चमेली के फूलों की खेती में है मुनाफा ही मुनाफा!
चमेली या जिसे कई लोग जैस्मीन के तौर पर भी जानते हैं, एक ऐसी खूशबूदार फूल है जो देश के कई हिस्सों में व्यावसायिक फसल के तौर पर उगाया जाता है. तमिलनाडु और कर्नाटक इसके प्रमुख राज्य हैं.

चमेली का फूल अर्थव्यवस्था में बड़ा महत्व रखता है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल 20 करोड़ से ज्यादा की कीमत के चमेली के फूल उगाए जाते हैं और बेचे जाते हैं. साथ ही साथ पड़ोसी देशों को भी निर्यात किए जाते हैं.

चमेली के फूलों का प्रयोग कई तरह की फूल मालाओं, जिसे दक्षिण भारत में वेणी कहा जाता है, को बनाने में प्रयोग किया जाता है. इसके अलावा इनका उपयोग माला, सजावट जैसे कामों में भी किया जाता है.

चमेली के फूल का तेल काफी प्रयोग किया जाता है. इसका उपयोग इत्र, कोलोन और यहां तक कि कुछ पेय पदार्थों को स्वादिष्ट बनाने के लिए भी किया जाता है. इसके अलावा इसके कई औषधीय उपयोग भी हैं और इनकी वजह से भारत के साथ-साथ कई विकसित देशों में भी इसकी मांग बढ़ रही है.

एक स्टडी के अनुसार इन फूलों का पीक सीजन मार्च से जून तक होता है जिसमें इनकी बिक्री 19.67 रुपये से 63.14 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है. मई में इनसे कम मुनाफा होता है. जबकि अक्टूबर से फरवरी तक इनकी बिक्री 45 रुपये से 108.62 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है. वहीं जुलाई, अगस्त, सितंबर में यह फूल 200 रुपये से 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है.

एक और स्टडी में यह बात सामने आई कि इन फूलों की खेती करने वाले छोटे किसानों की शुद्ध आय 390,854 रुपये थी. जबकि बड़े किसानों की शुद्ध आय 347,001 रुपये थी.

विशेषज्ञों की मानें तो चमेली की खेती करीब हर तरह की मिट्टी में की जा सकती है. हालांकि, अच्छी तरह से सूखी और रेतीली दोमट मिट्टी में इसका उत्पादन बेहतर होता है. चमेली की खेती के लिए जमीन का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए. चमेली की खेती में खाद का भी इस्तेमाल करना चाहिए.
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