किसानों को कृषि मशीनें खरीदने की जरूरत नहीं, हर विधानसभा में खुलेंगी किराए पर देने वाली दुकानें

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को हर तरह की कृषि मशीनें उपलब्ध कराने के लिए हर विधानसभा में दुकानें खोलने की तैयारी की है. इससे किसानों को बेहद कम किराया देकर उन्नत कृषि यंत्र इस्तेमाल के लिए मिल सकेंगे. जबकि, स्थानीय कृषि मैन्यूफैक्चरर्स को नए तरीके का बिजनेस मॉडल मिलेगा. इससे किसान और निजी कंपनियों दोनों को लाभ होगा.

नई दिल्ली | Updated On: 23 Jul, 2026 | 12:48 PM

खेती कार्यों के लिए महंगी मशीनें किसानों को खरीदने की जरूरत नहीं पड़ने वाली है, क्योंकि सरकार हर विधानसभा में कृषि मशीनों को उपलब्ध कराने वाली दुकानें खोलने जा रही है. मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि राज्य में ऐसी 5000 से ज्यादा दुकानें वर्तमान में संचालित हैं. इन्हें हर जिले और विधानसभा में खोलने की जरूरत दिख रही है, ताकि किसानों को वित्तीय संकट के चलते पारंपरिक खेती पर न टिका रहना पड़े.

हर साल 1060 नई कृषि उपकरण दुकानें खोलने का टारगेट

मध्य प्रदेश कृषि विभाग किसानों की सहूलियत के लिये प्रत्येक विधानसभा में कम से कम एक कृषि यंत्र किराये की दुकान अनिवार्य रूप से खोलने की तैयारी चल रही है. कृषक कल्याण वर्ष में जल्दी ही इस पहल के परिणाम मिलेंगे. छोटे और सीमांत किसानों को अपने खेत तैयार करने आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करना आसान हो जायेगा. वर्तमान में ऐसे 5260 केंद्र संचालित हैं. अब हर साल 1060 कृषि यंत्र किराये की दुकानें स्थापित की जाएंगी.

विदिशा जिले में कृषि यंत्र बनाने वाली 150 यूनिट

मध्यप्रदेश अब तेजी से कृषि यंत्रों के निर्माण में आत्मनिर्भर हो रहा है. विदिशा जिले ने आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर हाई क्वालिटी वाले कृषि यंत्रों का निर्माण करना शुरू कर दिया है. खेती को आसान बनाने वाले यंत्रों में ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रालिक ट्रॉली, कल्टीवेटर, प्लाउ आदि जिले में ही बनाये जा रहे है. यहां लगभग 150 कृषि उपकरण निर्माण यूनिट हैं. छोटे किसानों को न्यूनतम सेवा शुल्क पर अत्याधुनिक कृषि यंत्रों की सेवाएं मिल रही हैं. युवा उद्यमियों को भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है.

कल्टीवेटर समेत कई उपकरण दे रहीं कंपनियां

उषा एग्रो के मानस गुप्ता ने कहा कि हम खेती में काम आने वाले यंत्र और उपकरण बनाते हैं, जैसे- लोडर, डिलोडर, कल्टीवेटर आदि. सभी उपकरण किसानों के लिए उपयोगी हैं. कब से ये काम शुरू किया? यह पूछने पर उन्होंने बताया कि इस काम की शुरुआत पिताजी ने 1993 में की थी. शुरुआत छोटे पैमाने पर हुई, फिर धीरे-धीरे इसका विस्तार किया और अब तो हमारे उपकरण विदेशों में भी पहुंच रहे हैं. हमारे सबसे बड़े ग्राहक स्थानीय किसान हैं. हमारे उत्पादों का अधिकांश हिस्सा स्थानीय बाजार में ही खप जाता है, लेकिन हम देश के दूसरे राज्यों और विदेशों में भी सप्लाई करते हैं.

सरकार से 75 फीसदी मदद मिल रही

शासन की मदद के संबंध में उन्होंने कहा कि हमें इस काम में डॉ. मोहन यादव जी की सरकार से बहुत मदद मिलती है. उत्पादन से लेकर व्यवसाय के विस्तार तक में सरकार की नीतियां हमारे लिए मददगार साबित हुई हैं. अपने उत्पादों को विदेशों तक पहुंचाने में भी हमें सरकारी सहायता मिलती है. सरकार की पहल पर मैं जी-20 सम्मेलन में भी शामिल हुआ और इसके खर्च का करीब 75 फीसदी सरकार ने वहन किया.

ट्रैक्टर उपकरण उपलब्ध कराकर सालाना 50 लाख का कारोबार

संजय उद्योग के विष्णु शर्मा ने बताया कि वह ट्रैक्टर से संबंधित उपकरण बनाते हैं जैसे कल्टीवेटर, प्लाऊ आदि. ये उपकरण किसानों के लिए उपयोगी हैं. ट्रैक्टर से किसान अपने खेतों को आसानी से तैयार करते हैं. इसमें जिन उपकरणों की जरूरत होती है वो सब बनाते हैं. उत्पादों की सप्लाई के संबंध में बताया कि मुख्य रूप से विदिशा और उसके आसपास के जिलों में होती है. दूसरे राज्यों में भी पहुंचते हैं. हमारा सालाना व्यवसाय करीब 50 लाख रुपये का है.

Published: 23 Jul, 2026 | 12:44 PM

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