ना सुर्खियां, ना सिफारिश.. मिट्टी की मेहनत ने पहुंचाया राष्ट्रपति भवन तक! जानें पद्मश्री पाने वाले 4 किसानों की कहानी

Padma Awards 2026: इस बार पद्म पुरस्कारों की लिस्ट ने सबका ध्यान खींच लिया है. वजह साफ है, सम्मान उन लोगों को मिला है जो खेतों की मिट्टी में हाथ गंदे करके, सालों से देश का पेट भर रहे थे. बिना कैमरे, बिना शोर, बस मेहनत और जुनून के दम पर काम करने वाले किसान और वैज्ञानिक अब राष्ट्रीय मंच पर चमक रहे हैं. गणतंत्र दिवस से पहले आई यह सूची हर भारतीय को गर्व महसूस कराने वाली है. ऐसे में आइए जानते हैं उन 4 किसानों के बारे में, जिनकी कहानी हर किसी को प्रेरणा देगी.

नोएडा | Updated On: 26 Jan, 2026 | 04:12 PM
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गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों में इस बार कृषि क्षेत्र का दबदबा साफ नजर आया. सूची में 5 जाने-माने कृषि वैज्ञानिकों और 4 प्रगतिशील किसानों को शामिल किया गया, जो भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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गृह मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2026 में कुल 131 पद्म पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री शामिल हैं. इस सूची में कई ऐसे नाम भी हैं जिन्हें मरणोपरांत सम्मान देकर उनके योगदान को याद किया गया है.

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जोगेश देउरी: असम के किसान जोगेश देउरी को मूंगा रेशम को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए पद्म सम्मान मिला. जीआई टैग प्राप्त यह अनोखा रेशम अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक, मजबूती और टिकाऊपन के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खास पहचान बना चुका है.

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श्रीरंग देवाबा लाड: महाराष्ट्र के प्रगतिशील किसान श्रीरंग देवाबा लाड ने ‘दादा लाड कॉटन टेक्नोलॉजी’ विकसित कर कपास की पैदावार को तीन गुना तक बढ़ा दिया. ICAR द्वारा सराही गई इस तकनीक से हजारों किसान आर्थिक रूप से मजबूत और कर्ज मुक्त हो रहे हैं.

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रामा रेड्डी मामिदी: तेलंगाना के रामा रेड्डी मामिदी को पशुपालन क्षेत्र में अहम योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म सम्मान मिला. उन्होंने 'महिला डेयरी सहकारी समितियों' के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता दी. इसके अलावा उन्होंने सहकारी कानूनों में सुधार कर किसानों के हक को कानूनी मजबूती दी.

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रघुपत सिंह: उत्तर प्रदेश के किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्म सम्मान दिया गया है. एक दलित किसान होने के बावजूद उन्होंने बिना किसी सरकारी सहायता के 50 वर्षों में 100 से अधिक फसलों की किस्में विकसित कीं और 30 से ज्यादा विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित किया.

Published: 26 Jan, 2026 | 03:28 PM

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