रुपये की राहत दी जाएगी. खास बात यह है कि, यह राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी. इसके लिए योगी सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है. इससे किसानों को कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने के दौरान आने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी. खासकर उन किसानों को इसका फायदा मिल सकता है, जो बाजार में सही भाव मिलने तक अपनी फसल को सुरक्षित रखना चाहते हैं.

बाजार भाव गिरा तो मिलेगा भावांतर भुगतान

आलू किसानों की दूसरी बड़ी परेशानी बाजार में कीमतों का अचानक गिर जाना है. कई बार किसान जिस भाव की उम्मीद करता है, मंडी में उससे काफी कम कीमत मिलती है. इससे खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है. इसी परेशानी से निपटने के लिए सरकार ने भामाशाह भाव स्थिरता कोष के तहत भावांतर भुगतान की व्यवस्था की है. इसके तहत किसानों को 1.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान किया जाएगा. इसके लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इसका मकसद बाजार भाव में गिरावट आने पर किसानों को कुछ आर्थिक सहारा देना है, ताकि अचानक कीमत गिरने से उनकी पूरी कमाई प्रभावित न हो.

यूपी के आलू के लिए नए बाजार तलाश रही सरकार

सरकार का फोकस सिर्फ आर्थिक मदद देने तक सीमित नहीं है. आलू किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं. इसी दिशा में 30 जनवरी 2026 को भुवनेश्वर में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया गया. इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के आलू की ओडिशा में बिक्री और सप्लाई बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई. सरकार का प्रयास है कि किसानों को केवल स्थानीय मंडियों पर निर्भर न रहना पड़े और उनकी उपज के लिए दूसरे राज्यों में भी बाजार उपलब्ध हों.

देश के दूसरे राज्यों में भी बाजार की तलाश

आलू की बिक्री के लिए नए खरीदार और बाजार तलाशने का काम लगातार जारी है. अपर मुख्य सचिव और उद्यान निदेशक समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग राज्यों में जाकर संभावित बाजारों की जानकारी जुटा रहे हैं. इससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए ज्यादा विकल्प मिलने की उम्मीद है. अगर दूसरे राज्यों में मांग बढ़ती है, तो इसका फायदा आलू की कीमतों और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है.

नौ साल से किसानों पर फोकस का दावा

उद्यान मंत्री ने बताया कि, पिछले नौ साल में आलू किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार कदम उठाए गए हैं. सरकार का कहना है कि, कोशिश उत्पादन से लेकर भंडारण और बिक्री तक पूरी व्यवस्था को किसानों के लिए बेहतर बनाने की है. कुल मिलाकर, भंडारण शुल्क में राहत और भावांतर भुगतान से किसानों की लागत और बाजार भाव से जुड़ी चिंता कम करने की कोशिश की गई है. वहीं नए राज्यों में बाजार तलाशने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं.

Published: 13 Aug, 2026 | 11:24 AM

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