Tip Of The Day: अरहर से होगी तगड़ी कमाई! जान लें बुवाई का सही समय, कम लागत में मिलेगा बंपर उत्पादन
Arhar Farming June: खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों की नजर उन फसलों पर टिक जाती है, जो कम लागत में अच्छा मुनाफा दे सकें. अरहर ऐसी ही एक नकदी फसल है, जिसकी मांग सालभर बनी रहती है और बाजार में इसके अच्छे दाम भी मिलते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर किसान सही समय पर बुवाई करें और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं, तो अरहर की खेती से शानदार उत्पादन हासिल किया जा सकता है. जून के आखिरी सप्ताह से 15 जुलाई तक का समय इसकी बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है.

अरहर की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से 15 जुलाई तक कर लेनी चाहिए. इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी और अनुकूल तापमान होने से बीजों का अंकुरण और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है.

बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई कर उसे कुछ दिनों तक धूप में खुला छोड़ दें. इससे मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट, फफूंद, अंडे और लार्वा नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल रोगों से सुरक्षित रहती है.

अधिक पैदावार के लिए पूसा और भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर द्वारा विकसित उन्नत किस्मों के बीजों का उपयोग करें. अच्छी गुणवत्ता वाले बीज फसल की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

अरहर की फसल में शुरुआत में कम मात्रा में नाइट्रोजन, जबकि जड़ों के विकास के लिए फास्फोरस और फसल की गुणवत्ता के लिए पोटाश का संतुलित उपयोग करना चाहिए. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और उत्पादन बेहतर मिलता है.

बुवाई के बाद समय-समय पर निराई-गुड़ाई और आवश्यकता अनुसार सिंचाई करते रहें. खेत को खरपतवार मुक्त रखने से पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है और उनकी बढ़वार अच्छी होती है.

फूल और फलियां बनने के दौरान कीटों का हमला बढ़ सकता है. ऐसे में रासायनिक कीटनाशकों की जगह बायो-पेस्टिसाइड और बायो-इन्सेक्टिसाइड का इस्तेमाल करें, जिससे फसल की गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में बेहतर कीमत मिलती है.