बरसात में धान ही नहीं, अनानास की भी होती है खेती.. क्वीन पाइनएप्पल की विदेशों तक धूम, जानें खासियत
त्रिपुरा का क्वीन अनानास अपनी मिठास, सुनहरे रंग, खास खुशबू और कम फाइबर के लिए मशहूर है. GI टैग मिलने के बाद इसकी पहचान देश-विदेश में बढ़ी है. ओमान समेत विदेशी बाजारों में इसका निर्यात होता है. त्रिपुरा में करीब 12,000 हेक्टेयर में इसकी खेती होती है. केंद्र ने खेती और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 236 करोड़ रुपये का मिशन शुरू किया है.
बरसात के मौसम को आमतौर पर धान, दलहन और तिलहन की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन इस दौरान अनानास की भी खेती होती है. देश के कई हिस्सों में अनानास उगाया जाता है, लेकिन त्रिपुरा का क्वीन अनानास अपनी मिठास, सुनहरे पीले रंग, खास खुशबू और कम फाइबर के कारण अलग पहचान रखता है. इसकी मांग विदेशों में भी है. ओमान समेत कई यूरोपीय देशों तक में क्वीन अनानास की का निर्यात होता है. खास बात यह है कि क्वीन अनानास को भौगोलिक संकेत (GI Tag) भी मिला हुआ है.
त्रिपुरा का क्वीन अनानास राज्य का राजकीय फल है और पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख कृषि उत्पादों में शामिल है. अपने मीठे स्वाद, सुनहरे पीले रंग, खास खुशबू और कम फाइबर के कारण यह अनानास देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है. यहां की पहाड़ी जमीन और नम मौसम इसकी खेती के लिए अनुकूल माने जाते हैं. क्वीन अनानास को 2018 में जीआई टैग मिला था. उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (NERAMAC) के प्रयासों से इसे जीआई पहचान मिली. इसके बाद त्रिपुरा के इस अनानास की पहुंच अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बढ़ी है.
इन देशों में होता है निर्यात
त्रिपुरा से क्वीन अनानास का निर्यात ओमान जैसे देशों में किया जा चुका है. अब इसे नीदरलैंड समेत यूरोप के कई दूसरे बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. इससे किसानों के लिए नए बाजार और बेहतर कीमत की उम्मीद बढ़ी है. केंद्र सरकार ने अनानास की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को बेहतर व प्रतिस्पर्धी दाम दिलाने के लिए 2026 में त्रिपुरा में 236 करोड़ रुपये के निवेश से ‘मिशन क्वीन पाइनएप्पल’ शुरू किया है. इस मिशन का मकसद अनानास की खेती, मार्केटिंग और किसानों की आय को मजबूत करना है.
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रासायनिक उर्वरकों का ज्यादा इस्तेमाल
त्रिपुरा का क्वीन अनानास राज्य के पहाड़ी इलाकों में उगाया जाता है. इसकी खेती में आमतौर पर रासायनिक उर्वरकों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जाता है. यही वजह है कि इसे प्राकृतिक तरीके से उगने वाले खास कृषि उत्पादों में गिना जाता है. क्वीन अनानास पकने के बाद सुनहरे रंग का हो जाता है. इसका स्वाद मीठा और खास सुगंध वाला होता है, जो इसे दूसरी किस्मों से अलग पहचान देता है. इसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला हुआ है. इसका मतलब है कि ‘क्वीन अनानास’ नाम का इस्तेमाल सिर्फ त्रिपुरा में उगाए जाने वाले इस खास अनानास के लिए किया जा सकता है. इससे उत्पाद की पहचान और किसानों को बाजार में बेहतर स्थिति मिलती है.
करीब 12,000 हेक्टेयर में होती है खेती
त्रिपुरा में क्वीन अनानास की खेती करीब 12,000 हेक्टेयर जमीन पर होती है. हर साल लगभग 23,000 मीट्रिक टन क्वीन अनानास बाजार में पहुंचता है. आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में भारत में करीब 11.04 लाख टन अनानास का उत्पादन हुआ. वहीं, त्रिपुरा में हर साल करीब 1.70 से 1.80 लाख टन अनानास का उत्पादन होता है. इस उत्पादन के साथ त्रिपुरा देश का दूसरा सबसे बड़ा अनानास उत्पादक राज्य बन गया है.
कब होती है क्वीन अनानास की खेती
त्रिपुरा के मशहूर क्वीन अनानास की खेती के लिए मॉनसून का समय सबसे अच्छा माना जाता है. किसान आमतौर पर अप्रैल-मई से लेकर जुलाई-अगस्त के बीच इसके पौधों का रोपण करते हैं. इस दौरान मिट्टी में नमी और बारिश की वजह से पौधों को अच्छी बढ़त मिलती है. क्वीन अनानास की फसल तैयार होने में रोपण के बाद करीब 18 से 24 महीने का समय लगता है. यानी पौधे लगाने के करीब डेढ़ से दो साल बाद फल कटाई के लिए तैयार होते हैं. इस अनानास की मुख्य कटाई का सीजन मई से अगस्त तक रहता है. हालांकि, कुछ जगहों पर मई के मध्य से सितंबर के मध्य तक भी क्वीन अनानास बाजार में उपलब्ध रहता है. इससे किसानों को मॉनसून के बाद भी कुछ समय तक उपज बेचने का मौका मिलता है.
खबर से जुड़े 6 प्रमुख आंकड़े
- 2018 में क्वीन अनानास को मिला GI टैग
- 236 करोड़ रुपये मिशन क्वीन पाइनएप्पल में निवेश
- 12,000 हेक्टेयर में क्वीन अनानास की खेती
- 23,000 मीट्रिक टन है सालाना क्वीन अनानास की बाजार सप्लाई
- 1.70-1.80 लाख टन है त्रिपुरा का सालाना अनानास उत्पादन
- 18-24 महीने में पौधे लगाने के बाद फसल तैयार हो जाती है