CRISIL Report: ट्रैक्टर बाजार पर मंडराया अल नीनो का साया, अगले साल बिक्री रह सकती है सीमित
ट्रैक्टर बाजार पर अल नीनो का खतरा भी मंडरा रहा है, जो मानसून और खेती पर असर डाल सकता है. अगर बारिश कमजोर रही, तो किसानों की आय पर असर पड़ेगा और ट्रैक्टर खरीदने की क्षमता भी घट सकती है.
CRISIL tractor report: भारत में ट्रैक्टर की मांग पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रही थी, लेकिन अब इसमें थोड़ी सुस्ती आने के संकेत मिल रहे हैं. क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगले वित्त वर्ष में ट्रैक्टर बिक्री की ग्रोथ घटकर केवल 0 से 2 प्रतिशत तक रह सकती है. कुल बिक्री करीब 12 लाख यूनिट (1.2 मिलियन) रहने का अनुमान है.
इस धीमी रफ्तार की सबसे बड़ी वजह इस साल का हाई बेस इफेक्ट है. आसान शब्दों में समझें तो इस साल बिक्री बहुत ज्यादा रही, इसलिए अगले साल उतनी तेज बढ़त दिखना मुश्किल होगा. इसके साथ ही अल नीनो का खतरा भी मंडरा रहा है, जो मानसून और खेती पर असर डाल सकता है. अगर बारिश कमजोर रही, तो किसानों की आय पर असर पड़ेगा और ट्रैक्टर खरीदने की क्षमता भी घट सकती है.
इस साल क्यों बढ़ी थी ट्रैक्टर की बिक्री
अगर मौजूदा वित्त वर्ष की बात करें, तो ट्रैक्टर बिक्री में करीब 22 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली थी. इसके पीछे कई अहम वजहें थीं.
सबसे बड़ा कारण GST में कटौती रहा. 22 सितंबर 2025 से ट्रैक्टर पर GST 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया, जिससे ट्रैक्टर खरीदना सस्ता हो गया. इसका असर यह हुआ कि नए खरीदारों की संख्या बढ़ी और पुराने ट्रैक्टर बदलने वालों ने भी खरीदारी तेज कर दी. इसके अलावा, अच्छे मानसून और बेहतर फसल ने किसानों की आय बढ़ाई, जिससे ट्रैक्टर की मांग को और मजबूती मिली.
अब क्यों धीमी पड़ सकती है मांग
बिजनेसलाइ की खबर के अनुसार, सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी बताते हैं कि, अगले वित्त वर्ष में बाजार सामान्य स्थिति में लौटेगा. यानी इस साल जितनी तेज ग्रोथ रही, उतनी आगे देखने को नहीं मिलेगी. उन्होंने बताया कि अगर अल नीनो का असर बढ़ता है, तो मानसून कमजोर हो सकता है. इससे खेती पर असर पड़ेगा और ट्रैक्टर की मांग भी घट सकती है. खासकर अगले वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है. हालांकि, जलाशयों में पर्याप्त पानी और ट्रैक्टर की स्थिर कीमतें साल के शुरुआती छह महीनों में कुछ राहत दे सकती हैं.
ट्रैक्टर अब बन चुका है बहुउपयोगी साधन
आज के समय में ट्रैक्टर सिर्फ खेत जोतने के लिए ही नहीं, बल्कि ढुलाई, सिंचाई और अन्य कई कामों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है. यही वजह है कि छोटे और बिखरे हुए खेतों के बावजूद इसकी मांग बनी हुई है.
आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 60 से 65 प्रतिशत ट्रैक्टर बिक्री पुराने ट्रैक्टर को बदलने के लिए होती है, जबकि 35 से 40 प्रतिशत लोग पहली बार ट्रैक्टर खरीदते हैं.
नए उत्सर्जन नियमों से मिल सकती है राहत
ट्रैक्टर बाजार के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि सरकार TREM-V उत्सर्जन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर विचार कर रही है. पहले यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होने थे, जिससे ट्रैक्टर की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती थी. लेकिन अब प्रस्ताव है कि इन्हें धीरे-धीरे लागू किया जाए.
इसके तहत 25 हॉर्सपावर से कम और 75 हॉर्सपावर से ज्यादा वाले ट्रैक्टरों पर नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे, जबकि 25 से 75 हॉर्सपावर वाले ट्रैक्टरों को 2032 तक राहत मिल सकती है.
कीमतों पर क्या होगा असर
क्रिसिल की डायरेक्टर पूनम उपाध्याय के अनुसार, 25 से 75 हॉर्सपावर वाला सेगमेंट बाजार का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा है और यह कीमतों के प्रति बहुत संवेदनशील है.
अगर नए नियम समय से लागू होते, तो कीमतें बढ़ जातीं और मांग पर असर पड़ता. लेकिन नियमों को टालने से फिलहाल किसानों और कंपनियों दोनों को राहत मिलेगी.
निर्यात का असर सीमित
भारत से ट्रैक्टर निर्यात कुल बिक्री का करीब 10 प्रतिशत ही है और इसमें भी मध्य पूर्व का हिस्सा बहुत कम है. इसलिए वैश्विक तनाव या युद्ध का इस सेक्टर पर सीधा असर कम रहेगा. हालांकि, शिपमेंट में देरी और ढुलाई लागत बढ़ने से कुछ असर जरूर देखने को मिल सकता है.
मुनाफा और निवेश की स्थिति
अगले वित्त वर्ष में भले ही बिक्री की रफ्तार धीमी हो, लेकिन कंपनियों के मुनाफे पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. ऑपरेटिंग मार्जिन 13 से 13.5 प्रतिशत के बीच स्थिर रहने का अनुमान है. साथ ही कंपनियां करीब 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी, जिसे वे अपने आंतरिक संसाधनों से पूरा करेंगी. इससे कंपनियों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी.
आने वाले समय में ट्रैक्टर बाजार कई अहम बातों पर निर्भर करेगा. इनमें मानसून की स्थिति, अल नीनो का असर, नए उत्सर्जन नियम और कच्चे माल की कीमतें शामिल हैं. अगर ये सभी कारक संतुलित रहते हैं, तो ट्रैक्टर बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है.