मौसम विभाग ने जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है. इस दौरान सूखा और उमस जैसी स्थितियां लोगों की परेशानी बढ़ाएंगी. जबकि, खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई प्रभावित होगी, जो कृषि उत्पादन बुरी स्थिति की वजह बनेगी. मौसम विभाग ने कहा कि जुलाई के दौरान पूर्वोत्तर भारत के राज्यों और हरियाणा, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड के कुछ हिस्सों में तेज बारिश देखी जा सकती है.
सूखे और उमज जैसी स्थितियों की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार को अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि जुलाई के दौरान भारत में मासिक औसत बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है. IMD के मौसम विज्ञान महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि जुलाई के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. अल नीनो के प्रभाव के चलते स्थिति सूखे और उमस जैसी बनने की चेतावनी दी गई है.
जुलाई के दौरान केवल 94 फीसदी बारिश का अनुमान
मौसम विभाग ने बताया कि जुलाई में लंबी अवधि के औसत (एलपीए) (1971-2020) की 94 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है. भारत में जुलाई में एलपीए बारिश लगभग 280.4 मिमी होती है. एलपीए किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित अवधि, जैसे कि एक महीने या एक मौसम के लिए दर्ज की गयी वर्षा को संदर्भित करता है, जिसका औसत आमतौर पर 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि में निकाला जाता है.
इन राज्यों के कुछ हिस्सों में में ज्यादा बारिश का अलर्ट
आईएमडी ने कहा है कि उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है. उत्तर पश्चिम भारत के राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों में तेज बारिश देखी जा सकती है. इसी तरह उत्तर पूर्व भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में तेज बारिश की संभावना बन सकती है. वहीं, पूर्वी मध्य भारत के छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड के कुछ हिस्सों में ज्यादा बारिश देखने को मिल सकती है.
जून के दौरान भारत में 43 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई
मौसम विज्ञानी नवदीप दहिया ने कहा कि जून के दौरान सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि इससे पहले के अल नीनो वाले सालों में जून 2014 में बारिश में 44 फीसदी कमी दर्ज की गई थी. जबकि, जून 2009 में यह सामान्य से 47 फीसदी बारिश कम थी. हालांकि, जून में सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड साल 1926 का है, जब बारिश में 49 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी.
कृषि उत्पादन पर गहराया संकट
नवदीप दहिया ने कहा कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए बेहतर बारिश की उम्मीद घट गई है. पूर्वी और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अभी भी अच्छी मॉनसून बारिश का इंतजार है. बारिश रुक-रुक कर होने के कारण कई ग्रामीण इलाकों में खरीफ (धान) की बुवाई में देरी हो रही है. अब जुलाई में कम बारिश के अनुमान ने कृषि उत्पादन पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.