जीएम बीज के बिना दूसरे देश बेहतर दलहन पैदावार हासिल कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?

GM Seeds : सरकार दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है और आईसीएआर को जीएम बीजों की उम्मीद लगाए रहने की बजाय दूसरे देशों से सबक लेने को कहा है. कहा गया है कि जीएम बीजों के बिना दूसरे देश ज्यादा उत्पादन हासिल कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं.

नोएडा | Published: 17 Jul, 2026 | 07:44 PM

जीएम फसलों को लेकर जारी लंबे समय से विवाद के बीच कृषि मंत्रालय ने भी इस पर अपना रुख बदलने के संकेत दे दिए हैं. इसके पहले किसान संगठनों से व्यापक विरोध का सामना सरकार को करना पड़ा है. जबकि, पर्यावरण कार्यकर्ता भी कई मोर्चों पर जीएम फसलों को हानिकारक बताते आए हैं. अब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से कहा है कि क्या हम जीएम फसलों के बिना दूसरे देशों की तरह दलहन पैदावार नहीं बड़ा सकते हैं. उन्होंने कहा कि जब दूसरे देश ऐसा कर सकते हैं तो हम भी कर सकते हैं.

केंद्रीय मंत्री ने जीएम बीजों के बिना उत्पादन बढ़ाने को कहा

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्थापना दिवस के मौके पर कहा है कि दलहन और तिलहनों की उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास तेज किए जाएं. उन्होंने कहा कि दूसरे देश जीएम फसलों के बिना दलहन पैदावार कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं कर सकते. मंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में भारत अब भी आयात पर काफी निर्भर है. उन्होंने दोहराया कि यदि जीन संवर्धित (जीएम) बीजों के बिना भी अन्य देश दालों की बेहतर पैदावार कर सकते हैं, तो भारत भी कर सकता है.

जीएम फसलों पर सरकार का क्या रुख रहा है

जीएम फसलों पर केंद्र सरकार का सतर्क और विज्ञान आधारित रुख रहा है. सरकार का कहना है कि जिन जीएम फसलों की सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव और खाद्य उपयोगिता वैज्ञानिक परीक्षणों तथा नियामक मंजूरी के बाद सुरक्षित पाई जाएगी, उन्हें नियमानुसार अनुमति दी जा सकती है. फिलहाल देश में केवल बीटी कपास की व्यावसायिक खेती को मंजूरी है, जबकि अन्य जीएम फसलों पर अनुसंधान, सीमित फील्ड ट्रायल और समीक्षा जारी है. इसमें मक्का, सरसों आदि फसलें शामिल हैं.

जीएम बीज मूल उद्देश्य में ही फेल साबित हुए

भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने जीएम फसलों का विरोध किया और देसी बीजों के उत्पादन पर जोर देने की बात कही. उन्होंने कहा कि देश में जीएम फसल बीटी कपास का उत्पादन किया जा रहा है. इसे लागू किया गया था कि यह गुलाबी सुंडी मुक्त रहेगा और किसानों को नुकसान नहीं होगा. लेकिन, अब तक कई ऐसे शोध और रिसर्च रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं जिनमें बीटी कपास किस्म अपने मूल उद्देश्य में ही फेल हो चुकी है. उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजकर कहा है की बीटी कपास समेत जीएम फसलों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए.

जीएम बीजों पर देशभर में प्रतिबंध लगाने की मांग

भारतीय किसान संघ ने अपनी चिट्ठी में स्पष्ट मांग करते हुए कहा है कि बीटी कपास की किस्मों बीजी-1 और बीजी-2 को तत्काल प्रभाव से डी-नोटीफाई किया जाए. सभी जीएम फसलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए. इसके अलावा बीटी कपास के पक्ष में भ्रामक और गलत नैरेटिव तैयार कर देश के किसानों को गुमराह करने वालों के खिलाफ जांच कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए.

जीएम फसलों के विरोध की कई वजहें

जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों का विरोध मुख्य रूप से पर्यावरण, स्वास्थ्य और आर्थिक कारणों से किया जाता रहा है. जीएम सरसों के उत्पादन का मामला कई साल से सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन चल रहा है. विरोध करने वाले संगठनों का मानना है कि जीएम फसलों से जैव विविधता प्रभावित हो सकती है, कीटों और खरपतवारों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है. बीटी कपास के मामले में यह बात कई रिसर्च में सामने आने का दावा किया गया है. जीएम बीजों के चलते बड़ी बीज कंपनियों पर किसानों की निर्भरता बढ़ जाएगी और देसी, परंपरागत बीज खत्म हो जाएंगे. ये स्थितियां लंबे समय के लिए कृषि और कृषि अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा सकती हैं.

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