PM Kisan की राशि जारी होने से पहले सुर्खियों में तारकेश्वर, आखिर 23वीं किस्त के लिए क्यों चुनी गई यही जगह?

PM Kisan 23rd Installment: पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से आज एक बड़ा राजनीतिक और विकास से जुड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी की 20 जून को यहां से पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे, जिससे देशभर के करोड़ों किसानों के खातों में सीधे 2000 रुपये पहुंचेंगे. धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और राजनीतिक संदेश, तीनों कारणों से यह दौरा खास माना जा रहा है. पश्चिम बंगाल का तारकेश्वर शहर इस बार राष्ट्रीय सुर्खियों में है, जहां विकास योजनाओं के साथ-साथ बड़ा जनसंपर्क कार्यक्रम भी देखने को मिलेगा.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 20 Jun, 2026 | 01:10 PM
1 / 7प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे. इस दौरान देशभर के 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधे 2000-2000 रुपये भेजे जाएंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी तरह के बिचौलियों की जरूरत नहीं पड़ेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे. इस दौरान देशभर के 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधे 2000-2000 रुपये भेजे जाएंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी तरह के बिचौलियों की जरूरत नहीं पड़ेगी.

2 / 7यह पूरा कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर में आयोजित होगा, जो हुगली जिले के चंदननगर सब-डिवीजन में स्थित है. यह स्थान कोलकाता से लगभग 58 किलोमीटर दूर है और राज्य में इसे एक प्रमुख धार्मिक शहर के रूप में पहचाना जाता है.

यह पूरा कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर में आयोजित होगा, जो हुगली जिले के चंदननगर सब-डिवीजन में स्थित है. यह स्थान कोलकाता से लगभग 58 किलोमीटर दूर है और राज्य में इसे एक प्रमुख धार्मिक शहर के रूप में पहचाना जाता है.

3 / 7तारकेश्वर का प्रसिद्ध शिव मंदिर इस क्षेत्र की सबसे बड़ी पहचान है, जिसे 18वीं शताब्दी में राजा भरमल्ला ने बनवाया था. यह मंदिर अपनी पारंपरिक बंगाली स्थापत्य शैली और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.

तारकेश्वर का प्रसिद्ध शिव मंदिर इस क्षेत्र की सबसे बड़ी पहचान है, जिसे 18वीं शताब्दी में राजा भरमल्ला ने बनवाया था. यह मंदिर अपनी पारंपरिक बंगाली स्थापत्य शैली और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.

4 / 7कई जानकारों के अनुसार इस कार्यक्रम के लिए तारकेश्वर को चुनने के पीछे राजनीतिक रणनीति भी मानी जा रही है. माना जाता है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पहले से ही राज्य में हिंदू आस्था और विकास योजनाओं को जोड़कर एक खास राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. ऐसे में तारकेश्वर जैसे धार्मिक महत्व वाले स्थान से पीएम किसान योजना का कार्यक्रम होना भी उसी संदेश को और मजबूत करता है.

कई जानकारों के अनुसार इस कार्यक्रम के लिए तारकेश्वर को चुनने के पीछे राजनीतिक रणनीति भी मानी जा रही है. माना जाता है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पहले से ही राज्य में हिंदू आस्था और विकास योजनाओं को जोड़कर एक खास राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. ऐसे में तारकेश्वर जैसे धार्मिक महत्व वाले स्थान से पीएम किसान योजना का कार्यक्रम होना भी उसी संदेश को और मजबूत करता है.

5 / 7इस दिन का ऐतिहासिक महत्व भी बताया जा रहा है क्योंकि 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा ने एक अहम प्रस्ताव पारित किया था, जिसके तहत पश्चिम बंगाल के स्वतंत्र भारत में शामिल होने का निर्णय लिया गया था. इसलिए इस तारीख को राजनीतिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है.

इस दिन का ऐतिहासिक महत्व भी बताया जा रहा है क्योंकि 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा ने एक अहम प्रस्ताव पारित किया था, जिसके तहत पश्चिम बंगाल के स्वतंत्र भारत में शामिल होने का निर्णय लिया गया था. इसलिए इस तारीख को राजनीतिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है.

6 / 7प्रधानमंत्री इस दौरे के दौरान तारकेश्वर शिव मंदिर में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे और गर्भगृह में दर्शन भी करेंगे. इसके बाद वह एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें विकास, किसान योजनाओं और राज्य की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.

प्रधानमंत्री इस दौरे के दौरान तारकेश्वर शिव मंदिर में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे और गर्भगृह में दर्शन भी करेंगे. इसके बाद वह एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें विकास, किसान योजनाओं और राज्य की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.

7 / 7कार्यक्रम से पहले मंदिर परिसर का रंग-रोगन किया जा रहा है और इसे भगवा रंग से सजाया जा रहा है. इसे धार्मिक आस्था और राजनीतिक संदेश दोनों से जोड़ा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि यह कार्यक्रम राज्य में हाल के राजनीतिक बदलावों और बड़ी चुनावी जीत के बाद आयोजित हो रहा है.

कार्यक्रम से पहले मंदिर परिसर का रंग-रोगन किया जा रहा है और इसे भगवा रंग से सजाया जा रहा है. इसे धार्मिक आस्था और राजनीतिक संदेश दोनों से जोड़ा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि यह कार्यक्रम राज्य में हाल के राजनीतिक बदलावों और बड़ी चुनावी जीत के बाद आयोजित हो रहा है.

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