ITC का ‘क्रॉप डॉक्टर’ बना किसानों का नया साथी, 70 फसलों की बीमारी का देगा तुरंत इलाज

“क्रॉप डॉक्टर” AI और मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित है. किसान अपनी फसल की फोटो मोबाइल से खींचकर इस प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते हैं. इसके बाद सिस्टम तुरंत यह पहचान लेता है कि फसल में कौन-सी बीमारी है या किस तरह का कीट हमला हुआ है. बीमारी पहचानने के साथ ही किसानों को उसका इलाज भी बताया जाता है.

नई दिल्ली | Published: 14 May, 2026 | 10:15 AM

ITCMAARS Crop Doctor: भारत में खेती अब धीरे-धीरे पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर स्मार्ट और तकनीक आधारित होती जा रही है. किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती फसलों में लगने वाली बीमारियां, कीटों का हमला और मौसम का बदलता मिजाज होता है. कई बार किसान समय पर बीमारी पहचान नहीं पाते, जिससे पूरी फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे समय में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI खेती में बड़ा बदलाव ला रहा है.

ITC लिमिटेड का एग्रीटेक प्लेटफॉर्म ITCMAARS किसानों के लिए ऐसी ही नई तकनीक लेकर आया है. कंपनी का “क्रॉप डॉक्टर” नाम का AI आधारित फीचर अब किसानों को फसलों की बीमारी पहचानने और उसका सही इलाज जानने में मदद कर रहा है. यह तकनीक 70 अलग-अलग फसलों के लिए काम कर रही है और कम समय में लाखों किसान इसका इस्तेमाल कर चुके हैं.

फोटो से तुरंत पता चलती है बीमारी

ITCMAARS का “क्रॉप डॉक्टर” AI और मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित है. किसान अपनी फसल की फोटो मोबाइल से खींचकर इस प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते हैं. इसके बाद सिस्टम तुरंत यह पहचान लेता है कि फसल में कौन-सी बीमारी है या किस तरह का कीट हमला हुआ है.

बीमारी पहचानने के साथ ही किसानों को उसका इलाज भी बताया जाता है. इसमें रासायनिक, जैविक और मशीन आधारित उपायों की जानकारी दी जाती है, ताकि किसान समय रहते फसल बचा सकें. सबसे खास बात यह है कि यह सलाह किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में टेक्स्ट और ऑडियो दोनों रूप में मिलती है. इससे छोटे और कम पढ़े-लिखे किसान भी आसानी से इसका उपयोग कर पा रहे हैं.

70 फसलों के लिए काम कर रही तकनीक

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, यह AI आधारित सुविधा धान, गेहूं, मक्का, कपास, सोयाबीन, सब्जियां और बागवानी फसलों समेत 70 अलग-अलग फसलों के लिए उपलब्ध है.

कंपनी के मुताबिक अब तक किसान करीब 3 लाख बार इस फीचर का इस्तेमाल कर चुके हैं. इससे किसानों को समय रहते बीमारी का पता चल रहा है और फसल नुकसान कम करने में मदद मिल रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि फसल की बीमारी अगर शुरुआती समय में पकड़ ली जाए तो नुकसान काफी कम किया जा सकता है. यही वजह है कि “क्रॉप डॉक्टर” को खेती में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

किसानों को विशेषज्ञों से भी मिलती है मदद

ITCMAARS प्लेटफॉर्म सिर्फ बीमारी पहचानने तक सीमित नहीं है. किसान सीधे कृषि विशेषज्ञों से भी संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए टोल-फ्री नंबर और क्षेत्रीय भाषाओं में सलाह की सुविधा दी गई है. किसान अपनी समस्या बताकर खेती से जुड़ी व्यक्तिगत सलाह ले सकते हैं. इससे उन किसानों को ज्यादा फायदा मिल रहा है, जिन्हें गांव में कृषि विशेषज्ञ आसानी से उपलब्ध नहीं होते.

11 राज्यों के किसानों को मिल रहा फायदा

साल 2022 में शुरू हुआ ITCMAARS अब एक बड़े डिजिटल फार्मिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हो चुका है. कंपनी के अनुसार अब तक करीब 25 लाख किसान और 2180 किसान उत्पादक संगठन यानी FPO इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं. यह सुविधा देश के 11 राज्यों में काम कर रही है. ITC का कहना है कि आने वाले समय में इस तकनीक को देश के और ज्यादा किसानों तक पहुंचाने की योजना है.

खेती की लागत कम, उत्पादन बढ़ा

पायलट प्रोजेक्ट के आंकड़ों के मुताबिक इस तकनीक से किसानों को कई फायदे मिले हैं. उर्वरकों के इस्तेमाल में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आई है. वहीं फसल उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कंपनी का दावा है कि इससे किसानों की कुल आय में करीब 25 प्रतिशत तक सुधार देखने को मिला है.

मौसम और फसल योजना की भी सुविधा

ITCMAARS प्लेटफॉर्म पर “क्रॉप कैलेंडर” नाम का एक और AI फीचर भी उपलब्ध है. यह किसानों को मौसम और क्षेत्र के हिसाब से सही समय पर बुवाई, सिंचाई और कटाई की सलाह देता है. यह सुविधा 53 फसलों के लिए काम कर रही है और किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती की योजना बनाने में मदद करती है.

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