योगी सरकार की बड़ी पहल, UP में बनेगा श्रीअन्न कला बोर्ड.. कारीगरों के हुनर को मिलेगा नया बाजार

UP Government Scheme: उत्तर प्रदेश में पीढ़ियों से अनाज भूनने का काम करने वाले भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के कारीगरों के लिए ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई है. इसका मकसद पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक, ट्रेनिंग, खाद्य प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ना है. फिलहाल बोर्ड का गठन नहीं हुआ है.

नोएडा | Published: 20 Aug, 2026 | 09:22 AM

Shri Anna Kala Board: उत्तर प्रदेश में पीढ़ियों से अनाज भूनने का काम कर रहे भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के पारंपरिक कारीगरों के लिए नई पहल की तैयारी हो रही है. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक में इन कारीगरों के लिए ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई है. अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो पुराने पारंपरिक काम को आधुनिक तकनीक, नए उत्पाद और बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि, अभी बोर्ड का गठन नहीं हुआ है. फिलहाल मामला प्रस्ताव और विचार-विमर्श के स्तर पर है. इसलिए इसे अभी लागू योजना या पक्की सरकारी मदद नहीं माना जा सकता.

पुराने हुनर को मिलेगा नया बाजार

भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के लोग लंबे समय से अलग-अलग तरह के अनाज और खाद्य पदार्थ भूनने का काम करते आए हैं. यह काम उनके परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहा है. बदलते समय के साथ इस पारंपरिक काम के सामने बाजार और कमाई से जुड़ी कई चुनौतियां भी आई हैं. प्रस्तावित बोर्ड का मकसद इसी पुराने हुनर को नए तरीके से आगे बढ़ाना है. इसके तहत कारीगरों को आधुनिक मशीनों और खाद्य प्रसंस्करण की जानकारी देने पर काम किया जा सकता है. इससे वे सिर्फ पारंपरिक तरीके से अनाज भूनने तक सीमित न रहकर नए उत्पाद तैयार कर सकेंगे.

प्रशिक्षण, लोन और सब्सिडी पर हो सकता है काम

प्रस्ताव के मुताबिक कारीगरों को अपने काम को बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग, आसान कर्ज और सब्सिडी जैसी मदद देने की दिशा में काम किया जा सकता है. साथ ही उनके बनाए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है. इसका फायदा यह हो सकता है कि कारीगर अपने पुराने काम को छोटे कारोबार में बदल सकें. वे पैकिंग, ब्रांडिंग और बाजार की मांग के हिसाब से नए उत्पाद तैयार कर सकेंगे. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि कितना कर्ज मिलेगा, कितनी सब्सिडी दी जाएगी या किस तरह की ट्रेनिंग होगी.

ODOP से जुड़ सकती है पहल

‘श्री अन्न कला बोर्ड’ के प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ यानी ODOP जैसी पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पारंपरिक उत्पादों को पहचान दिलाने और बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है. इससे छोटे कारीगरों को अपने उत्पाद सिर्फ आसपास के इलाके में बेचने के बजाय दूसरे शहरों और बाजारों तक पहुंचाने का मौका मिल सकता है. हालांकि अभी यह तय नहीं है कि बोर्ड के तहत कौन-कौन से उत्पाद और जिले शामिल किए जाएंगे.

विश्वकर्मा समाज को लेकर भी चर्चा

बैठक में विश्वकर्मा समाज से जुड़े एक अन्य प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. विश्वकर्मा कल्याण आयोग या कौशल विकास बोर्ड के गठन को लेकर मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से जानकारी जुटाने का फैसला लिया गया है. आयोग के सचिव को इन राज्यों में चल रही ऐसी व्यवस्था से जुड़ी जानकारी जुटाकर आयोग के सामने रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसका मकसद दूसरे राज्यों के मॉडल को समझना और उत्तर प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था की संभावनाएं देखना है.

योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने पर जोर

बैठक में पिछड़े वर्गों के लिए चल रही सरकारी योजनाओं का फायदा सही लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया. आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि आयोग में आने वाली शिकायतों को जल्द निपटाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया. फिलहाल ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ सिर्फ प्रस्ताव के स्तर पर है.

इसलिए अभी कारीगरों के लिए किसी तय कर्ज, सब्सिडी या प्रशिक्षण की घोषणा नहीं हुई है. अगर बोर्ड बनता है तो पारंपरिक हुनर को आधुनिक कारोबार से जोड़ने और इन कारीगरों के लिए कमाई के नए रास्ते खोलने की उम्मीद बढ़ सकती है.

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